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सेना के इस फैसले के बाद सैनिकों को अब खुद खरीदनी पड़ेगी वर्दी

केंद्र सरकार के फंड जारी नहीं करने से सेना को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है. छोटी लड़ाई के दौरान गोला-बारूद और कलपुर्जे खरीदने के लिए पैसा बचाने के उद्देश्य से सेना ने यह कदम उठाया है

FP Staff Updated On: Jun 05, 2018 10:28 AM IST

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सेना के इस फैसले के बाद सैनिकों को अब खुद खरीदनी पड़ेगी वर्दी

देश के जवानों को अब अपनी वर्दी (यूनिफार्म) खुद खरीदनी पड़ सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय सेना ने इसके लिए अब आर्डनेंस फैक्ट्रियों (आयुध कारखानों) से खरीदारी में कटौती करने का फैसला किया है. छोटी लड़ाई के दौरान गोला-बारूद और कलपुर्जे खरीदने के लिए पैसा बचाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है.

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज से सप्लाई होने वाले सामानों की संख्या को 94 फीसदी से कम कर के 50 प्रतिशत पर लाया जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि केंद्र सरकार ने गोला-बारूद की आपातकालीन खरीदारी के लिए सेना को अतिरिक्त फंड नहीं दिया है.

इस कटौती का असर यह होगा कि सैनिकों को अपनी वर्दी, जूते, बेल्ट सहित दूसरी चीजें खुद खरीदना पड़ सकता है. जवानों को इन सामानों को बाजार से खरीदना होगा जिसके लिए उन्हें खुद पैसे खर्च करने होंगे. इसके अलावा सेना के कुछ वाहनों के कलपुर्जे (स्पेयर पार्ट) खरीदने भी पर भी इस फैसले का असर पड़ेगा.

आपातकालीन गोला-बारूद के स्टॉक को बनाए रखने के लिए सेना 3 योजनाओं (प्रोजेक्ट्स) पर काम कर रही है, इसके लिए हजारों करोड़ रुपए के फंड की आवश्यकता है. इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में बताया कि केंद्र सरकार ने आपातकालीन खरीदारी के लिए फंड जारी नहीं किया है इसलिए सेना को अपने खर्चों में कटौती कर इसे पूरा करना पड़ रहा है.

मौजूदा वित्त वर्ष (2018-19) के बजट को देखते हुए अधिकारियों ने बताया कि सेना के पास आयुध कारखानों से सप्लाई में कटौती करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. तीन योजनाओं में से केवल पर काम शुरू हुआ है. अधिकारी ने बताया कि फंड की कमी की वजह से इस योजना की आपातकालीन खरीद के लिए भुगतान कई वर्षों में करने का फैसला लिया गया है.

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस आपातकालीन खरीद के लिए लगभग 5 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं जबकि 6739.83 करोड़ रुपए का भुगतान अभी होना बाकी है.

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