S M L

पाक की नई साजिश: नेपाल में आतंकियों के पैर पसारने में कर रही मदद है ISI

आतंकी नेपाल के दूर-दराज और मुश्किल भरे उपयुक्त इलाकों से अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की संभावनाओं की तलाश में जुटे हुए हैं

Updated On: May 02, 2018 06:11 PM IST

Yatish Yadav

0
पाक की नई साजिश: नेपाल में आतंकियों के पैर पसारने में कर रही मदद है ISI

निजाम डेरा के धूल भरी सड़क की ओर धीमे से मुड़ा. ये वो जोखिम भरी जगह थी जहां पर मानसिरी हिमालयन रेंज के अंतर्गत गोरखा लोग रहा करते थे. खाली और सुनसान पड़ी ये नेपाल में वही जगह थी जहां 2015 में आए भयंकर भूकंप ने यहां जबरदस्त तबाही मचाई थी. आगे चलकर निजाम के सहयोगी अताउल्लाह ने वहां पर मौजूद तहफुजुल मदरसे की ओर इशारा किया. ये उन सुरक्षित ठिकानों में से एक था जहां से पाकिस्तान की इंटर सर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) अपने स्लीपर सेल की मदद से भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियां चलाने में मदद करती थी.

तहफुजुल जैसे संगठन भारत से भागे हुए भगोड़े अपराधियों और पाक प्रशिक्षित आतंकियों के लिए एक महत्वपूर्ण फ्रंट साबित होते हैं जहां ये लोग खामोश होकर एकत्रित होते हैं और भारतीय सीमा में घुसपैठ करने से पहले आतंक का सामान और धन जमा करते रहते हैं. लेकिन अब आंतक फैलानेवालों की मदद करने वालों पर पूरी निगरानी रखी जा रही है. ये निगरानी भारत और नेपाल सरकार के सहयोग और सामंजस्य से विकसित की गयी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत उच्च स्तरीय सूचना का आदान प्रदान संभव हो सका है. इन सूचनाओं के आदान-प्रदान की वजह से कई कोवर्ट ऑपरेशन को अंजाम देकर लश्कर ए तैय्यबा जैसे खतरनाक आतंकी संगठन के सक्रिय आतंकी सेल की गतिविधियों पर लगाम लगाने में भारत की एजेंसियों को सफलता मिल सकी है.

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन पहले ही लश्कर जैसे आंतकी संगठनों को आईएसआई द्वारा पूर्ण रुप से पोषित और समर्थित बता चुके हैं. अभी कुछ दिनों पहले ही नेपाल में दो लगातार बम धमाके वो भी भारतीय प्रतिष्ठानों के निकट इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि आइएसआई द्वारा पोषित आतंकी संगठन अभी भी नेपाल में सक्रिय हैं. ये दो बम धमाके हुए हैं नेपाल के बिराटनगर और संखुवासभा जिले में और दोनों जगह धमाके के लिए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि स्थानीय पुलिस का दावा है कि ये प्रतिबंधित माओवादी संगठन का काम है लेकिन भारतीय इंटेलीजेंस एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी इस बात को खारिज नहीं कर रहे हैं कि ये घटना नेपाल के विभिन्न इलाकों में सक्रिय जिहादी सेल के द्वारा भी अंजाम दी गई भी हो सकती हैं.

18 अप्रैल को कुछ अनजान लोगों ने बिराटनगर के भारतीय दूतावास के कैंप ऑफिस के बाहर आईडी की सहायता से धमाका किया. इस धमाके में दूतावास की बाहरी दीवार को नुकसान पहुंचा था. उसी तरह से दूसरी वारदात में 29 अप्रैल को कुछ संदिग्ध जिहादी तत्वों ने संखुवासभा जिले के अरुण-III के दफ्तर को निशाना बनाने की कोशिश की. अरुण-III एक 900 मेगावाट की हाइड्रोपावर परियोजना है जिसे भारत की ऊर्जा के क्षेत्र की मिनी रत्न कंपनी, सतलुज जल विद्युत निगम की तरफ से निर्मित किया जा रहा है. इस परियोजना पर हमला करने का ऐसा वक्त चुना गया है जब नेपाल सरकार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगवानी में जुटी हुई है. पीएम मोदी इस परियोजना की आधारशिला रखने मई के दूसरे सप्ताह में नेपाल आ रहे हैं. मोदी नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली के साथ इस परियोजना की आधारशिला रखेंगे.

narendra modi-kp oli

आतंकी ऑपरेशन सेल की कमर तोड़ने में जुटीं एजेंसियां

निजाम और उसके जैसे लोग नेपाल के लिए नए नहीं हैं. ये पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की छत्रछाया में उस समय से काम कर रहे हैं, जब पाकिस्तान राष्ट्रपति जनरल अय्यूब खान ने 1962 में नेपाल के राजा किंग महेंद्र से मुलाकात की और उसके बाद दोनों देशों ने अपने बीच के राजनयिक संबंधों को मजबूत करने का फैसला किया. इस मुलाकात और राजनयिक संबंधों की मजबूती के फैसले का फायदा पाकिस्तान के तत्कालीन आईएसआई के चीफ ब्रिगेडियर रियाज हुसैन ने उठाने का सोचा और उन्हें लगा कि इसके माध्यम से वो भारत के बिल्कुल बगल में पैर जमाने में कामयाब हो जाएंगे.

नई खुफिया जानकारियों की समीक्षा से फ़र्स्टपोस्ट को पता चला है कि अब आतंकी नेपाल के दूर-दराज और मुश्किल भरे उपयुक्त इलाकों से अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की संभावनाओं की तलाश में जुटे हुए हैं. भूटा, अहले, पछेरा, तमगास, खैरानी, बिराटनगर और पोखरा आईएसआई की गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है. इन इलाकों में आईएसआई की गतिविधियों को संचालित करनेवाले, नियुक्त करने वाले, समर्थक और आतंकी गतिविधियों के लिए धन का जुगाड़ करने वाले कदम-कदम पर मिलेंगे.

आईएसआई ने जिहादी तत्वों को दिए हैं फर्जी पहचान पत्र

आने वाले दिनों में नेपाल पुलिस इन दोनों बम विस्फोटों की जांच और पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ करेगी लेकिन जो डॉजियर मिला है उसमें नेपाल के विभिन्न हिस्सों में पाकिस्तानी आईएसआई नेटवर्क और उसके स्लीपर सेल के द्वारा भारत विरोधी गतिविधियां चलाए जाने की अप्रत्याशित और अंदरूनी जानकारी मिली है. इंटेलीजेंस डॉजियर के मुताबिक पाकिस्तान की इंटर सर्विस इंटेलीजेंस ने बिराटनगर में जिहादी तत्वों के रहने और फर्जी नेपाली पहचान पत्र उपलब्ध कराने का इंतजाम किया है. इस डॉजियर में संदिग्ध मॉड्यूल की पूरी जानकारी विस्तार से दी गयी है और बताया गया है कि आतंकी सेल को बिराटनगर के करसिया रोड पर न केवल रहने की जगह उपलब्ध करायी गयी है बल्कि उन्हें कुछ दिनों के अंदर ही फर्जी निवासी पहचान पत्र भी बना कर दे दिया गया है.

इन आतंकियों के हैंडलर रेस्टूरेंट और शिक्षण संस्थानों में कांट्रेक्टच्युल जॉब के नाम पर आतंकियों को लागातर एक जगह से दूसरे जगह पर शिफ्ट करते रहते रहते हैं जिससे कि किसी को उन पर संदेह न हो सके. इन सबके लिए नेपाली पासपोर्ट का जुगाड़ करना सबसे मुश्किल होता है ऐसे में इन नए आतंकियों को अहले गांव जैसी गुमनाम सी जगह पर भेजा जाता है जहां पर वो नेपाली भाषा सही तरीके से सीख सकें. खुफिया एजेंसियों का कहना है कि पावर प्रोजेक्ट ब्लास्ट में नेपाली पुलिस जिस प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल पर संदेह जता रही है उसे भी पाकिस्तानी आईएसआई का समर्थन प्राप्त है जबकि सीपीएन को 2012 में ही अमेरिका ने भी प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

पिछले दो सालों में असफल किए गए हैं कई मॉड्यूल

डॉजियर के मुताबिक आतंकी सेल काठमांडू में एक्टिव हैं और वो आतंकवादियों के लिए वीजा का इंतजाम करते हैं जिससे कि आतंकी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारियों के लिए दूसरे देशों में आना जाना कर सकें. पिछले दो सालों में नेपाल पुलिस के सहयोग से ऐसे कई मॉडयूल्स को विफल किया जा चुका है. डॉजियर के मुताबिक कई आईएसआई समर्थक नेटवर्क सेल दम्माम और रियाध से ऑपरेट कर रहे हैं जो कि टेरर सेल के आतंकियों को पाकिस्तान और साऊदी अरब जैसे देशों में आने जाने के लिए वीजा का प्रबंध करवा रहे हैं.

यह भी पता चला है कि जनवरी 2018 में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने नेपाली अधिकारियों को आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहनेवाले और बिराटनगर और काठमांडू से आंतकी गतिविधियों को चलाने वाले 5 संदिग्धों के नाम सौंपे हैं. ये सब ड्रग व्यापार, जाली भारतीय मुद्रा और मानव तस्करी में भी जुटे रहने वाले अपराधी हैं.

नॉर्थ ईस्ट के विद्रोही संगठनों की ओर से भी खतरा

नेपाली प्रधानमंत्री केपी ओली के अप्रैल के पहले हफ्ते में भारत आने से पहले राजनयिक संबंधों में दिलचस्पी रखनेवाले अधिकतर लोगों का मानना था कि 2015 के बाद भारत की नेपाल सुरक्षा मामलों पर पकड़ ढीली पड़ी है. यहां के सुरक्षा संस्थानों में भी इस बात पर चिंता बढ़ गई है कि 2008 के बाद से ही नेपाल भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है. 2008 के मुंबई हमलों के बाद से ही इस बात पर चिंता जताई जा रही है कि न केवल कश्मीरी आतंकवादी बल्कि नॉर्थ ईस्ट के विद्रोही संगठनों के संबंध भी नेपाल से जुड़ते जा रहे हैं और वो वहां के आतंकी सेल के लगातार संपर्क में हैं. वो नेपाल भारत की छिद्रयुक्त या खुली सीमा का फायदा उठा रहे हैं.

खुफिया सूत्रों का कहना है कि उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से इस संबंध में बात की है लेकिन ये प्रायोगिक रुप से संभव नहीं है कि भारत और नेपाल के बीच की 1751 किलोमीटर की सीमा को पूरी तरह से सील कर दिया जाए. हालांकि खुला बार्डर होने से दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ता है लेकिन कुछ इलाके हैं खास करके तराई के इलाकों पर खास निगरानी रखी जा रही है. गृह मंत्रालय ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत नेपाल सीमा की मुख्य चुनौती खुली सीमा की निगरानी करना और उसका दुरुपयोग रोकना है जिससे कि अपराधी और आतंकवादी इसका फायदा उठा भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम न दे सकें.

गृह मंत्रालय की ये है तैयारी

गृह मंत्रालय के मुताबिक बार्डर मैनेजमेंट से जुड़े आपसी सहयोग के मामले को द्विपक्षीय बातचीत के द्वारा हल निकालने के लिए भारत सरकार और नेपाल ने तय किया है कि इन मामलों पर गृह सचिव स्तर पर बातचीत की व्यवस्था की जाएगी और ज्वाइंट सेक्रेटी स्तर पर एक वर्किंग ग्रुप का निर्माण किया जाएगा. इन सबके अलावा एक बोर्डर डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेशन कमिटी भी बनायी जाएगा जिसमें दोनों देशों के संबंधित जिलों के अधिकारी शामिल रहेंगे. ये व्यवस्था एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रुप में कार्य करेगा जिसमें दोनों देशों के आपसी महत्व के मुद्दों पर चर्चा की जा सकेगी जिसमें क्रॉस बार्डर क्राइम, तस्करी, आतंकवाद समेत राष्ट्रीय,और स्थानीय मुद्दों पर विचार विमर्श हो सकेगा.

एक वरिष्ठ इंटेलीजेंस अधिकारी के अनुसार आज के दौर में जब आतंकवाद के तौर तरीकों में लगातार बदलाव आ रहा है ऐसे में जरूरी है कि आधुनिक इंटेलीजेंस का सहारा लिया जाए क्योंकि केवल यही एक तकनीक है जिसके सहारे आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगायी जा सकती है. उन्होंने हाल ही में नेपाल के झाफा में भारतीय जाली करेंसी की तस्करी में जुटे एक सिडिंकेट पर कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि नेपाल में आईएसआई के द्वारा भारतीय जाली नोट को फैलाया जा रहा है जिससे कि भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सके. इंटेलीजेंस अधिकारी के मुताबिक आतंकी संगठनों की आईएसआई के साथ वफादारी का सबको पता है ऐसे में वो लोग नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर सूचना के आदान प्रदान के लिए एक संयुक्त मजबूत गठजोड़ बनाना चाहते हैं जो कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के द्वारा गोपनीय तरीके से चलाए और बढ़ाए जा रहे आंतकी नेटवर्क की कमर तोड़ सके.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi