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हम एक आतंकवादी को मारते हैं तो ऐसे कई पढ़े-लिखे युवा तैयार हो जाते हैं : J&K पूर्व वार्ताकार वजाहत हबीबुल्ला

'ऑपरेशन ऑल आउट' चलाने के बावजूद देश में आतंकवादी रैंकों में भर्ती के आंकड़ों में वृद्धि को देखा जा सकता है. इस प्रकार, हम अगर एक आतंकवादी को मारते हैं तो ऐसे कई पढ़े-लिखे युवा तैयार हो जाते हैं

Updated On: Feb 18, 2019 02:21 PM IST

FP Staff

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हम एक आतंकवादी को मारते हैं तो ऐसे कई पढ़े-लिखे युवा तैयार हो जाते हैं : J&K पूर्व वार्ताकार वजाहत हबीबुल्ला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व वार्ताकार वजाहत हबीबुल्ला ने यह दावा किया है कि पुलवामा आतंकी हमले में मारे गए 40 जवान, सरकार की नीति में हुई विफलता के शिकार हुए हैं.

हबीबुल्लाह ने अप्रत्यक्ष रूप से सरकार का विद्रोह करते हुए कहा कि इस तरह की विफलता अंततः उन लोगों का परीक्षण करती है जो अपनी इसी नीति का प्रचार कर रहे हैं.

हबीबुल्ला राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.न्यूज़ 18 से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू में दो प्रमुख समुदायों के भीतर ध्रुवीकरण गहरा रहा है. ये सांप्रदायिक हिंसा का भी रूप ले सकती है.

ऐसे रिपोर्ट्स जो ये दावा करते हैं कि जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ जवानों की बदसलूकी के कारण बंदूक उठाई, इस पर टिप्पणी देते हुए हबीबुल्ला ने कहा कि यह स्पष्टीकरण नया नहीं है.

'बुरहान वानी का ही उदाहरण ले लीजिए. वानी एक होनहार छात्र था. लेकिन सुरक्षा बलों के साथ एक मुठभेड़ में अपने भाई के मारे जाने के बाद उसने आतंकवाद की तरफ रुख कर लिया. बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में फैली अशांति से जिस तरह से सुरक्षाबलों ने निपटने की कोशिश की, उससे केवल तनाव बढ़ा, कम नहीं हुआ.

राज्य को निर्वाचित सरकार की जरूरत

'ऑपरेशन ऑल आउट' चलाने के बावजूद देश में आतंकवादी रैंकों में भर्ती के आंकड़ों में वृद्धि को देखा जा सकता है. इस प्रकार, हम अगर एक आतंकवादी को मारते हैं तो ऐसे कई पढ़े-लिखे युवा तैयार हो जाते हैं.

पूर्व वार्ताकार ने सेना के ऑपरेशन सद्भावना की तरफ भी सरकार का ध्यान खींचा. सद्भावना ऑपरेशन, लद्दाख, जम्मू के पुंछ और राजौरी जिलों के नियंत्रण रेखा में सफलतापूर्वक काम किया है.

हबीबुल्ला ने कहा, जब तक हम उस दिशा में तेजी से आगे नहीं बढ़ते हैं, 'मैं कश्मीर के भविष्य और विशेष रूप से देश के बाकी हिस्सों के साथ उसके संबंधों का अनुमान लगाने के लिए भयभीत हूं. यह समय के साथ और भी बुरा हो सकता है.'

राज्य को एक निर्वाचित सरकार की जरूरत है. जो यहां रहने वाले अप्रभावित युवाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से बढ़ावा दे. इसके लिए आधारभूत संरचना मौजूद है. बस, उसे सक्रिय करने की आवश्यकता है. राज्य का अपना जम्मू-कश्मीर बैंक है, जो योग्य युवा व्यक्तियों को संलग्न करने के लिए परियोजनाओं को डिजाइन करता है. इनमें से कई ऐसे हैं, जो निवेश और रोजगार के अवसर देता है.

उन्होंने सरकार से पाकिस्तान के मुद्दे को जल्द से जल्द दूर करने का भी आह्वान किया. उन्होंने कहा, 'अगर इसे कश्मीरियों का समर्थन मिल जाए, तो इसे करने में मजबूती मिलेगी.

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