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4 साल का बच्चा भी 'रेप' कर सकता है?

हम देख-देखकर ही बहुत कुछ सीखते हैं. हो सकता है कि बच्चे यह सब देख-देखकर सेक्सुअली एक्सपोज हो जाते हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Nov 24, 2017 03:44 PM IST

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4 साल का बच्चा भी 'रेप' कर सकता है?

दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से छोटे बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाओं में काफी तेजी आई है. हाल ही में द्वारका में नर्सरी क्लास की एक छात्रा के साथ उसी क्लास के एक छात्र पर सेक्सुअल एसॉल्ट करने का आरोप लगा है.

द्वारका के एक नामी स्कूल में हुई इस घटना ने समाज को सकते में डाल दिया है. दिल्ली पुलिस भी इस घटना को लेकर आश्चर्यचकित है. दिल्ली पुलिस ही नहीं बल्कि समाज को भी लग रहा है कि कैसे एक चार साल का बच्चा इस तरह की हरकत कर सकता है? देश में इस तरह का यह शायद पहला अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसमें एक चार साल के बच्चे पर कथित तौर पर सेक्सुअल एसॉल्ट का आरोप लगा है.

गौरतलब है कि दिल्ली के द्वारका में नर्सरी क्लास की एक छात्रा स्कूल से जब घर पहुंची तो अपने मां से प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत की. पीड़ित छात्रा की मां ने शुरुआत में उसकी बात को उतनी गंभीरता से नहीं लिया. लेकिन, रात को जब बच्ची दर्द से कराहने लगी तो उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया. डॉक्टर ने बच्ची के उपचार में पाया कि उसके साथ सेक्सुअल एसॉल्ट हुआ है.

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पीड़ित छात्रा की मां ने घटना की शिकायत स्कूल प्रशासन से की. बच्ची की मां ने 11 नवंबर की रात को ही ईमेल के जरिए इस घटना की जानकारी स्कूल प्रशासन को दे दी थी. अगले दिन पीड़ित छात्रा के परिजनों ने स्कूल के प्रिंसिपल से भी लिखित शिकायत दर्ज कराई. लेकिन, परिवारवालों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने इस घटना की जानकारी समय पर मिलने के बावजूद तत्परता नहीं दिखाई.

डॉक्टरों के द्वारा सुनिश्चित किए जाने के बाद ही पीड़िता के माता-पिता ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. दिल्ली पुलिस ने तुरंत ही अज्ञात के खिलाफ रेप का केस दर्ज कर जांच शुरू भी कर दी. लेकिन, दिल्ली पुलिस इस घटना के बाद धर्मसंकट में फंस गई है. भारतीय दंड संहिता कहती है कि सात साल से कम उम्र के बच्चे पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

परिजनों की शिकायत पर बेशक दिल्ली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया हो, लेकिन दिल्ली पुलिस इस मसले पर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. दिल्ली पुलिस के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोप जिस बच्चे पर लगा है, वह महज अभी साढ़ चार साल का है. ऐसे में दिल्ली पुलिस भारतीय दंड संहिता के सेक्शन 82 का हवाला दे रही है.

इस सेक्शन में साफ-साफ लिखा है कि सात साल से कम उम्र के बच्चे पर केस दर्ज करने से बचना चाहिए. इसमें लिखा गया है कि इस उम्र के बच्चों का दिमाग इतना विकसित नहीं होता है कि वह अपराध करे या करने की सोच सके. दूसरी तरफ स्कूल प्रशासन ने इस घटना को नया मोड़ दे दिया है. स्कूल प्रशासन ने बृहस्पतिवार को दिए एक बयान में कहा है कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह घटना वास्तविक है या नहीं?

स्कूल का प्रशासन का कहना है कि लड़कों का शौचालय लड़कियों के शौचालय से काफी दूर है और इसमें यह संभव नहीं है कि एक लड़का, लड़कियों के शौचालय में प्रवेश कर सकता है.

सीसीटीवी फुटेज को लेकर स्कूल प्रशासन का कहना है कि अभी तक सीसीटीवी कैमरा कक्षा के अंदर या बाहर नहीं लग पाया है. स्कूल के गलियारे में लड़की का जो सीसीटीवी फुटेज सामने आया है उसमें लड़की काफी खुश दिखाई दे रही है.

इधर दिल्ली पुलिस भी मामले की गंभीरता को समझते हुए विशेष टीम का गठन कर दिया है. स्कूल के प्रिंसिपल और घरेलू सहायकों को जांच में शामिल होने के लिए कहा गया है. एक-दो राउंड प्रिंसिपल, शिक्षक और सेविकाओं से पूछताछ भी हो चुकी है. दूसरी तरफ स्कूल का कहना है कि आरोपी छात्र स्कूल के कक्षा में भाग ले रहा है. जबकि, पीड़ित छात्रा अभी स्कूल नहीं आ रही है.

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घटना को लेकर चारों तरफ चर्चा हो रही है. दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स ने भी स्कूल प्रबंधन को इस मामले में जवाब-तलब किया है. कमीशन ने प्रिंसिपल सहित स्कूल के तीन कर्मचारियों को सोमवार को पेश होने को कहा है. कमीशन स्कूल प्रशासन पर पीड़ित छात्रा की मां के द्वारा लगाए गए आरोपों की पड़ताल करेगा.

मेट्रो शहरों में तेजी से बदलते हमारे लाइफ स्टाइल को लेकर अब सवाल खड़े किए जाने लगे हैं. समाज में इस तरह की घटना के बाद यह सवाल उठने लगा है कि हम अपने समाज को किस दिशा की तरफ ले जा रहे हैं.

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) के मनोचिकित्सक डॉक्टर नंद कुमार फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'देखिए, अगर हम इस घटना को साइंटिफिकली देखें तो पहली बात जो किशोरावस्था की उम्र होती है, उसमें अब कमी आई है. पहले के बच्चे 14 साल में ही मैच्योर हो जा रहे थे, पर अब बच्चे उससे कहीं पहले मैच्योर हो रहे हैं. दूसरी बात, बच्चों का डेवलपमेंट पहले की तुलना में जल्दी हो रहा रहा है.'

डॉ नंद कुमार कहते हैं, 'इसके दो कारण हैं एक तो मल्टीपल इनफॉरमेशन का एक्सपोजर. जैसे यह इंटरनेट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के जरिए बढ़ा है. दूसरा, फैमिली का आकार भी अब पहले की तुलना में छोटा होता जा रहा है. परिवार में ऐसी घटना रोज देखने को मिलती है जो हमलोगों ने अपने मां-बाप के साथ न होते देखा है और न सुना है. बच्चों के माता-पिता अब बच्चों के सामने ही पत्नियों के साथ हग या किस कर रहे हैं. कुछ लोग कहते हैं कि वेस्टर्न कॉन्सेप्ट को लोग अडॉप्ट करने लगे हैं. हमलोग कंफ्यूज हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए? सोसायटी का ट्रांसफॉरमेशन हो रहा है. लोग सोचते हैं कि यह वाला अच्छा है कि दोनो का मिश्रण बना कर चलें?’

डॉ नंद कुमार आगे कहते हैं, 'देखिए बच्चों की जो लर्निंग होती है वह समाज से ही होती है. हम देख-देख कर ही बहुत कुछ सीखते हैं. हो सकता है कि बच्चे यह सब देख-देख कर सेक्सुअली एक्सपोज हो जाते हैं. पहले के बच्चे जितना अपने बॉडी को एक्सप्लोर करते थे, उससे कहीं ज्यादा आज के बच्चे अपने बॉडी और दूसरे के बॉडी को एक्सप्लोर करते हैं. ये सब सोशल लर्निंग का पार्ट है. सोशल स्ट्रेक्चर इसका मैन कारण है. मोबाइल पर आजकल के बच्चे ज्यादा समय बिता रहे हैं. हो सकता है बच्चे उन क्लिप्स को भी देखते हों जो उनके मम्मी-पापा ने स्टोर कर रखा हो.'

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