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Exclusive: आर्म्स डीलर सुधीर चौधरी के नजदीकी दो उद्योगपतियों पर सुरक्षा एजेंसियों की निगाह

सूत्रों का कहना है, 'हमलोग लंदनवासी उसके एक रिश्तेदार की भूमिका की जांच कर रहे हैं. वह एक जाना-माना ‘वेंचर कैपटलिस्ट’ है

Updated On: Sep 14, 2018 03:04 PM IST

Yatish Yadav

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Exclusive: आर्म्स डीलर सुधीर चौधरी के नजदीकी दो उद्योगपतियों पर सुरक्षा एजेंसियों की निगाह
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वाकया 22 नवंबर 2015 का है. एक चार्टर्ड विमान दिल्ली हवाईअड्डे पर उतरा. नीले-सिल्वर कलर के जेट से चुस्त-दुरुस्त कपड़ों में सजा एक शख्स नीचे आया. जेट से उतरने वाला यह शख्स कोई और नहीं बल्कि सुधीर चौधरी था- ब्रिटेन जा बसा 66 वर्षीय व्यवसायी, हथियारों का मशहूर सौदागर सुधीर चौधरी! एक पखवाड़े के भीतर सुधीर चौधरी की यह तीसरी भारत यात्रा थी. हथियारों की खरीद-फरोख्त के कुछ मामलों में उसके जुड़ाव की जांच कर रही एजेंसियां यह सोचकर हैरान-परेशान थीं कि आखिर यह शख्स 16 अप्रैल के बाद से लगातार दिल्ली के चक्कर क्यों काट रहा है जबकि सीबीआई ने उसका नाम यूसीएम (अनडिजायरेबल कांटेक्ट मैन) यानि संपर्क के लिहाज से अवांछित व्यक्तियों की सूची में डाल रखा है और उसके खिलाफ एक पीई(प्रारंभिक जांच) भी दर्ज हो चुकी है.

जानकार सूत्रों के मुताबिक भारत आने से पहले सुधीर चौधरी ने 15 नवंबर के बाद से दो दिन बैंकाक में बिताये थे और यह बात जांच करने वालों की नजर में आ चुकी थी. सुधीर चौधरी की यात्रा के बाद प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने कारण बताओ नोटिस जारी किया. हथियारों की खरीद-फरोख्त के उसके धंधे के बारे में कुछ अन्य केंद्रीय एजेंसियों की मदद से जांच का दायरा बढ़ा दिया गया.

फ़र्स्टपोस्ट को पता चला है कि केंद्रीय एजेंसियों को सुधीर चौधरी और उसके सहायकों के खिलाफ अहम सुराग हासिल हुए हैं. सूत्रों का दावा है कि सुधीर चौधरी अपने संदिग्ध लेन-देन के लिए दूसरे लोगों का इस्तेमाल करता है. इसी कारण जांच एजेंसियों को उसके खिलाफ ठोस सबूत जुटाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है और वह जांच एजेंसियों को धता बताते हुए कानून की गिरफ्त से बचा चला आ रहा है.

नाम गुप्त रखने की शर्त पर दो जानकार सूत्रों ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, 'दो व्यवसायी सुधीर चौधरी के लिए मुखौटे के तौर पर काम कर रहे हैं. एक फर्म की हिस्सेदारी एविएशन(उड्डयन) और रक्षा-क्षेत्र में है और इस फर्म का युरोप तथा अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय डिफेंस फर्म के साथ कारोबारी रिश्ता है जबकि दूसरी फर्म पैकेजिंग के व्यवसाय में है.' जांच एजेंसियों के दावे के बारे में जवाब जानने के लिए एक प्रश्नावली भानु चौधरी को भेजी गई है लेकिन इस कथा के प्रकाशित होने तक कोई उत्तर नहीं मिला है.

भानु चौधरी ब्रिटेन में सी एंड सी अल्फा ग्रुप के नाम से एक मुख्य कारोबारी समूह का संचालन करता है. वह भारत में रजिस्टर्ड लगभग एक दर्जन कंपनियों का डायरेक्टर भी है. आगे की जांच से यह भी पता चला है कि सुधीर चौधरी के लिए मुखौटे के तौर पर काम कर रहे एक व्यवसायी के सरकारी मिल्कियत वाली एक कंपनी के साथ नजदीकी कारोबारी रिश्ते हैं. इस कंपनी के रिश्ते व्यवसायी से बहुत पहले से बने चले आ रहे हैं क्योंकि उसके चाचा इस कंपनी से जुड़े हुए थे.

सूत्रों ने बताया, 'जांच के मुताबिक साल 2015 की मई में सुधीर चौधरी जब एक हफ्ते के लिए दिल्ली आया था तो कुछ बैठकें हुई थीं. यह भी जानकारी मिली है कि विदेशी सहयोगियों के साथ दुबई और बैंकाक में बैठक हुई. हम लोग इन सौदों की अलग-अलग परतों को खंगाल रहे हैं और जानने की कोशिश में हैं कि सौदे में रिश्वत के जरिए हुई कमाई किस तरह गुपचुप गायब कर दी गई.'

जांचकर्ताओं (इंवेस्टीगेटर्स) ने एक नोट (अभिलेख) तैयार किया है. इस नोट को देखने पर फ़र्स्टपोस्ट को पता चला कि सुधीर चौधरी 2015 के नवंबर में दो हफ्ते के लिए दुबई में था. नोट के मुताबिक, 'सुधीर चौधरी की गतिविधियों की एक और खासियत है कि उसने विदेशों में बहुत सारे फर्जी फर्म्स खोल रखी हैं, उसने ये फर्म्स टैक्स हैवेन्स में रजिस्टर्ड कराये हैं ताकि सरकार के नुमाइंदों के लिए उसकी गतिविधियों पर नजर रखना और उसके मुनाफे को जानना मुश्किल हो जाय.'

सुधीर चौधरी अपने लेन-देन गुप्त रखता है और उसकी बैठकें भी पोशीदा होती हैं. सूत्रों के मुताबिक दक्षिण दिल्ली के भीकाजी कामा स्थित एक पंचसितारा होटल में व्यवसायी तथा सुधीर चौधरी के बीच लगातार बैठकें हुईं. चूंकि सुधीर चौधरी की फर्म्स रक्षा सौदों में हुए धन के लेन-देन से सीधे तौर पर नहीं जुड़ीं सो जांच एजेंसियों को अंधेरे में हाथ-पांव मारना पड़ रहा था. हथियारों के सौदागरों की स्याह दुनिया में सुधीर चौधरी को बन्नी के नाम से बुलाया जाता है और सीबीआई ने उसपर मामला दर्ज कर रखा है.

यह मामला इजरायल स्थित एक डिफेंस फर्म सोलटम के लिए आर्टिलरी गन्स के अपग्रेडेशन का ठेका जुटाने के एवज में दिए गए रिश्वत से जुड़ा है. इसके बाद सुधीर चौधरी का नाम 2006-07 में बराक मिसाइल घोटाले में भी उछला था. दूसरा मामला इसी से संबंधित है. हालांकि सीबीआई की एफआईआर में यह बात दर्ज है कि सुधीर चौधरी के खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत मौजूद हैं लेकिन इसके बावजूद जांच एजेंसी ने सबूतों की कमी को कारण बताते हुए दोनों ही मामले बंद कर दिए.

रॉल्स रॉयस घोटाले में ब्रिटेन के सीरियस फ्रॉड ऑफिस (एसएफओ) के हाथों हो रही जांच का भी यही हश्र हुआ. एसएफओ ने सुधीर चौधरी और उसके बेटे भानु चौधरी को थोड़ी देर के लिए गिरफ्तार किया लेकिन सबूत ना होने की वजह से दोनों को छोड़ना पड़ा.

सूत्रों का कहना है, 'हमलोग लंदनवासी उसके एक रिश्तेदार की भूमिका की जांच कर रहे हैं. वह एक जाना-माना ‘वेंचर कैपटलिस्ट’है और सुधीर चौधरी के एवज में लेन-देन के कुछ मामले निपटा रहा है. दक्षिण दिल्ली के पंचसितारा होटल में कुछ बैठकों में संयोग से वह भी मौजूद था. सेना, नौकरशाही तथा राजनीति की दुनिया से सुधीर चौधरी के रिश्ते अब भी मजबूत बने हुए हैं.'

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