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अब होटल-रेस्तरां तय करेंगे आपके खाने की मात्रा, आइडिया बुरा है क्या?

होटलों-रेस्तराओं को बताना होगा कि उन्हें कस्टमर को खाना कितनी मात्रा में सर्व करना चाहिए.

FP Staff Updated On: Apr 11, 2017 01:49 PM IST

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अब होटल-रेस्तरां तय करेंगे आपके खाने की मात्रा, आइडिया बुरा है क्या?

केंद्र सरकार खाने की बर्बादी को रोकने के लिए एक नया कदम उठाने जा रही है. केंद्र होटलों और रेस्टोरेंट्स में परोसे जाने वाले खाने की मात्रा को लेकर नए नियम ला सकता है.

अगर हिंदुस्तान टाइम्स की मानें तो, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय होटलों और रेस्तराओं को कुछ निश्चित सवालों की लिस्ट भेज सकता है, जिसमें वो इनसे ग्राहकों को परोस जाने वाले खाने की मात्रा से संबंधी सवाल पूछ सकता है.

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने कहा, ‘अगर एक व्यक्ति बस दो इडली खा सकता है, तो उसे चार इडली परोसने का क्या तर्क है. ये साफ-साफ खाने की बर्बादी है. इसके अलावा लोग हमेशा ऐसी चीजों के लिए भी भुगतान कर देते हैं, जिसे वो खाते ही नहीं.’

केंद्रीय मंत्री का ये बयान पीएम मोदी के मन की बात के उस एपिसोड के पखवाड़े भर बाद ही आया है, जिसमें उन्होंने खाने की बर्बादी पर चिंता जताई थी.

पासवान ने होटलों से पूछे गए सवालों पर कहा, ‘वो बेहतर जानते हैं. उन्हें बताना चाहिए कि आखिर एक होटल या रेस्तरां को कस्टमर को कितनी मात्रा में भोजन परोसा जाना चाहिए. अगर आप एक चाइनीज रेस्तरां में जाएंगे तो देखेंगे वो प्रति व्यक्ति कितना ज्यादा खाना परोस देते हैं. प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर बहुत गंभीर है. हम इस दिशा में होटल-रेस्तरां के मालिकों से इस मुद्दे पर मीटिंग करने वाले हैं.

बता दें कि मंत्रालय ने ये साफ कर दिया है कि ये नए नियम कुछ खास स्टैंडर्ड होटल और रेस्तराओं पर ही लागू होंगे न कि ढाबों पर.

हालांकि ट्विटर पर इस फैसले पर कुछ अच्छे रिएक्शन नहीं मिले हैं. यूजर्स ने इसे व्यक्ति के खाने से अधिकार से जोड़ते हुए इस फैसले की आलोचना की है. कुछ ने तो इस फैसले के मजे भी लिए हैं.

जर्नलिस्ट तुफैल अहमद ने इसकी जबरदस्त आलोचना की है.

एक यूजर ने इस फैसले की नॉर्थ कोरिया की डिक्टेटरशिप से तुलना कर डाली.

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