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फेसबुक, वाट्सऐप की नहीं चलेगी मनमानी, सरकार रखेगी नजर

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह ओवर-द-टॉप (OTT) सर्विसेज के लिए जल्द रेग्युलेटरी बनाएगी.

FP Staff Updated On: Apr 06, 2017 10:36 AM IST

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फेसबुक, वाट्सऐप की नहीं चलेगी मनमानी, सरकार रखेगी नजर

केंद्र सरकार ने फेसबुक, वाट्सऐप जैसी अन्य मैसेजिंग और कॉलिंग सर्विसेज पर नकेल कसने का पूरा मन बना लिया है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह टेलीकॉम ऑपरेटर्स की तरह वाट्सऐप, फेसबुक, स्काइप, वी-चैट और गूगल टॉक जैसी ओवर-द-टॉप (OTT) सर्विसेज के लिए जल्द ही एक रेग्युलेटरी बनाएगी.

डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम का कहना है कि ओटीटी सर्विसेज ग्राहकों तक पहुंचने के लिए टेलीकॉम सर्विसेज प्रोवाइडर्स का नेटवर्क इस्तेमाल करती हैं, एप बेस्ड प्रोडक्ट्स ऑफर करते हैं और साथ ही मैसेजिंग और टेलीफोन सुविधाएं भी देते हैं, तो ऐसे में इनके लिए रेग्युलेटरी क्यों न बनाया जाए.

सरकार की ओर से यह बात उस समय पर कही गई है, जब पहले ही वॉट्सऐप ने एक याचिका के विरोध में अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट को सौंपा था. आपको बता दें कि याचिकाकर्ता कर्मण्य सिंह सरीन ने वॉट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी पर सवाल उठाए थे.

जिसके जवाब में वॉट्सऐप ने कहा था कि ओटीटी सर्विसेज कुछ हद तक इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी एक्ट 2000 के प्रावधान के तहत नियंत्रित होती हैं और इन पर वो नियम-कायदे लागू नहीं होते जो कि टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स पर होता है.

ओटीटी सर्विस प्रोवाइडर्स के विरोध के बावजूद याचिकाकर्ता द्वारा प्राइवेसी का मुद्दा मजबूती से उठाने और फिर उस पर सरकार का साथ मिलने के कारण पीठ ने ये मामला पांच न्यायाधीशों वाली बेंच को सौंप दिया.

दरअसल वाट्सऐप और फेसबुक ने कहा था कि वो यूजर्स की निजी जानकारी का इस्तेमाल व्यवसायिक हित में कर सकते हैं. जब इसके खिलाफ मामला कोर्ट पहुंचा तो दिल्ली हाईकोर्ट ने इस नीति पर रोक लगा दिया.

हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि जब यूजर्स किसी सोशल साइट्स से हट जाता है या वो अपना अकाउंट बंद कर लेता है तो यूर्जस की सभी सूचना भी खाते से हटा दी जानी चाहिए. इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. जनवरी में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई से उनकी राय इस मसले पर मांगी थी.

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