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फेसबुक विवाद: जानिए क्यों बदनाम हुई कैंब्रिज एनालिटिका?

डेटा एनालिसिस कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका बीजेपी, कांग्रेस और जेडीयू सहित कई पार्टियों और कंपनियों को सर्विस देती है. इसका काम यूजर्स का मनोवैज्ञानिक प्रोफाइल बनाना है

Updated On: Mar 22, 2018 03:08 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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फेसबुक विवाद: जानिए क्यों बदनाम हुई कैंब्रिज एनालिटिका?

फेसबुक एकाउंट नहीं है! यह सवाल पूछते हुए सामने वाले के मन में ऐसे भाव आ सकते हैं कि आपने सोशल मीडिया जाने कौन सा खजाना मिस कर दिया है. जैसे-जैसे सोशल मीडिया का दायरा बढ़ता गया, वैसे-वैसे आपकी निजता भी कम होती गई. ताजा मामला फेसबुक का है. लाखों यूजर्स की जानकारी सरेआम होने से फेसबुक को आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा है.

कब शुरू हुआ ये ड्रामा?

यह पूरी कहानी शुक्रवार को तब शुरू हुई जब डेटा एनालिसिस फर्म कैंब्रिज एनालिटिका ने यह स्वीकार किया कि उसने 5 करोड़ यूजर्स की अनुमति के बगैर उनके डाटा का इस्तेमाल किया है. कैंब्रिज एनालिटिका 500 अरब डॉलर की कंपनी है. कैंब्रिज एनालिटिका ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कैंपेन में भी हिस्सा लिया था.

यह खबर आने के बाद फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म से कैंब्रिज एनालिटिका को हटा दिया है. इसके बावजूद फेसबुक के शेयरों में गिरावट आई. सोमवार को फेसबुक के शेयर 7 फीसदी और मंगलवार को 2.5 फीसदी इसके शेयर लुढ़के. अमेरिका और ब्रिटेन में फेसबुक सवालों के कटघरे में है.

दूसरी तरफ फेसबुक और कैंब्रिज एनालिटिका विवाद की आंच भारत तक पहुंच गई  है. बुधवार को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके फेसबुक को चेताया. साथ ही कांग्रेस को भी इस मामले में लपेट लिया. कानून मंत्री का आरोप है कि कैंब्रिज एनालिटिका कांग्रेस की सोशल मीडिया के लिए काम करती है. प्रसाद ने यह भी सवाल पूछा कि राहुल गांधी की सोशल मीडिया प्रोफाइल में कैंब्रिज एनालिटिका का क्या हाथ है?

दूसरी तरफ कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि बीजेपी के फेकन्यूज फैक्टरी से आज एक और झूठी खबर आ गई है. फर्जी बयान, फर्जी प्रेस कॉन्फ्रेंस और फर्जी एजेंडा बीजेपी और इनके ‘लॉ लेस’ मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद के लिए हर दिन की बात हो गई है. सुरजेवाला ने कहा कि बीजेपी, जेडीयू इस कंपनी की सर्विस लेती रही है. यह कंपनी ओबीआई की पार्टनर है जो बीजेपी की सहयोगी पार्टी से जुड़े नेता के बेटे की है.

क्या कहना है कंपनी का?

बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होने के बाद ओवलीनो बिजनेस इंटेलीजेंस (ओबीआई) की वेबसाइट बंद कर दी गई. यह वेबसाइट कैंब्रिज एनालिटिका की पार्टनर कंपनी है. ओबीआई, एससीएल (स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस लैबोरेट्रीज) इंडिया के जेवी का हिस्सा है. एससीएल की पेरेंट कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका है. ओवीआई की साइट बंद होने से पहले यह स्क्रीन शॉट लिया गया है. जिसमें इसके बड़े क्लाइंट की लिस्ट साफ दिख रही है.

OBICLINT

ओबीआई कंपनी की वेबसाइट का दावा है कि बीजेपी, कांग्रेस और जेडीयू इसके क्लाइंट थे. इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक और एयरटेल भी इस लिस्ट में हैं. हालांकि रविशंकर प्रसाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह साइट बंद कर दी गई. OBISUSSPENDED

कांग्रेस का आरोप है कि 2009 में होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने ओबीआई की सर्विस ली थी. यह बीजेपी की एक सहयोगी पार्टी के नेता के बेटे की कंपनी है.

दुनिया भर के नेताओं से क्या है रिश्ता?

टाइम के मुताबिक, कैंब्रिज एनालिटिका एक पॉलिटिकल एनालिसिस फर्म है. इसका दावा है कि यह मतदाताओं की साइकोलॉजिकल प्रोफाइल बनाती है, जिससे चुनावों में इसके क्लाइंट को मदद मिलती है. कांग्रेस और बीजेपी एक दूसरे पर यह आरोप लगा रही है कि वे कैंब्रिज एनालिटिका की सर्विस ले रहे हैं और बिना कोई जानकारी मतदाताओं की साइकोलॉजिकल प्रोफाइल बना रहे हैं.

दरअसल साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग के द्वारा सबसे पहले यह फर्म लोगों के राजनीतिक रुझान और अन्य तरह की रुचियों का पता करती है और फिर जिस भी पार्टी के लिए उसे लोगों को प्रभावित करना है, उस पार्टी के पक्ष में उस तरह की खबरों या सूचनाओं को भेजती थी जो उस व्यक्ति के रुझान से मेल खाता हो. ये खबरें झूठी, सच्ची या आधी-अधूरी भी हो सकती हैं.

अमेरिका में कंपनी पर एक रिसर्चर से लाखों अमेरिकी नागरिकों का डेटा खरीदने का आरोप भी लग चुका है. उस रिसर्चर ने फेसबुक को बताया था कि वह एकेडमिक इस्तेमाल के लिए यह डेटा चाहता है. लिहाजा फेसबुक ने एलेक्जेंडर कोगन को फेसबुक से यूजर्स के डेटा लेने की अनुमति दे दी है. इसका सीधा मतलब यह था कि अमेरिका में जिन यूजर्स ने भी कोगन का ऐप डाउनलोड किया, उसका डेटा कोगन को मिल जाता था.

कोगन कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी के प्रोफेसर हैं. कोगन की कंपनी ग्लोबल साइंस रिसर्च ही फेसबुक ऐप के डेटा जमा करने का काम कर रही थी. गार्जियन के मुताबिक, इसमें समस्या यह थी कि जो भी यूजर्स कोगन का ऐप डाउनलोड करता था उसके डेटा के साथ ही उसकी फ्रेंडलिस्ट के सभी लोगों का डेटा भी कोगन की कंपनी जुटाती रही.

कैसे हुआ खुलासा?

2014 में कैंब्रिज एनालिटिका में काम करने वाले क्रिस्टोफर वाइली इस मामले में व्हिसलब्लोअर बनकर उभरे हैं. वाइली का दावा है कि कंपनी ने कम से कम 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स से जुड़ी जानकारियों का गलत इस्तेमाल किया है.

वाइली ने कहा कि कैंब्रिज एनालिटिका का मकसद एलोगरिद्म के आधार पर यूजर्स का प्रोफाइल तैयार करते थे. इसके जरिए लोगों की मानसिक कमजोरियां जानकर उन्हें ऑनलाइन सच्ची-झूठी खबरें मुहैया कराती हैं. ये खबरें आने के बाद फेसबुक ने वाइली का फेसबुक एकाउंट बंद कर दिया है.

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