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प्रवर्तन निदेशालय के हाथ लगे इकबाल मिर्ची के अवैध साम्राज्य के दस्तावेज

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. कुछ अहम दस्तावेज ईडी के हाथ लगे हैं.

Updated On: Sep 11, 2018 04:28 PM IST

Yatish Yadav

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प्रवर्तन निदेशालय के हाथ लगे इकबाल मिर्ची के अवैध साम्राज्य के दस्तावेज
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. कुछ अहम दस्तावेज ईडी के हाथ लगे हैं. इन दस्तावेजों के सहारे मुंबई सीरियल ब्लास्ट के आरोपी इकबाल मिर्ची के कारोबारी साम्राज्य की असलियत का खुलासा हो सकता है. ईडी ने आरोप लगाया है कि इकबाल मिर्ची के बेटे जुनैद इकबाल मेनन तथा उसके साथियों ने हिन्दुस्तान में मिर्ची की मिल्कियत और नियंत्रण वाली जायदाद को बेचा और इससे हासिल करीब 2000 करोड़ रुपए की रकम हवाला तथा अन्य माध्यमों के सहारे देश से बाहर ले गये.

दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद जुनैद मेमन के पास अपनी जायदाद और निवेश के ब्यौरे बताने के अलावा और कोई चारा ना बचा था. जुनैद मेमन ने अपना पासपोर्ट कैंसिल करने के खिलाफ कोर्ट में अर्जी डाली है और आदेश इस अर्जी की सुनवाई के दौरान आया है.

इकबाल मिर्ची को अंडरवर्ल्ड के डॉन दाऊद इब्राहिम का दायां हाथ समझा जाता है. ईडी का दावा है कि मिर्ची ने भारत और विदेशों में जायदाद तथा कारोबार में बहुत सारी रकम निवेश की थी. इकबाल मिर्ची की 2013 में मौत हो गई और इसके बाद मिर्ची के बेटे जुनैद ने उसका कारोबारी साम्राज्य संभाला. सूत्रों का कहना है कि ईडी ने जुनैद के पासपोर्ट को रद्द करने की अर्जी भेजने का फैसला किया क्योंकि वह मनी लॉन्डरिंग के मामले में चल रही जांच में सहयोग नहीं कर रहा था. इसके बाद दुबई स्थित कंसुलेट जेनरल ऑफ इंडिया की तरफ से जुनैद को सूचना दी गई कि सरकार ने उसके पासपोर्ट को अस्थायी तौर पर रद्द करने का फैसला किया है. जुनैद 1993 से यूएई में रह रहा है.

कंसुलेट से मिली सूचना के बाद जुनैद ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और यह कहते हुए अर्जी लगायी कि उसने सभी दस्तावेज जमा किये हैं. जुनैद की एक दलील यह भी थी कि उसपर फेमा (फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट) लागू नहीं होता क्योंकि वो एक एनआरआई (नॉन रेजिडेन्ट इंडियन) है. ईडी इस याचिका का विरोध कर रही है. ईडी का तर्क है कि मामला काले धन की लेन-देन (मनी लॉन्डरिंग) की जांच से जुड़ा है और ज्यादातर धन विदेश भेजा जा चुका है.

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इस बात को संज्ञान में लेते हुए कि इकबाल मिर्ची का कारोबारी साम्राज्य थोड़े दिनों में ही बढ़कर बहुत बड़ा हो गया है, दिल्ली हाईकोर्ट ने जुनैद के पासपोर्ट को कैंसिल करने की अर्जी पर स्टे आर्डर दिया लेकिन अदालत ने यह भी कहा कि जुनैद की अर्जी पर विचार किया जा सकता है, बशर्ते वह मनी-लॉन्डरिंग के मामले में चल रही जांच के लिए जरूरी सभी दस्तावेज एजेंसी (ईडी) को सौंप दे. ईडी के एक अधिकारी ने कहा है कि एजेंसी को बड़ी संख्या में दस्तावेज मिले हैं और अभी उनकी जांच की जा रही है. ईडी के अधिकारी ने बताया, 'उसने जरूरी दस्तावेज जमा किये हैं या नहीं, अभी इसकी जांच हो रही है. अगर कोई दस्तावेज छूटा रह गया है तो हम उससे इसकी मांग करेंगे.'

ईडी का दावा, मिर्ची के बेटे ने जांच को भटकाया

ईडी ने अपने हलफनामे में कहा है कि 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट का मुख्य संदिग्ध इकबाल मिर्ची मादक द्रव्यों का अवैध व्यापार किया करता था, वह मनी लॉन्डरिंग तथा एक्सटॉर्सन के रैकेट भी चलाता था. हलफनामे में ईडी ने यह भी कहा है कि इकबाल मिर्ची का दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क से करीबी रिश्ता था और उसने अपनी काली करतूतों के जरिए भारत और भारत से बाहर बहुत सारा धन कमाया. ईडी ने कहा है कि विश्वसनीय सूत्रों के आधार पर कहा जा सकता है कि 2013 के अगस्त में इकबाल मिर्ची की मौत होने के बाद जुनैद ने दाऊद के नेटवर्क के सहारे चल रहे अपने पिता के मनी-लॉन्डरिंग के काम का जिम्मा हाथ में लिया. ईडी को अपनी जांच के दौरान इसके पर्याप्त सबूत मिले हैं.

ईडी के मुताबिक उसने 10 अप्रैल 2015 को फेमा की धारा 37 के तहत पांच डायरेक्टिव्स जारी किये. ये डायरेक्टिव्स जुनैद तथा चार कंपनियों- वेंटेज प्रायवेट लिमिटेड, रॉक स्टोन रियल्टी एंड होटल्स प्रायवेट लिमिडेट, रियल्टर्स होटल प्रोजेक्ट्स लिमिडेट तथा होराइजन इस्टेट कंस्ट्रक्टर्स प्रायवेट लिमिटेड को जारी किये गये थे. इन चारों कंपनियों का डायरेक्टर जुनैद है. साथ ही इन कंपनियों में उसकी शेयरहोल्डिंग है.

डायरेक्टिव्स में जुनैद तथा कंपनियों से बहुत सारी सूचनाएं मांगी गईं जिसमें कंपनियों में शेयरहोल्डिंग, चल एवं अचल संपदा के मालिकाने से जुड़े मुनाफे तथा भारत से भेजी गई या फिर भारत में भेजी गई रकम के ब्यौरे शामिल हैं. चारों कंपनियों ने 21 अप्रैल 2015 को अलग-अलग जवाब भेजकर कहा कि हमें चार हफ्ते का समय दिया जाए क्योंकि अभी जुनैद सफर पर होने के कारण मौजूद नहीं है. ईडी का दावा है कि इसके बाद से कंपनियों ने कोई जानकारी मुहैया नहीं करायी सो जांच एजेंसी ने 15 मई 2015 को रिमाइंडर भेजा.

जांच एजेंसी को 20 मई 2015 को जवाब मिला जिसमें जुनैद ने कहा कि भारत से उसका कोई कारोबारी रिश्ता नहीं है और अनिवासी भारतीय होने के कारण ऐसी कोई बाध्यता नहीं कि वह ईडी को किसी तरह की कोई सूचना दे. उसने ईडी से निवेदन किया कि भेजे गये डायरेक्टिव्स वापस ले लिए जायें और उसपर चल रही जांच बंद कर दी जाय.

फिर 2 जून 2015 को चार कंपनियों ने ईडी को सूचनाएं भेजीं. ईडी का कहना है कि ये सूचनाएं पहले से ही वैधानिक जरूरतों के कारण सार्वजनिक रूप से मौजूद हैं. ईडी के मुताबिक कंपनियों से कुछ खास जानकारी मांगी गई थी लेकिन कंपनियों ने ये जानकारी मुहैया नहीं करायी. ईडी ने 7 अगस्त 2015 को जुनैद को समन जारी करके कहा कि वह जरूरी दस्तावेज तथा अकाउंट्स से जुड़े कागजात के साथ जांच एजेंसी के सामने हाजिर हो. ईडी का कहना है कि जुनैद के जवाब से जाहिर है कि वह अपनी गतिविधियों की जांच के काम में सहयोग करने को तैयार नहीं जबकि उसकी गतिविधियों का असर भारत की संप्रभुता तथा सुरक्षा पर हो सकता है.

साथ ही, वह विदेश में मौजूद अपनी धन-संपदा के बारे में भी कोई जानकारी नहीं देना चाहता. इन वजहों से ईडी ने 18 अगस्त 2015 को भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव से निवेदन किया कि जुनैद का पासपोर्ट रद्द कर दिया जाय. दो दिन बाद जुनैद ने चिट्ठी भेजी और फिर से चार हफ्ते का समय मांगा. दलील यह दी कि सफर पर होने के कारण अभी वह दस्तावेज मुहैया नहीं करा सकता. जांच एजेंसी का दावा है कि जुनैद दस्तावेज फराहम करने के लिए गलत नीयत से समय मांग रहा है क्योंकि 7 अगस्त 2015 को सम्मन के जरिए जो सूचनाएं मांगी गई वो 10 अप्रैल 2015 को भेजे गये डायरेक्टिव्स में मांगी गई सूचनाओं से अलग नहीं हैं.

जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि अब उसके आगे यह स्पष्ट हो चुका है कि जुनैद मांगे गये दस्तावेज मुहैया कराने को राजी नहीं क्योंकि चार महीने से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है तथा आगे और ज्यादा समय की मांग जांच को लटकाये रहने के इरादे से की जा रही है. इसके बाद जुनैद के पासपोर्ट को 20 अगस्त 2015 के दिन चार हफ्तों के लिए निलंबित कर दिया गया. फिर इसके निरसन(रिवोकेशन) के लिए एक कारण बताओ नोटिस जारी हुआ.

21 सितंबर 2015 को जुनैद ने ईडी को जवाब भेजकर कहा कि जांच एजेंसी कंपनियों के बारे में जो सूचनाएं मांग रही है उन्हें मुहैया कराना जरुरी नहीं क्योंकि किसी एनआरआई की विदेश स्थित संपदा के बारे में जानकारी मुहैया कराना फेमा कानूनों के दायरे में नहीं आता. इसके बाद जुनैद से कहा गया कि वह 1 अक्तूबर 2015 के दिन निजी तौर पर ईडी के सामने हाजिर हो. जुनैद ने अपने प्रतिनिधि के मार्फत कहलवाया कि ईडी के सामने हाजिर होने की तारीख 28 सितंबर 2015 कर दी जाय. जुनैद इस तारीख को हाजिर नहीं हुआ.

इसके बाद ईडी ने 5 अक्तूबर तथा 19 अक्तूबर की तारीखें तय कीं और कहा कि जुनैद इनमें से किसी भी एक तारीख को ईडी के सामने हाजिर हो. लेकिन जुनैद इन दोनों तारीखों में से किसी भी दिन ईडी के सामने हाजिर ना हो सका. ईडी का कहना है कि पासपोर्ट के निलंबित करने के बाद ही जुनैद के रुख में थोड़ी नरमी आयी है और उसने कुछ सूचनाएं मुहैया करायी हैं.

ईडी के हलफनामे में कहा गया है कि जांच एजेंसी के पास, 'इस बात को कहने का पुख्ता आधार तथा सबूत हैं कि जुनैद बड़े पैमाने पर कालेधन के लेन-देन से जुड़ा है और उसने इकबाल मिर्ची की भारत स्थित जायदाद की बिक्री से हासिल रकम को विदेश भेजा है. यहां यह उल्लेख करना जरुरी है कि फेमा कानून की धारा 3 निवासी भारतीयों, अनिवासी भारतीयों तथा विदेशी नागरिकों पर भी लागू होती है और फेमा कानून के बहुत से नियम अनिवासी भारतीयों तथा भारत के बाहर रहने वाले लोगों पर लागू किये जा सकते हैं.'

ईडी के आरोप जुनैद को मंजूर नहीं

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट

जुनैद ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका के मार्फत कहा है कि ईडी ने 22 सितंबर 2015 को जो सूचनाएं मांगी थीं वो सारी सूचनाएं उसके प्रतिनिधि ने मुहैया करायी हैं. साथ ही कुछ और दस्तावेज भी फराहम किये गये हैं. जुनैद ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि ईडी ने उसके मुहैया कराये दस्तावेजों को बिना किसी आपत्ति के मंजूर किया और उन लोगों(जुनैद को) को यह नहीं बताया गया कि समन का पालन उन्होंने नहीं किया है. याचिका में जुनैद ने कहा है कि सम्मन का पालन ना करने को आधार बनाकर उसके खिलाफ फेमा की धारा 13 के अनुकूल कोई कार्रवाई भी नहीं की गई.

दिल्ली हाईकोर्ट में दी गई याचिका में जुनैद की तरफ से कहा गया है कि उसने जांच में पूरा सहयोग किया है लेकिन सहयोग करने के बावजूद उसके पासपोर्ट को अचानक निलंबित कर दिया गया. दस्तावेजों को सौंपने में देरी के सवाल पर याचिका में कहा गया है कि मांगे गये दस्तावेज बहुत ज्यादा हैं और उनको तैयार करने तथा दिल्ली भेजने में ज्यादा वक्त लगता. इसी कारण समय मांगा गया.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि ईडी ने मनमाने ढंग से पासपोर्ट को निलंबित करने का फैसला लिया और इसके पीछे इरादा जुनैद को परेशान करने का था, चूंकि जांच कार्य में पर्याप्त सहयोग किया जा रहा है सो जांच एजेंसी का कदम(पासपोर्ट निलंबित करने का) जायज नहीं कहा जा सकता. बहरहाल, ईडी का कहना है कि जुनैद ने जांच के लिए मांगे गये दस्तावेज मुहैया नहीं कराये.

दिल्ली हाईकोर्ट ने 14 अगस्त 2018 को निर्देश दिया कि जुनैद से जो भी दस्तावेज मांगे गये हैं उन्हें मुहैया कराना होगा क्योंकि जुनैद का यह कहना जायज नहीं कि मांगे गये दस्तावेजों का खुलासा जरुरी नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि जुनैद जांच के सिलसिले में ईडी की जरुरतों को पूरा करे. इसके बाद ही ईडी तय करेगी कि कालेधन के लेन-देन(मनी लान्डरिंग) की तफ्तीश के सिलसिले में जुनैद का निजी तौर पर हाजिर होना जरुरी है या नहीं.

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