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नई सदी के नटरवाल तेलगी की मौत हो गई लेकिन कहानियां जिंदा रहेंगी

खरबों रुपये के स्टैंप पेपर घोटाले के सरगना अब्दुल करीम तेलगी ने जेल में दम तोड़ दिया. लेकिन तेलगी की कारगुजारियां हमेशा याद दिलाती रहेंगी कि हमारे सिस्टम में कितने बड़े छेद हैं

Rakesh Kayasth Rakesh Kayasth Updated On: Oct 27, 2017 12:36 PM IST

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नई सदी के नटरवाल तेलगी की मौत हो गई लेकिन कहानियां जिंदा रहेंगी

खरबों रुपये के स्टैंप पेपर घोटाले के सरगना अब्दुल करीम तेलगी ने जेल में दम तोड़ दिया. लेकिन तेलगी की कारगुजारियां हमेशा याद दिलाती रहेंगी कि हमारे सिस्टम में कितने बड़े छेद हैं. बात 2003 के शुरुआती महीनों की है. उन दिनों मैं देश के एक बड़े न्यूज चैनल में काम किया करता था. महाराष्ट्र के ब्यूरो प्रमुख ने मुझे फोन करके बताया कि स्टैंप पेपर घोटाले के आरोप अब्दुल करीम तेलगी को अजमेर से गिरफ्तार करके लाया गया है.

अदालत में उसकी पेशी की तस्वीरें सेटेलाइट के जरिए मुंबई से दिल्ली ऑफिस के लिए रवाना की जा चुकी हैं. स्टैंप पेपर घोटाला चंद दिनो पहले ही सुर्खियों में आया था और भानुमति के पिटारे की तरह इससे एक के बाद एक हैरान करती कई कहानियां निकलती जा रही थीं.

वीडियो क्लिपिंग देखने के लिए मैं एडिट मशीन पर बैठा. मुझे अच्छी तरह याद है, शक्ल से निम्म-मध्यमवर्गीय दिखने वाला एक थुलथुला आदमी कोर्ट के बाहर पुलिस से घिरा खड़ा था. उन दिनो न्यूज चैनलों की ज्यादा भीड़ नहीं हुआ करती थी. प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से मिलाकर कुल पांच छह पत्रकार रहेंगे. पत्रकारों ने अपने अंदाज में सवाल शुरू किए तो तेलगी ने एक पत्रकार को लगभग पुचकारते हुए कहा, अरे अभी रुक जाओ सबको आ जाने दो फिर बताता हूं.

किसी दूसरे पत्रकार ने तेलगी से कोई सवाल किया. तेलगी हंसा, एक बेहद बेफिक्र और निर्लज्ज हंसी थी वह. उसने फिर वही जवाब दिया, बताता हूं जरा सबको आ तो जाने दो, जल्दी क्या है. इसके चंद मिनट बाद तेलगी पुलिस की गाड़ी में बैठा और मीडिया से बात किए बिना हाथ हिलाता हुआ चला गया. लेकिन कहानियों का पिटारा खुल चुका था.

तेलगी स्कैम संभवत: 2003 की सबसे बड़ी घटना थी, जिसने सिस्टम, ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक गलियारों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया था. देश के इतिहास का ये शायद इकलौता ऐसा घोटाला था, जिसमें एक गुमनाम आदमी ने खरबों रुपए के वारे-न्यारे किए.

केले बेचने से किंगपिन बनने तक का सफर

रेलवे के एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के घर पैदा हुआ अब्दुल करीम तेलगी एक वक्त नासिक रेलवे स्टेशन पर केले बेचा करता था. इसी संघर्ष के साथ जैसे-तैसे उसने अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर किसी छोटी-मोटी नौकरी के सिलसिले में गल्फ चला गया. करीब सात साल बाद वापस लौटकर आया और आते ही उसने जालसाजी के काम में हाथ आजमाने शुरू कर दिए. 1990 के शुरुआती दिनों में उसका नाम फर्जी पासपोर्ट बनाने के धंधे में आया और उसपर मुकदमे में भी दर्ज हुए.

लेकिन 1996 के आते-आते तेलगी आधुनिक भारत के सबसे बड़े घोटालों में एक स्टैंप पेपर स्कैम की नींव रख चुका था. नासिक में मौजूद नेशनल सिक्यूरिटी प्रेस के कर्मचारियों की मिलीभगत से तेलगी रात-दिन जाली स्टैंप पेपर छाप रहा था. 2003 में जब तेलगी स्कैम का भंडाफोड़ हुआ तो पता चला कि जाली स्टैंप पेपर का धंधा चलाने के लिए उसने साढ़े तीन सौ कर्मचारियों की पूरी फौज खड़ी कर रखी थी. अपने एजेंट्स की मदद से तेलगी ने फर्जी स्टैंप पेपर का कारोबार भारत के 70 शहरों में फैला रखा था.

देश का कोई ऐसा स्टॉक एक्सेज, बैंक, इंश्योरेंस कंपनी या कॉरपोरेट नहीं होगा, जहां तेलगी ने जाली स्टैंप पेपर की सप्लाई ना की हो. अगर तेलगी के घोटाले के असर की बात करें तो इसका मतलब सीधे-सीधे ये हुआ कि 1996 से लेकर 2003 तक के बीच देश भर में हुए लाखों करोड़ रुपये के सौदे तकनीक तौर पर अमान्य कहे जा सकते हैं. एक लॉ एक्सपर्ट तो उस दौर में यह कहकर सनसनी मचा दी थी कि अब हजारो शादियां भी नाजायज हो गई हैं, क्योकि उन्हें रजिस्टर करने के लिए जाली स्टैंप पेपर का इस्तेमाल किया गया है.

बीस हजार करोड़ का घोटाला

तेलगी का स्टैंप पेपर घोटाला कितना बड़ा था, इसे लेकर मीडिया में तरह-तरह की रिपोर्ट आती रही हैं. कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि तेलगी ने लगभग एक दशक में करीब 20 हजार करोड़ रुपए के जाली स्टैंप पेपर बेचे. अगर अभी के आधार पर इन पेपर्स की कीमत आंकी जाए तो ये घोटाला लगभग एक लाख करोड़ रुपए का बैठेगा. सवाल ये है कि बेहद कड़ी सुरक्षा वाले नेशनल सिक्यूरिटी प्रेस में तेलगी किस तरह सेंध लगाने में कामयाब हुआ और पूरे देश में बरसो तक उसका धंधा किस तरह बेरोक-टोक चलता रहा.

जब मामले की छानबीन शुरू हुई तो देश हैरान रह गया. तेलगी के अंडरवर्ल्ड लिंक थे. लेकिन ज्यादा बड़ी बात ये थी कि सत्ता प्रतिष्ठानों में उसकी अंदर तक पैठ थी. तेलगी के सहयोगी के तौर पर गिरफ्तार किए गए महाराष्ट्र पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर के पास से जब 200 करोड़ रुपए की संपत्ति बरामद हुई, तो मीडिया को समझ में आया कि इस घोटाले को जितना बड़ा माना जा रहा है, वो उससे कहीं ज्यादा बड़ा है.

जेब में सरकार, नौकरी पर पुलिस वाले

2003 के बाद से तेलगी स्टैंप पेपर घोटाले की परते खुलनी शुरू हुईं, तो हर रोज एक नई कहानी सामने आने लगी. ये कहा जाने लगा कि तेलगी तत्कालिक महाराष्ट्र सरकार को अपनी जेब में रखता था. दर्जन भर से ज्यादा टॉप लेवल के पुलिस ऑफिसर और ब्यूरोक्रेट उससे बकायदा सैलरी लेते थे. यही वजह है कि इतना घोटाला बिना किसी रुकावट के चलता रहा.

तेलगी की गिरफ्तारी के कुछ साल बाद उसके नार्को टेस्ट की एक कथित सीडी सामने आई. जिसमें तेलगी महाराष्ट्र सरकार में शामिल पार्टी के सबसे बड़े नेता का नाम ले रहा था. हालांकि जांच अधिकारियों ने बाद में तेलगी के इस बयान को खारिज कर दिया. लेकिन यह सच है कि तेलगी कांड के छींटे महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री समेत कई बड़े नेताओं पर पड़े. इतना ही नहीं दिल्ली की राजनीति से जुड़े अलग-अलग पार्टियों वाले कई बड़े नेताओं के नाम भी इस घोटाले में उछले. लेकिन जैसा कि आमतौर पर होता है, इस मामले में शक के दायरे में आए ज्यादातर राजनेताओं का कुछ नहीं बिगड़ा.

30 साल की सजा और 200 करोड़ का जुर्माना

लेकिन लंबी अदालत कार्रवाई के बाद तेलगी का मामला अंजाम तक पहुंच गया. कोर्ट ने उसे अलग-अलग धाराओं में कुल मिलाकर 30 साल की सजा सुनाई. इसके अलावा उस पर 202 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया. तेलगी कर्नाटक की एक जेल में अपनी सजा भुगत रहा था. लेकिन उसके रंग-ढंग नहीं बदले थे.

जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शिकायत कि उसने यहां भी सिस्टम को खरीद रखा है और कर्मचारी उसकी तीमारदारी में जुटे रहते हैं. तेलगी की शाहखर्ची और अय्याशियों के ना जाने कितने किस्से है. यह कहा जाता है कि गिरफ्तारी से ठीक पहले उसने मुंबई की एक महफिल में एक बार गर्ल पर 93 लाख रुपए लुटाए थे.

तेलगी की जिंदगी पर बनी फिल्म मुद्रक में यह प्रसंग आता है. इस फिल्म में 93 लाख रुपए का नजराना लेने वाली बार गर्ल की भूमिका राखी सावंत ने निभाई है. अय्याशी तेलगी की जीवन शैली का हिस्सा था. उसकी गिरफ्तारी के बाद ही यह बात सामने आ गई थी कि उसे एचआईवी का संक्रमण है. तेलगी को कई और बीमारियां है, जिसे लेकर परिवार वाले लगातार उसे बेल दिये जाने के लिए अदालत के चक्कर काट रहे थे. आखिरकार लगभग 15 साल का वक्त जेल में बिताने के बाद तेलगी ने सलाखों के पीछे दम तोड़ दिया. बाकी रह गई सिस्टम के खोखले होने की अनगिनत कहानियां. तेलगी तो अपनी गति को प्राप्त हो गया लेकिन इस घोटाले में जो जिन बड़े-बड़े लोगो के नाम आये थे, उनका क्या हुआ? यह सवाल उठेगा जरूर. लेकिन वक्त के साथ आहिस्ता-आहिस्ता गुम भी हो जाएगा.

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