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महाराष्ट्र का 'चूहा घोटाला': कंपनी ने 7 दिन में कैसे मार डाले 3 लाख चूहे

खडसे ने पूछा कि 3,19,400 चूहों को मारने के लिए जिस कंपनी को ठेका दिया गया था, उसने महज सात दिनों में यह काम कैसे पूरा कर लिया

Updated On: Mar 23, 2018 05:15 PM IST

Bhasha

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महाराष्ट्र का 'चूहा घोटाला': कंपनी ने 7 दिन में कैसे मार डाले 3 लाख चूहे

महाराष्ट्र के बीजेपी नेता एकनाथ खडसे ने अपनी ही सरकार से पूछा है कि कोई 7 दिन में 3 लाख चूहे कैसे मार सकता है. महाराष्ट्र सरकार ने अपने सचिवालय में चूहों को मारने के लिए एक कंपनी को ठेका दिया था. कंपनी ने 7 दिन में 3 लाख से ज्यादा चूहों को मार देने का दावा किया है. अब एकनाथ खडसे इस मामले की जांच की मांग कर रहे हैं.

उन्होंने विधानसभा में कहा कि 3,19,400 चूहों को मारने के लिए जिस कंपनी को ठेका दिया गया था, उसने महज सात दिनों में यह काम कैसे पूरा कर लिया?

उन्होंने बजट मांगों पर चर्चा के दौरान कहा कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी ने शहर में छह लाख चूहों को मारने के लिए दो साल का समय लिया था.

कंपनी ने छह महीने के बजाए सात दिन में चूहा मारने का किया दावा 

खडसे ने दावा किया, ‘एक सर्वेक्षण में पाया गया कि मंत्रालय में 3,19,400 चूहे हैं. एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने चूहों को मारने के लिए ठेका दिया. ठेका पाने वाली कंपनी को छह महीने का समय दिया गया. लेकिन उसने महज सात दिनों में इस काम को अंजाम देने का दावा किया है’

उन्होंने कहा,‘ इसका मतलब है कि एक दिन में 45,628.57 चूहे मारे गए. उनमें 0.57 अवश्य ही नवजात रहे होंगे.’ इस पर सदन में ठहाके गूंज उठे. उनके मुताबिक 3,19,400 चूहे मारने की गोलियां 2010-11 में 1.50 रुपए की दर से खरीदी गई थीं और ये अब उसी दर पर फिर से खरीदी गई थीं. यह एक माउलीहेल के बाहर पहाड़ बनाने की तरह है.

उन्होंने कहा कि इसका यह मतलब भी है कि कंपनी ने हर मिनट 31.68 चूहे मारे. उनका वजन करीब 9,125.71 किग्रा होगा और मरे हुए चूहों को मंत्रालय से ले जाने के लिए रोजाना एक ट्रक की जरूरत पड़ी होगी. लेकिन यह नहीं पता कि उन्हें कहां फेंका गया.

जिस कंपनी को मिला है ठेका, उसी के जहर से मरा था किसान 

पूर्व राजस्व मंत्री ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि सरकार किसी कंपनी को यह काम सौंपने की बजाय इस काम के लिए 10 बिल्लियों को लगा सकती थी.

उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रालय के परिसर में कंपनी द्वारा रखे गए जहर को खाकर धर्मा पाटिल नाम के एक किसान ने फरवरी में आत्महत्या कर ली थी.

पाटिल ने भूमि अधिग्रहण को लेकर मुआवजा दिए जाने में अन्याय होने का आरोप लगाते हुए मंत्रालय में जहर खा लिया था और कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई थी.

खडसे ने कहा कि इस बारे में कोई सूचना नहीं है कि क्या कंपनी को जहर का इस्तेमाल करने की इजाजत थी, या नहीं. और क्या कंपनी को मंत्रालय में जहर का भंडार रखने की इजाजत थी.

उन्होंने जांच की मांग करते हुए कहा कि यह बहुत आश्चर्यजनक है कि इस कंपनी ने महज सात दिनों में तीन लाख से अधिक चूहों को मार दिया. कंपनी के दावे पर विश्वास नहीं किया जा सकता.

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