S M L

DU: सत्यवती कॉलेज में गवर्निंग बॉडी के चुनाव टले, गलत मंशा के लगे आरोप

16 मई के दिन होने वाले चुनाव के स्थगन के निर्देश को यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के हाथों होने वाली दखलंदाजी के एक प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है.

Kangkan Acharyya Updated On: May 17, 2018 04:58 PM IST

0
DU: सत्यवती कॉलेज में गवर्निंग बॉडी के चुनाव टले, गलत मंशा के लगे आरोप

दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर गवर्निंग बॉडी के चुनाव में कुछ उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने की नियत से दखलंदाजी करने की शिकायतों की तादाद बढ़ती जा रही है लेकिन इसी बीच विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजेज की एक चिट्ठी सत्यवती कॉलेज पहुंची है और चिट्ठी मिलने के बाद सत्यवती कॉलेज ने अनिश्चित अवधि के लिए चुनाव स्थगित कर दिए हैं.

चुनाव स्थगित करने का फैसला कॉलेज ने एक ऐसे वक्त में लिया है जब विश्वविद्यालय में वामपंथी और दक्षिणपंथी ताकतों के बीच शक्ति-संतुलन को लेकर चल रही रस्साकशी ने एक बड़ी बहस का रूप ले लिया है. महज एक दिन पहले आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय के अधिकारी सत्यवती कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के चुनाव में एक सदस्य को चेयरमैन बनाने की नियत से दखलंदाजी कर रहे हैं.

चुनाव स्थगित करने के पीछे कोई और मंशा?

कॉलेज की प्रिंसिपल डा. मंजुला दास का कहना है कि 'विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने हमसे चुनाव की तारीख आगे बढ़ाने के लिए कहा है क्योंकि अपनाई जा रही चुनाव प्रक्रिया को लेकर उन्हें कुछ आपत्ति है. हमसे कहा गया है कि जब तक विश्वविद्यालय से इस सिलसिले में आगे कोई स्पष्टीकरण नहीं मिल जाता तब तक चुनाव स्थगित रखे जाएं.'

लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ सूत्रों ने आरोप लगाया है कि चुनाव स्थगित करने के पीछे मुख्य मकसद कुछ और ही है. सूत्रों के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारी अपने कुछ नजदीकी लोगों को गवर्निंग बॉडी में रखवाना चाहते हैं और इसी कारण चुनाव-प्रक्रिया की कमी का हवाला देकर चुनाव स्थगित करवाया गया है जबकि यह सिर्फ एक बहाना भर है.

सूत्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय के अधिकारियों को आशंका है कि उनकी पसंद के उम्मीदवार शायद चुनाव नहीं जीत पाएंगे इसलिए वे लोग चुनाव को स्थगित कर अपने लिए कुछ और समय हासिल करना चाहते हैं ताकि मनपसंद उम्मीदवार को चुनाव जितवाने लायक वोट जुटाए जा सकें.

विश्वविद्यालय प्रशासन पर लग रहे हैं आरोप

एक अहम बात यह भी है कि आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने पहले भी ऐसे ही आरोप लगाए थे और कहा था कि विश्वविद्यालय का प्रशासन अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन और ट्रेजर के पद पर बैठाना चाहता है.

संजीव झा का कहना है कि 'दिल्ली में आम आदमी पार्टी के शासन से पहले यहां की सत्ताधारी पार्टी के किसी भी सदस्य को दिल्ली विश्वविद्यालय की गवर्निंग बॉडी का चेयरमैन बना दिया जाता था लेकिन अब शासन चूंकि आम आदमी पार्टी का है और पार्टी लोगों के लिए काम करना चाहती है इसलिए यूनिवर्सिटी ने चुनाव के जरिए नया चेयरमैन बनाने का तरीका अपनाया है. इतना ही नहीं बल्कि ये लोग वाइस चांसलर के दफ्तर का सहारा लेकर दबाव बना रहे हैं ताकि आम आदमी पार्टी के किसी भी सदस्य को यूनिवर्सिटी का चेयरमैन बनने से रोका जा सके.' उन्होंने यह भी कहा कि सत्यवती कॉलेज ऐसी दखलंदाजी का एक उदाहरण है.

कॉलेज के एक सूत्र ने बताया कि चुनाव की तारीख से एक दिन पहले यानी 15 मई को कॉलेज में विश्वविद्यालय के अधिकारियों की ओर से दो चिट्ठियां आईं.

सूत्र ने बताया कि 'एक चिट्ठी में कहा गया था कि पिछला चुनावी मुकाबला बराबरी (टाई) का रहा था, ऐसा जिक्र कॉलेज ने नहीं किया और इस कारण कॉलेज को निर्देश दिया जाता है कि विश्वविद्यालय की तरफ से इस सिलसिले में आगे किसी स्पष्टीकरण के जारी होने के पहले तक चुनाव स्थगित किए जाए.'

टाई हो गया था मुकाबला

दिलचस्प बात ये है कि गवर्निंग बॉडी के चुनाव शुरुआती तौर पर 15 अप्रैल को होने थे. लेकिन विश्वविद्यालय क अधिकारियों ने दखलंदाजी करते हुए कहा कि चुनाव की तारीख तय करने से पहले गवर्निंग बॉडी के सारे सदस्यों को सूचित नहीं किया गया.

कॉलेज के सूत्र के मुताबिक, 'इस वजह से बैठक की तारीख आगे बढ़ाकर 23 अप्रैल कर दी गई. लेकिन चुनावी मुकाबला बराबरी (टाई) पर छूटा. इस कारण बैठक की अगली तारीख 16 मई निश्चित की गई. इस दफे यूनिवर्सिटी के अधिकारियों का तर्क है कि समय रहते विश्वविद्यालय को यह सूचित नहीं किया गया कि चुनावी मुकाबला बराबरी पर छूटा है इसलिए चुनाव की तारीख फिर से आगे बढ़ा दी जाए.'

दिल्ली विश्वविद्यालय के अकेडेमिक काउंसिल के सदस्य शशिशेखर प्रसाद सिंह ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि गवर्निंग बॉडी के  बारे में विश्वविद्यालय को सूचित करना जरुरी नहीं है. उन्होंने कहा कि गवर्निंग बॉडी का चुनाव कॉलेज का आधिकारिक मामला है और चुनाव से जुड़ी हर प्रक्रिया के बारे में कॉलेज विश्वविद्यालय को जानकारी दे- यह जरूरी नहीं है. उन्होंने सवाल पूछा कि, 'इतनी छोटी सी बात के नाम पर चुनाव स्थगित करने के बीच आखिर मकसद क्या है? जाहिर सी बात है कि इसके पीछे कोई ना कोई राज छुपा है.'

चेयरमैन और ट्रेजर पद के लिए हो रहा है बवाल

ध्यान देने की बात है कि गवर्निंग बॉडी के चुनाव में विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कोई पहली बार दखलंदाजी नहीं की है. इससे पहले एक्जिक्टिव काउंसिल और एडमिनिस्ट्रेटिव काउंसिल के सदस्य भी विश्वविद्यालय के अधिकारियों के बारे में ऐसे आरोप लगा चुके हैं.

एक्जिटिव काउंसिल और एडमिनिस्ट्रेटिव काउंसिल ने वाइस चांसलर को लिखी चिट्ठी में इस बात पर गहरी आपत्ति दर्ज की है कि विश्वविद्यालय-प्रशासन गवर्निंग बॉडी के चुनाव में अपने पसंदीदा उम्मीदवार की जीत के लिए दखलंदाजी कर रहा है. चिट्ठी में दर्ज है: 'हमारी जानकारी में आया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के कुछ सदस्य दिल्ली सरकार के 28 महाविद्यालयों के गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन और ट्रेजर के चुनाव में अपने पद का दुरूपयोग कर रहे हैं. गवर्निंग बॉडी के कई सदस्यों को डीन ऑफिस से फोन किया जा रहा और किसी खास उम्मीदवार के पक्ष मे वोट डालने के लिए कहा जा रहा है.'

सत्यवती कॉलेज में चेयरमैन और ट्रेजर के लिए होने वाले चुनाव का जिक्र करते हुए चिट्ठी में लिखा गया: 'हम ध्यान दिलाना चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी के भेजे गए पत्र (तारीख 17.4.2018) में कॉलेजों को चुनाव प्रक्रिया के बारे में जो हिदायत दी गई है उससे बड़ी भ्रम की स्थिति पैदा हुई है क्योंकि ये दिशानिर्देश कार्य-परिषद (ईसी) के किसी प्रस्ताव या फिर किसी अध्यादेश के तहत नहीं हैं. चिट्ठी चुनाव के वक्त से ऐन पहले भेजी गई जो कि प्रशासनिक दखलंदाजी का साफ उदाहरण है और इसका मकसद गवर्निंग बॉडी के गठन में देरी करना है.'

16 मई के दिन होने वाले चुनाव के स्थगन के निर्देश को यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के हाथों होने वाली दखलंदाजी के एक प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है.

चिट्ठी डीन ऑफ कॉलेजेज के दफ्तर से जारी हुई थी और फ़र्स्टपोस्ट ने इस दफ्तर से संपर्क साधने की कोशिश की लेकिन डीन की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Social Media Star में इस बार Rajkumar Rao और Bhuvan Bam

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi