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जब लंदन में पढ़ाई छोड़ IPS अफसर बनी किसान की बेटी इल्मा अफरोज

इल्मा ने दिल्ली और लंदन में भी पढ़ाई की. लेकिन देशभक्ति इल्मा को लंदन, इंडोनेशिया और पेरिस से भी वापस ले आई और यहां आकर उन्होंने वो कर दिखाया जिसका सेहरा देश के चंद लोगों के सिर ही बंधता है

FP Staff Updated On: May 11, 2018 04:17 PM IST

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जब लंदन में पढ़ाई छोड़ IPS अफसर बनी किसान की बेटी इल्मा अफरोज

मुरादाबाद के कुंदरकी कस्बे में रहने वाली इल्मा अफरोज के पिता का इंतकाल उस वक्त हो गया था जब वो सिर्फ 14 साल की थी. पिता पेशे से एक किसान थे. उसके बाद इल्मा और उसके छोटे भाई की जिम्मेदारी संभाली उनकी मां ने. लेकिन पढ़ाई में कामयाबी हासिल करते हुए इल्मा ने भी कभी उन्हें मायूस नहीं किया.

कस्बे से पढ़ाई करने के बाद इल्मा ने दिल्ली और लंदन में भी पढ़ाई की. लेकिन हुब्बुल वतनी (देशभक्ति) इल्मा को लंदन, इंडोनेशिया और पेरिस से भी वापस ले आई और यहां आकर उन्होंने वो कर दिखाया जिसका सेहरा देश के चंद लोगों के सिर ही बंधता है. इतना ही नहीं इल्मा का भाई भी संस्कृत साहित्य विषय के साथ सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा है. आइए इल्मा की ज़ुबान में जानते हैं उनकी कामयाबी की दांस्ता.

‘मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की एक लाइन ‘सपने वो होते हैं जो तुम्हे सोने न दें’ अक्सर मुझे सोने नहीं देती थी. ये ही वजह थी कि मैं मुरादाबाद से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सेंट स्टीफेंस कॉलेज दिल्ली आ गई. जब तक कॉलेज की पढ़ाई पूरी होती मुझे आगे की पढ़ाई के लिए मौके मिलने शुरु हो गए. दिल्ली के बाद मुझे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका मिल गया.

पेरिस स्कूल ऑफ इंटरनेशनल में भी पढ़ी और इंडोनेशिया में भी पढ़ने का मौका मिला. इसी दौरान क्लिंटन फाउंडेशन के साथ काम करने का मौका भी मिला. लेकिन इस कामयाबी पर पहुंचने के बाद भी दिल को एक सुकून नहीं मिल रहा था. मन में एक ही ख्याल आता था कि मेरा काम और मेरी पढ़ाई किसके लिए. फिर एक दिन मैंने अपने मुल्क हिन्दुस्तान वापस लौटने का फैसला किया. और अच्छी बात ये है कि मेरे इस फैसले में मेरे छोटे भाई अरफात अफरोज और मेरी मां ने मेरा पूरा साथ दिया.

हिन्दुस्तान वापस आने के बाद सबसे पहले मैंने सिविल सर्विस की तैयारी शुरु की. किस्मत मेरे साथ थी. पहले प्रयास में ही मैंने 217वीं रैंक के साथ परीक्षा पास कर ली. अब मैं एक आईपीएस अफसर बनने जा रही हूं. खुशी की बात ये है कि अब मैं किसी विदेशी मुल्क के लिए नहीं अपने मुल्क के लिए काम करुंगी.

(नासिर हुसैन की न्यूज18 के लिए रिपोर्ट)

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