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हर एक अनचाहा शारीरिक संपर्क यौन उत्पीड़न नहीं: हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा कि हर एक अनचाहे शारीरिक संपर्क को यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता है

Updated On: Nov 03, 2017 01:28 PM IST

FP Staff

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हर एक अनचाहा शारीरिक संपर्क यौन उत्पीड़न नहीं: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपना फैसला सीआरआरआई की एक वैज्ञानिक की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया. कोर्ट ने कहा कि हर एक अनचाहे शारीरिक संपर्क को यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता है.

आपको बता दें कि ये मामला अप्रैल 2005 में सामने आया था. जब एक महिला वैज्ञानिक ने अपने पूर्व सीनियर साइंटिस्ट साथी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. हालांकि इस मामले में आरोपी को क्लीन चिट दे दी गई थी. जिसके बाद पीड़िता ने फिर से याचिका दायर की थी.

मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विभु बख्रू ने कहा, यदि कोई किसी से अनचाहे शारीरिक संपर्क में आता है तो यह यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता है. किसी मंशा के बिना शारीरिक संपर्क होना हर मामले में यौन उत्पीड़न ही नहीं कहा जा सकता है. महिला वैज्ञानिक के मुताबिक, सीनियर साइंटिस्ट ने लैब में घुसने के बाद अचानक उसके हाथ से सैंपल छीन लिया था और उसे धक्का देकर कमरे से बाहर कर दिया था. उसने कहा था कि इस तरह के शारीरिक संपर्क को यौन उत्पीड़न माना जाना चाहिए.

मामले की जांच के लिए एक शिकायत समिति बनाई गई थी. जिसमें मामले को आपसी तकरारा का मामला बताया गया है. सीनियर साइंटिस्ट का व्यवहार खेदजनक था. दोनों के बीच शारीरिक संपर्क हुआ था. लेकिन इसे शारीरिक शोषण नहीं कहा जा सकता.

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