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सर्जिकल स्ट्राइक नहीं, सुरक्षा चूक पर ध्यान दे सरकार

जानकारों का कहना है कि सर्जिकल स्ट्राइक पर जरूरत से ज्यादा शोर मचाया गया.

Updated On: Dec 01, 2016 10:00 AM IST

Sreemoy Talukdar

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सर्जिकल स्ट्राइक नहीं, सुरक्षा चूक पर ध्यान दे सरकार

नगरोटा हमले ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि भारत की पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में सर्जिकल स्ट्राइक अपने मकसद में नाकाम रही है. नगरोटा हमले में भारतीय सेना के दो अफसर और पांच जवान मारे गए. सेना का कॉम्बिंग ऑपरेशन अभी तक चल ही रहा है. जानकारों ने कहना शुरू कर दिया है कि भारतीय कमांडोज ने जो सर्जिकल स्ट्राइक की थी, उस पर जरूरत से ज्यादा शोर मचाया गया.

पाक सुधरना नहीं चाहता

29 सितंबर को हुई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से दो महीने में भारत के 26 जवान मारे गये हैं. साफ है कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद जो दावे थे कि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों पर लगाम लगायेगा, वैसा कुछ हुआ नहीं.

अब लोग ये कह रहे हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक, भारत की आतंकवाद के खिलाफ स्ट्रैटजिक कामयाबी कम और मोदी सरकार का राजनैतिक दांव ज्यादा था.

मोदी सरकार की पाकिस्तान नीति कभी हां-कभी ना की रही है. इसलिए इस पर सवाल उठने लाजिमी हैं. अपने पहले के प्रधानमंत्रियों की तरह मोदी भी पाकिस्तान के साथ रिश्तों में एक नई शुरुआत करता चाहते थे. शायद अब उन्हें समझ में आ गया है कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने की उम्मीद करना बेमानी है क्योंकि पाकिस्तान वो देश है जो भारत के खिलाफ लगातार जंग लड़ने और उसे हासिल करने की बातें करता है.

सर्जिकल स्ट्राइक को नाकाम नहीं कहा जा सकता

Photo. PTI

हालांकि, सर्जिकल स्ट्राइक को पूरी तरह नाकामी के दर्जे में रखना भी गलत होगा. मौजूदा सरकार से मतभेद अपनी जगह हैं. मगर सर्जिकल स्ट्राइक सेना के बेहद प्रोफेशनल कमांडोज ने की थी. ऐसे में उस पर सवाल उठाने का मतलब, सेना की काबिलियत पर सवाल उठाना होगा. ये भारत की खुद पर लगाई पाबंदियों से आजादी वाला कदम था. इसलिए इसे तुरंत ही नाकाम घोषित करना ठीक नहीं.

वैसे भी सर्जिकल स्ट्राइक का मकसद ये नहीं था कि पाकिस्तान इससे आतंकवाद को समर्थन की अपनी नीति खत्म कर देगा. किसी को भी ये नहीं सोचना चाहिए कि पाकिस्तान महज एक सर्जिकल स्ट्राइक से आतंकवाद के कारोबार को बंद कर देगा. उसे अपनी विदेश नीति के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना बंद कर देगा.

आतंकवाद, पाकिस्तान का 'स्ट्रैटेजिक एसेट'

पाकिस्तान सस्ती जंग के आतंकवादी जरिये को छोड़ देगी, ये सोचना मुश्किल है. आतंकवाद, पाकिस्तान के लिए 'स्ट्रैटेजिक एसेट' है. इसमें लागत भी कम है और राजनैतिक-जंगी मुनाफा भी कम है. भारत की सर्जिकल स्ट्राइक का मकसद पाकिस्तान के लिए छद्म युद्ध की लागत बढ़ाना था ताकि पाकिस्तान को ये समझ में आये कि आतंकवाद को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की उसको अब ज्यादा कीमत चुकानी होगी.

Photo. PTI

भारत ने बहुचर्चित सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान को चेतावनी भी दी और जंग होने से भी रोक ली. हमें नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान एटमी ताकत से लैस देश है. वो बार-बार एटमी जंग की धमकियां भी देता रहता है. ऐसे में सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए ही हम उसकी धमकी का सामना कर सकते हैं.

असली मुद्दा सुरक्षा में हुई चूकें हैं

इसीलिए हमें सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने के बजाय सुरक्षा में हुई चूकों पर सवाल उठाना चाहिए. उड़ी के बाद नगरोटा में हुआ हमला, ये जाहिर करता है कि सेना के कैंप की सुरक्षा में कमी रह गई. 29 सितंबर को हुए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद करीब दर्जन भर ऐसे मौके आये हैं जब आतंकवादियों ने सरहद पार से घुसपैठ करके हमले किये हैं. इनमें नगरोटा, बारामुला, बांदीपुरा, सोपोर, शोपियां और पंपोर के हमले शामिल हैं. इन हमलों में अब तक 26 जवान शहीद हो चुके हैं.

ये आतंकवादी हमले पाकिस्तान के रिटायर हुए सेनाध्यक्ष जनरल राहील शरीफ की छटपटाहट दिखाते हैं. सर्जिकल स्ट्राइक से उनकी इमेज को तगड़ा झटका लगा था. वो इन आतंकवादी हमलों के जरिए अपनी साख दोबारा हासिल करने की कोशिश कर रहे थे.

मगर आतंकियों की कामयाबी हमारी सुरक्षा में चूक के बड़े सवाल भी खड़े करती है. आत्मघाती हमलों को रोकना कमोबेश नामुमकिन होता है क्योंकि आत्मघाती हमलावर तो मरने की नीयत से ही आते हैं. लेकिन तगड़ी सुरक्षा वाले सेना के ठिकानों में बार-बार लग रही सेंध बेहद गंभीर मामला है. ये आतंकियों से निपटने की हमारी तैयारियों पर सवाल है.

नगरोटा हमला बड़े सवाल उठाता है

राहत की बात रही कि नगरोटा में आतंकवादी, आम लोगों को बंधक नहीं बना सके. लेकिन ये हमला हुआ कैसे? आतंकवादी अपने इरादों में कामयाब कैसे हुए? उनसे निपटने के दौरान जो कमियां रह गईं, वो परेशान करने वाली हैं. इन पर सवाल उठने चाहिए. जो भी इस नाकामी के लिए जिम्मेदार है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. फिर चाहे वो खुफिया एजेंसियां हों या फिर सुरक्षा बल.

नगरोटा में 16वीं कोर का मुख्यालय, सीमा से महज 55 किलोमीटर की दूरी पर है. इस बात की पड़ताल होनी चाहिये कि पुलिस की वर्दी पहनकर आये आतंकवादी, भारी मात्रा में हथियारों के साथ होने के बावजूद पकड़े क्यों नहीं गये?

Photo. PTI

मीडिया की खबरों के मुताबिक हमलावरों ने एक हफ्ते पहले ही घुसपैठ की थी. उन्होंने हमले से पहले मौका मुआयना करके कैम्प की सुरक्षा का जायजा भी लिया था. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, आतंकवादियों ने जो वर्दी पहनी थी वो भारत में ही सिली गई थी. ये एक दिन में तो तैयार नहीं हुई होगी. यानी हमलावर, कई दिनों से भारत की सीमा में ही थे. उन्होंने स्थानीय दुकान से दवायें भी खरीदी थीं.

अगर ये सही है तो हमारे खुफिया और निगरानी तंत्र पर बहुत से सवाल उठते हैं. साफ है कि आतंकियों के लिए हमारे सैन्य ठिकाने, आसान टारगेट हैं.

एक खबर के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में पठानकोट हमले के बाद सुरक्षा की समीक्षा के लिए तो तीनों सेनाओं की कमेटी बनी थी, उसके सुझावों पर कोई अमल नहीं किया गया. इस कमेटी के अगुवा रिटायर्ट लेफ्टिनेंट जनरल फिलिप कैम्पोस थे.

ये हालात बेहद खतरनाक हैं. मौके की नजाकत ये कहती है कि हमें सर्जिकल स्ट्राइक पर सियासी शोर मचाने के बजाय अपनी सुरक्षा खामियों को दूर करने पर जोर लगाना चाहिए.

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