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सुप्रीम कोर्ट: चुनाव आयोग पार्टियों से पूछे कि उनकी पार्टी में कितने बदमाश नेता हैं

सुप्रीम कोर्ट गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे लोगों को चुनावी राजनीति में आने की इजाजत नहीं देने की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी

Updated On: Aug 22, 2018 01:33 PM IST

FP Staff

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सुप्रीम कोर्ट: चुनाव आयोग पार्टियों से पूछे कि उनकी पार्टी में कितने बदमाश नेता हैं

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोर्ट जघन्य अपराधों के आरोपियों को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने पर फैसला देती है तो ये संसद के क्षेत्राधिकार में घुसने जैसा होगा. कोर्ट ने कहा कि वह 'लक्ष्मण रेखा' पार नहीं करना चाहता. कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण को 'सड़न' करार दिया और कहा कि वह चुनाव आयोग को राजनीतिक पार्टियों से यह कहने का निर्देश देने पर विचार कर सकती है कि उनके सदस्य अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का खुलासा करें. ताकि मतदाता को पता हो कि ऐसी पार्टियों में कितने 'कथित बदमाश' हैं.

सुप्रीम कोर्ट गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे लोगों को चुनावी राजनीति में आने की इजाजत नहीं देने की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव में पार्टी के चिह्न से वंचित किया जा सकता है?

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और जस्टिस नरीमन ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा, 'क्या हम चुनाव आयोग को सिंबल्स ऑर्डर के तहत एक नियम बनाने का निर्देश नहीं दे सकते, जो अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग द्वारा एक प्रशासनिक फैसला होगा.' कोर्ट ने पूछा, 'ऐसे आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों को अगर चुनाव लड़ने के लिए टिकट दे भी दिया गया, तो क्या उन्हें पार्टी के चिह्न से वंचित किया जा सकता है?'

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केंद्र सरकार द्वारा बेंच को ये बताए जाने के बाद कि शक्तियों के पृथक्करण की अवधारणा (Separation of Power) के तहत सांसदों को अयोग्य करार दिए जाने का मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यों की बेंच ने ये सवाल पूछे. जस्टिस आरएफ नरीमन, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा की सदस्यता वाली बेंच ने कहा, 'यह (कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत) हर कोई समझता है. हम संसद को कोई कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकते. सवाल यह है कि हम इस सड़न को रोकने के लिए क्या कर सकते हैं.'

बेंच ने कहा, 'अदालत चुनाव आयोग से कह सकती है कि वह राजनीतिक पार्टियों को ये निर्देश दे कि गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे उम्मीदवारों को न तो टिकट दिया जाएगा और न ही ऐसे निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन देंगे.' इस मामले में अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी.

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