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एयर ट्रैफिक सर्विसेज के अधिकारियों के इस कदम से हवाई यात्राओं की सुरक्षा का क्या होगा?

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के कम्युनिकेशन, नेविगेशन एंड सर्विलांस (CNS) विभाग के कुल 1200 प्रमाणित अधिकारियों में से 1024 ने 24 सितंबर को अपनी प्रॉफिसिएंसी का सरेंडर करने का फैसला लिया है.

Updated On: Sep 13, 2018 07:10 PM IST

Yatish Yadav

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एयर ट्रैफिक सर्विसेज के अधिकारियों के इस कदम से हवाई यात्राओं की सुरक्षा का क्या होगा?

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के कम्युनिकेशन, नेविगेशन एंड सर्विलांस (CNS) विभाग के कुल 1200 प्रमाणित अधिकारियों में से 1024 ने 24 सितंबर को अपनी प्रॉफिसिएंसी का सरेंडर करने का फैसला लिया है. यह कदम नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु के दखल के बाद प्रबंधन और अधिकारियों के बीच 28 अगस्त को हुई बैठक में वायु सुरक्षा के लिए इस महत्वपूर्ण इकाई पर असर डालने वाले मुद्दों को हल करने में विफल रहने के बाद उठाया जा रहा है. CNS विभाग हवाई यातायात और भारतीय वायु क्षेत्र में एयरक्राफ्ट के सुरक्षित और सुचारू संचालन के लिए एयर ट्रैफिक सर्विसेज की रीढ़ है.

एक अधिकारी ने अपना नाम छापे जाने से मना करते हुए बताया, 'हालांकि, CNS अधिकारी देश भर में हवाई अड्डों पर काम करना जारी रखेंगे, लेकिन वो यह काम रडार, ऑटोमेटेड डिसप्ले और वेरी हाई फ्रीक्वेंसी (वीएचएफ) सिस्टम, जो कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल को एयरक्राफ्ट से संवाद करने में मदद करता है, पर कड़े प्रशिक्षण के बाद हासिल की गई रेटिंग या लाइसेंस के बिना करेंगे. AAI की CNS अधिकारियों के प्रति उदासीनता और बाद में उठाया गया कदम से महत्वपूर्ण प्रणालियों और वायु सुरक्षा के रखरखाव को निश्चित रूप से प्रभावित करेगा.'

इसके अलावा, CNS अधिकारियों द्वारा उठाया गया कदम दुनिया भर में नागरिक उड्डयन मानकों की निगरानी करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन (ICAO), और भारतीय उड्डयन नियामक डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) में चिंता उत्पन्न कर सकता है, क्योंकि रेटिंग और CNS में प्रॉफिसिएंसी के बिना अधिकारियों का काम करना तयशुदा विमानन मानदंडों का खुला उल्लंघन है.

फ़र्स्टपोस्ट द्वारा संपर्क किए जाने पर, AAI के चेयरमैन गुरुप्रसाद मोहापात्रा ने इस ज्वलंत मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

विभिन्न हवाई अड्डों पर आसन्न उथल-पुथल के केंद्र में CNS से संबंधित दो प्रमुख मुद्दे हैं- पहला, CNS विभाग के लिए बिना प्रॉफिसिएंसी वाले मैनेजर इलेक्ट्रॉनिक्स की सीधी भर्ती और दूसरा, सेवानिवृत्ति के बाद CNS अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण पर अर्जित भत्ते की कटौती है.

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उपरोक्त अधिकारी का कहना है, 'CNS इंजीनियरों ने विभिन्न स्तरों पर प्रमाण पत्र और रेटिंग हासिल की है. वे उस स्थिति में पड़े रह जाते हैं, जबकि दूसरी ओर AAI ने विभिन्न संचार और नेविगेशन सिस्टम पर सख्त और विशेष स्पेशलाइज्‍ड ट्रेनिंग लेने वाले एक्जीक्यूटिव्स की अनदेखी कर अप्रशिक्षित मैनेजरों की भर्ती करने का फैसला किया है. ICAO की गाइडलाइंस के मुताबिक इन प्रशिक्षित अधिकारियों को वेतन के अतिरिक्त किए गए विशेष कार्य के एवज में मासिक भत्ता दिया जाता है, लेकिन अधिकारी की सेवानिवृत्त के बाद इस पूरी राशि की कटौती की जा रही है. यह पूरी दुनिया में कहीं भी अनुचित और अनसुना है. हमने पहले इस तरह के नियमों पर विरोध किया था लेकिन कहा गया था कि नीति को रद करने का प्रस्ताव सिविल एविएशन मिनिस्ट्री द्वारा तैयार किया गया था और अब कैबिनेट सचिवालय के पास लंबित है. अधिकारियों के लिए अपनी प्रॉफिसिएंसी और रेटिंग सरेंडर करना आसान नहीं है, क्योंकि ऐसा करने से उन्हें अपने मासिक भत्ते से भी हाथ धोना होगा, लेकिन उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है.'

CNS विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, वे यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे हैं कि प्रॉफिसिएंसी सरेंडर करने की प्रस्तावित योजना के कारण एयर सेफ्टी से समझौता ना हो, लेकिन अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं किया जाता है तो हवाई सुरक्षा पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा.

अधिकारी का कहना है, 'विमानन संचालन और विनियमों का निरीक्षण करने के लिए ICAO पर्यवेक्षकों की एक टीम अक्टूबर में भारत आने वाली है. जब वो देखेंगे कि पूरी CNS इकाई प्रॉफिसिएंसी रेटिंग के बिना काम कर रही है, तो इसके भारतीय विमानन संस्थाओं के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं. इसके अलावा, प्रशिक्षण एक सतत प्रक्रिया है, क्योंकि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर छह महीने में एक नया सिस्टम आ जाता है. विमानन सुरक्षा क्षेत्र में शून्य अनुभव वाले मैनेजरों की भर्ती किए जाने की योजना कैसे बनाई जा सकती है?'

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नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु

एक वरिष्ठ AAI अधिकारी ने बताया कि चर्चा थोड़ी नाखुशगवार थी और नागरिक उड्डयन मंत्री के पास सीधे शिकायत ले जाने के लिए शीर्ष प्रबंधन ने अधिकारियों को लताड़ा था. ये अधिकारी मंत्री सुरेश प्रभु के कहने पर 28 अगस्त को हुई बैठक में शामिल थे. एयर नेविगेशन सर्विसेज के सदस्य एस.सुरेश की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया था कि इससे पूर्व 2010-11 में भर्ती किए मैनेजरों को अभी तक अपनी पहली पदोन्नति नहीं मिली है और उनका वेतन बढ़ाने के लिए कुछ भी नहीं किया गया है, इसलिए नए अधिकारियों की भर्ती से गतिहीनता में और बढ़ोत्तरी ही होगी.

ऑफिसर ने बताया, 'लेकिन उन्होंने हमारी बात सुनी नहीं. हम भर्ती के खिलाफ नहीं हैं और प्रक्रिया को रोकने की हमारी कोई योजना नहीं है. हमारा एकमात्र सुझाव मैनेजर (Elex) पद का नाम बदलकर मैनेजर (CNS) किए जाने और अनुभव वाले कॉलम में बदलाव करके सामान्य रूप से ‘इलेक्ट्रॉनिक्स’ के बजाय एयर सेफ्टी के लिए विशिष्ट CNS सिस्टम्स और विशिष्ट मशीनों का नाम दर्ज किया जाए. विमानन सुरक्षा में इस तरह के तौरतरीके बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं. प्रस्तावित भर्ती में, अनुभव खंड अस्पष्ट रखा गया है और कम्युनिकेशन, नेविगेशन व सर्विलांस उपकरणों के अनुभव पर जोर पूरी तरह से गायब है, जो हर एविएशन रूल बुक का उल्लंघन करता है.'

संपर्क किए जाने पर AAI की एयर नेविगेशन सर्विसेज के कार्यकारी सदस्य एस. सुरेश ने CNS अधिकारियों द्वारा प्रॉफिसिएंसी द्वारा सरेंडर करने से पैदा होने वाली सुरक्षा चिंताओं पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

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