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टू-व्हीलर वाहनों की बिक्री की बढ़ेगी स्पीड

खर्च करने लायक रकम बढ़ने से इस फेस्टिव सीजन में बाइक सेल्स की रफ्तार बढ़ेगी.

Updated On: Dec 02, 2016 08:01 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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टू-व्हीलर वाहनों की बिक्री की बढ़ेगी स्पीड

बेहतर मॉनसून, पे कमीशन और फेस्टिव सीजन के उत्साह में कंज्यूमर्स इस साल जमकर टू-व्हीलर्स की खरीदारी करने वाले हैं.

रेटिंग एजेंसी इकरा को उम्मीद है कि इस फिस्कल ईयर में फेस्टिव सीजन के दौरान दोपहिया वाहनों की तगड़ी खरीदारी होगी.

एजेंसी का कहना है कि सातवें पे कमीशन की सिफारिशों को लागू करने और वन रैंक वन पेंशन से सेल्स को बढ़ावा मिलेगा.

साथ ही इस साल बेहतर मॉनसून से खरीफ की फसल भी अच्छी रह सकती है, जिससे किसानों के पास कैश बढ़ेगा और वे खरीदारी बढ़ाएंगे.

इकरा का कहना है कि इस फिस्कल ईयर में टू-व्हीलर इंडस्ट्री की ग्रोथ 10 से 12 पर्सेंट तक रह सकती है.

गांवों के विकास के लिए बजट के आवंटन के साथ-साथ रबी की अच्छी फसल से भी किसानों के पास कैश बढ़ा है.

बुआई के दौरान मॉनसूनी बारिश अच्छी होने से दालों, तिलहन, चावल और दूसरे अनाजों का रकबा बढ़ा है.

ऐसे में अगर किसान 2016 में खरीफ फसल की कटाई करते हैं तो उनके पास खर्च करने लायक रकम ज्यादा रहेगी.

फिस्कल ईयर 2016-2017 के पहले पांच महीनों में टू व्हीलर इंडस्ट्री की ग्रोथ 16.5 पर्सेंट रह सकती है.

ग्रामीण मांग में सुधार के संकेत नजर आने लगे हैं लेकिन टिकाऊ ग्रोथ नजर आने में वक्त लगेगा.

इकरा का मानना है कि टीयर 2 और टीयर 3 शहरों के साथ गांवों को बैंकिंग के दायरे में लाने से भी घरेलू डिमांड को सपोर्ट मिलेगा.

फिलहाल गांवों और छोटे शहरों में बैंकों की पर्याप्त सुविधा नहीं रहने के कारण टू व्हीलर खरीदने के लिए लोन नहीं ले पाते हैं.

पिछले कुछ साल में सड़कों का नेटवर्क बढ़ने के बावजूद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं होने के कारण टू-व्हीलर्स की डिमांड बढ़ी है.

इकरा का कहना है कि फिस्कल ईयर 2017 की शुरुआत में मोटरसाइकिल की बिक्री में तेजी से इंडस्ट्री को राहत है.

आगे भी यह तेजी बरकरार रहने की उम्मीद है. खासतौर पर ग्रामीण बाजार के लिए अगले कुछ महीने काफी अहम बने रहेंगे क्योंकि किसानों की आमदनी का जरिया खेती है.

दूसरी तरफ फिस्कल ईयर 2017 में भी स्कूटर्स की सेल्स सबसे ज्यादा बनी रहेगी.

शहरीकरण बढ़ने, वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी ज्यादा होने, गैर-शहरी इलाकों में स्कूटर्स को अपनाने और स्कूटर्स की पैठ कम होने से इसकी ग्रोथ बढ़ने के चांस है.

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