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केंद्र और राज्य की लड़ाई में बेहाल दिल्ली एमसीडी, असली पीड़ित कौन?

दिल्ली में सफाई कर्मचारियों की समस्या का स्थाई समाधान होता नहीं दिख रहा है.

Updated On: Oct 05, 2018 06:29 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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केंद्र और राज्य की लड़ाई में बेहाल दिल्ली एमसीडी, असली पीड़ित कौन?

दिल्ली में बीते कुछ दिनों से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और हंगामे को देखते हुए राज्य सरकार ने आखिरकार एमसीडी को 500 करोड़ रुपए देने का ऐलान कर दिया है. दिल्ली सरकार ने सिर्फ पूर्वी नगर निगम को ही 330 करोड़ रुपए देने का फैसला किया है. दिल्ली सरकार की तरफ से 330 करोड़ देने पर पूर्वी नगर निगम का कहना है कि यह पैसे तो बकाए में ही चले जाएंगे असल दिक्कत तो आगे अक्टूबर से दिसंबर महीने के बीच आएगी. जनवरी से मार्च महीने तक प्रॉपर्टी टैक्स के जरिए एमसीडी अपने कर्मचारियों के वेतन का जुगाड़ कर लेता है, लेकिन बाद में पैसों की काफी दिक्कत होनी शुरू हो जाती है.

पैसों की सबसे ज्यादा किल्लत पूर्वी नगर निगम में ही है. इसी को ध्यान में रखते हुए शायद दिल्ली सरकार 330 करोड़ रुपए पूर्वी नगर निगम को दे रही है. ऐसा माना जा रहा है कि पूर्वी नगर निगम यह पैसा ग्रूप-ए, ग्रुप-बी और ग्रुप-सी कर्मचारियों की दो महीने की तनख्वाह और रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंडिंग पेंशन में खर्च करेगा. इसके बाद भी पूर्वी नगर निगम को और पैसे की जरूरत है.

दिल्ली सरकार ने बुधवार को ही दिल्ली हाईकोर्ट में कहा था कि वह अगले दो दिनों में दिल्ली के तीनों नगर निगमों को 500 करोड़ रुपए की राशि जारी कर देगी. पिछले 24 दिनों से पूर्वी नगर निगम के कर्मचारी वेतन और नियमित भुगतान को लेकर हड़ताल पर बैठे हैं. बीते बुधवार को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को मौजूदा संकट से निपटने के लिए राशि जारी करने का आदेश जारी किया था.

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट

हाईकोर्ट में दो जजों की पीठ ने साफ कहा था कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को पता है कि पूर्वी दिल्ली में सफाई कर्मचारी काम पर नहीं हैं. इस कारण पूर्वी नगर निगम के इलाकों में कचरे का पहाड़ जमा हो गया है. इस समस्या का हल हर हालत में दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार निकाले.

हाईकोर्ट के निर्देश मिलने के बाद दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा था कि दिल्ली सरकार जल्द ही पूर्वी नगर निगम को 500 करोड़ की राशि जारी कर देगी. इस पर साउथ दिल्ली और नॉर्थ दिल्ली के वकीलों ने भी कोर्ट से कहा कि दिल्ली सरकार की जारी धनराशि में कुछ पैसा उन्हें भी चाहिए. तब हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि दिल्ली सरकार की तरफ से जारी धनराशि को किस अनुपात में किसे दिया जाए, इसका फैसला दिल्ली सरकार ही करेगी.

अब, जबकि पैसे जारी करने का ऐलान दिल्ली सरकार की तरफ से कर दिया गया है तो इस पैसे पर एमसीडी के अंदर ही राजनीति शुरू हो गई है. दिल्ली सरकार ने सिर्फ पूर्वी नगर निगम के लिए ही 330 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया है. इस पर विपक्षी पार्टियों ने राजनीति शुरू कर दी है. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि आम आदमी पार्टी का पूर्वी दिल्ली में ज्यादा जनाधार है तो वह ज्यादा पैसा पूर्वी दिल्ली को देकर अपनी राजनीति चमका रही है. जबकि, उत्तरी नगर निगम और दक्षिणी नगर निगम में भी पैसे की काफी किल्लत है. डेंगू-मलेरिया का सीजन चल रहा है ऐसे में तीनों नगर निगमों को और पैसे चाहिए.

दिलचस्प बात यह है कि अभी तो दिल्ली सरकार ने 500 करोड़ देने की बात की है और पहले से ही नगर निगमों के खर्चे का हिसाब तैयार है. एक तरफ वेतन और पेंशन की मांग को लेकर सफाई कर्मचारी सड़क पर उतर गए हैं तो दूसरी तरफ नगर निगम कह रहे हैं कि इतने पैसे से सिर्फ दो महीने का खर्चा ही चल सकेगा. नालों की सफाई के साथ डेंगू-मलेरिया के रोकथाम के लिए भी कई स्तर पर काम करने हैं. त्योहार का सीजन भी आ रहा है.

दिल्ली नगर निगम में बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच चल रही रस्सा-कशी पर राजनीति अब साफ दिखाई देने लगी है. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सफाई-कर्मचारियों के नाम पर बीजेपी गंदी राजनीति कर रही है. गुरुवार को अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया था कि वह सफाई कर्मचारियों को लेकर बेहद चिंतित हैं. हर दो महीने के बाद इन लोगों को अपनी सैलरी के लिए हड़ताल करनी पड़ती है. दिल्ली सरकार इस साल सिर्फ पूर्वी नगर निगम को ही 770 करोड़ रुपए दे चुकी है. साल 2014-15 की तुलना में पूर्वी नगर निगम को अब तक दोगुना पैसा दिया जा चुका है. सफाई कर्मचारियों के नाम पर केंद्र सरकार और बीजेपी दोनों गंदी राजनीति कर रही हैं.’

गुरुवार को सैकड़ों सफाई कर्मचारी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के आवास का घेराव करने निकले थे, लेकिन 500 मीटर चलने के बाद ही दिल्ली पुलिस और सफाई कर्मचारियों के बीच जमकर संघर्ष हुआ. सफाई कर्मचारी पुलिस की बैरिकेड तोड़ने में कामयाब हो गए. सफाई कर्मचारियों का उग्र रूप देखते हुए अरविंद केजरीवाल के आवास से कुछ कदम पर दूसरी भी बैरिकेडिंग की गई थी, उसको भी सफाई कर्मचारियों ने तोड़ दिया. दिल्ली पुलिस के जवान के साथ अर्द्धसैनिक बल भी सफाई कर्मचारियों के आगे लाचार और विवश दिखाई दे रहे थे.

सफाई कर्मचारी यूनियन के एक नेता संजय गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘जबतक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं हड़ताल जारी रहेगी. सीएम को हर हाल में हमसे मिलना होगा. सफाई कर्मचारियों की न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार की चिंता है. हमलोग अपना आंदोलन और तेज करने जा रहे हैं.’

सफाई कर्मचारियों के उग्र रूप को देखते हुए ही अरविंद केजरीवाल ने 15 सफाई कर्मचारियों के यूनियनों को बातचीत के लिए बुलाया. इस बातचीत में दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम भी शामिल हुए. इस बैठक में सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि केंद्र सरकार एमसीडी के साथ सौतेला व्यवहार अपनाती रही है. केंद्र सरकार को प्रति नागरिक 450 रुपए देना होता है. केंद्र सरकार देश के अन्य नगर निगमों को ये राशि मुहैया करा रही है, लेकिन दिल्ली को केंद्र शासित राज्य का हवाला देकर पूरी व्यवस्था को चकनाचूर कर दिया है. अगर पिछले पांच साल में 450 रुपए प्रति नागरिक जोड़ दिया जाए तो केंद्र सरकार को दिल्ली सरकार को 5 हजार करोड़ रुपए देनी चाहिए.

कुल मिलाकर दिल्ली में सफाई कर्मचारियों की समस्या का स्थाई समाधान होता नहीं दिख रहा है. एमसीडी कर्मचारियों की मांग है कि कर्मचारियों की एरियर, कैशलेस कार्ड, 9 हजार से भी ज्यादा अस्थाई कर्मचारियों को परमानेंट किया जाए, लेकिन इन मांगों को मानने में दिल्ली सरकार को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. भारत के संविधान के अनुसार सिविक बॉडी राज्य का मसला है, इसलिए केंद्र सरकार सीधे पैसा नहीं देती है. क्योंकि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है और देश की राजधानी भी है इसलिए अब कर्मचारियों की सारी उम्मीद केंद्र सरकार पर टिक गई है.

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