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ट्रंप के विरोध के बाद भी Hiring के लिए अमेरिकी MNC आ रहे हैं भारत

एमएनसी सेंटर जिन्हें ग्लोबल इनहाउस सेंटर भी कहा जाता है उनमें कर्मचारियों की संख्या 2016 के 3,43,000 से बढ़कर 2017 में 3,96,000 हो गई थी. और इस साल यह आंकड़ा 10 प्रतिशत बढ़कर 4,35,000 होने की संभावना है

Updated On: Nov 17, 2018 06:09 PM IST

FP Staff

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ट्रंप के विरोध के बाद भी Hiring के लिए अमेरिकी MNC आ रहे हैं भारत

2016 में भारत में 943 मल्टीनेशनल कंपनी थी. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए हैरान होने वाली बात है कि 2017 में यह आंकड़ा बढ़कर 976 हो गया. इस साल यह आंकड़ा 1005 होने की उम्मीद है. और इसमें से 60 प्रतिशत एमएनसी अमेरिकी हैं. अब हर इंडस्ट्री में टेक्नोलॉजी ने अपनी पैठ बना ली है. ऐसे में इंजीनियर हर कंपनी की जरुरत बन गए हैं. और ऐसे में सिर्फ भारत ही वो देश है जहां पर कंपनियों को अपनी जरुरत की संख्या में इंजीनियर मिलेंगे.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एमएनसी सेंटर जिन्हें ग्लोबल इनहाउस सेंटर भी कहा जाता है उनमें कर्मचारियों की संख्या 2016 के 3,43,000 से बढ़कर 2017 में 3,96,000 हो गई थी. और इस साल यह आंकड़ा 10 प्रतिशत बढ़कर 4,35,000 होने की संभावना है. आज जब भारत में नौकरियां कम हैं यह ऐसा क्षेत्र है जहां लोगों को नौकरी की कमी नहीं है. यही नहीं सैलरी देने के मामले में यह सेक्टर सबसे अच्छा माना जाता है. अगर एमएनसी के कुल खर्च की बात करें तो जीआईसी में सैलरी और इंफ्रास्ट्रकचर को मिलाकर 2016 के 13 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2017 में 15 बिलियन डॉलर हो गया. हालांकि इसमें आईटी और बीपीएम जैसी कंपनियां शामिल नहीं हैं.

जिन्नोव ने अनुमान लगाया था कि 2016 में 1,571 सेंटर थे जिसमें 8,15,000 कर्मचारी थे. जिन्नोव की सीईवो परी नटराजन ने कहा कि भारत में एशियन कंपनियां जीआईसी की स्थापना कर रही हैं. 2017 में सिंगापुर की ग्रैब टैक्सी और चीन की ग्रेट वॉल मोटर ने भारत में अपने सेंटर स्थापित किए. वहीं 2016 में भारत आने वाली इंडोनेशिया की गो-जेक अब बड़ा नाम बन चुकी है.

 

 

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