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'अगर प्राइवेसी की इतनी फिक्र है तो इस्तेमाल न करें फेसबुक और वाट्सऐप'

वाट्सऐप ने पिछले साल आखिर में अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव किया था

Updated On: May 08, 2017 09:53 AM IST

FP Staff

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'अगर प्राइवेसी की इतनी फिक्र है तो इस्तेमाल न करें फेसबुक और वाट्सऐप'

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए फेसबुक के वकील के वेणुगोपाल ने कहा कि जिन्हें फेसबुक और वाट्सऐप की प्राइवेसी नीति से आपत्ति है वे फेसबुक और व्हाट्सऐप छोड़कर जा सकते हैं.

फेसबुक के वकील ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में कहा है, ‘जिन्हें ऐसा लगता है कि इस पॉलिसी से उनके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है या यह पॉलिसी खराब है तो वो फेसबुक और वाट्सऐप छोड़ कर जा सकते हैं. हमने यूजर्स को इसके लिए पूरी आजादी दी है.’

व्हाट्सऐप के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा है कि व्हाट्सऐप ने यूजर्स की प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखा है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह यूजर्स और वाट्सऐप का कॉन्ट्रैक्ट पूरी तरह से प्राइवेड डोमेन में है. इस वजह से संवैधानिक तौर पर इस पॉलिसी को सुप्रीम कोर्ट टेस्ट नहीं कर सकता.

क्या है पूरा मामला?

व्हाट्सऐप ने पिछले साल आखिर में अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव किया था. इस पॉलिसी के तहत वाट्सऐप यूजर्स के नंबर और डीटेल्स फेसबुक के साथ शेयर होगा.

यूजर्स को कुछ दिन की मोहलत दी गई, लेकिन फिर इस प्राइवेसी पॉलिसी को ऐक्सेप्ट करना आवश्यक कर दिया गया.

फेसबुक और वाट्सऐप के इस नए डाटा प्रोटेक्शन पर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी. इसमें दावा किया गया था कि फेसबुक और व्हाट्सऐप पर यूजर का डाटा प्रोटेक्ट नहीं होता है.

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच से कहा है, ‘हम नए डाटा प्रोटेक्शन के रेगुलेटरी के लिए नई व्यवस्था ला रहे हैं. चुनने की आजादी को प्रोटेक्ट किया जाएगा और इसमें कोई शक नहीं है.’

याचिकाकर्ता की तरफ से वकील हरीश साल्वे ने कहा की इस नई पॉलिसी के तहत यूजर्स को ना चाहते हुए भी वाट्सऐप और फेसबुक को इजाजत देनी होती है जिसके बाद व्हाट्सऐप के मैसेजों को फेसबुक भी पढ़ सकता है.

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