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भूमि अधिग्रहण बिल पर सुप्रीम कोर्ट में फिर दिखा जजों के बीच मतभेद

सुप्रीम कोर्ट ने जजों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए चेतावनी दी थी कि न्यायिक अनुशासन और ईमानदारी कायम नहीं रहने की स्थिति में संस्थान हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा

FP Staff Updated On: Feb 22, 2018 03:37 PM IST

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भूमि अधिग्रहण बिल पर सुप्रीम कोर्ट में फिर दिखा जजों के बीच मतभेद

भूमि अधिग्रहण बिल पर घमासान के बाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में जजों के बीच मतभेद नजर आया. जस्टिस दीपक मिश्रा ने चीफ जस्टिस से एक बेंच बनाने के लिए कहा है जो भूमि अधिग्रहण बिल फैसले की वैधता पर विचार करेगी.

8 फरवरी को आए फैसले में जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने 2014 में आए फैसले को बदलते हुए कहा था कि अगर सरकार ज़मीन का तय मुआवजा देने की कोशिश करती है, लेकिन ज़मीन का मालिक मुआवजा नहीं लेता तो इस आधार पर अधिग्रहण रद्द नहीं होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने जजों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए चेतावनी दी थी कि न्यायिक अनुशासन और ईमानदारी कायम नहीं रहने की स्थिति में संस्थान हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा. इसके साथ ही उसने भूमि अधिग्रहण से संबंधित आठ फरवरी के अपने ही एक फैसले के क्रियान्वयन पर वस्तुत: रोक लगा दी.

न्यायमूर्ति एमबी लोकुर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय एक अन्य पीठ के आठ फरवरी के आदेश की आलोचना की थी.

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