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नोटबंदी:  8 नवंबर के बाद आईटीआर बदलने पर हो सकती है जांच

सीबीडीटी ने इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म्स में आय में फेरबदल को लेकर कठोर चेतावनी दी है.

Updated On: Dec 15, 2016 05:39 PM IST

FP Staff, FP Staff

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नोटबंदी:  8 नवंबर के बाद आईटीआर बदलने पर हो सकती है जांच

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड सीबीडीटी ने नोटबंदी के बाद करदाताओं पर भी सख्ती बढ़ा दी है.

8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के बाद सीबीडीटी ने नोटिस किया कि कई करदाता अपने आयकर रिटर्न को रिवाइज कर रहे हैं. सीबीडीटी ने इस तरह के फेरबदल को लेकर कठोर चेतावनी दी है.

अगर आपने 8 नवंबर के बाद अपने इनकम टैक्स रिटर्न में बदलाव किया है तो आपको भी सावधान रहने की जरुरत है. आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपने जो कुछ भी किया है वो पूरी तरह जायज हो.

आईए हम आपको सीबीडीटी की चेतावनी का मतलब समझाएं.

क्या है चेतावनी?

आयकर रिटर्न में बदलाव का प्रावधान हैं. ऐसे में सीबीडीटी को आशंका है कि कुछ करदाता पिछले साल फाइल किए अपने आयकर रिटर्न में बदलाव कर सकते हैं. इस तरीके से वे अपनी गुप्त आय को पिछले साल के रिटर्न में दिखा सकते हैं.

सीबीडीटी के अनुसार, ‘संशोधित रिटर्न फाइल करने की सुविधा गलती सुधारने के मकसद से दी गई है न कि घोषित आमदनी बदल कर पूरा फॉर्म बदल देने के लिए.’

आपको भी हो सकती है सजा?

आदेश के अनुसार, ‘किसी भी फॉर्म में अगर पिछले साल के आईटीआर में इस तरह का कोई बदलाव पाया गया तो उसकी जांच हो सकती है.’

इसमें आगे लिखा है, ‘अगर ऐसा कोई मामला आईटी डिपार्टमेंट की जानकारी में आता है जो इनकम, कैश-इन-हैंड, प्रॉफिट आदि में कोई चालाकी या धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है तो उनकी जांच जरुरी हो जाती है.’

साथ ही ये भी कि, ‘ऐसा करने का पहला मकसद उस साल की सही आय का पता लगाने के अलावा कानून की हद में आरोपी के खिलाफ मुकदमा और सजा को भी तय करता है.’

भारत में टैक्स और कॉरपोरेट कानून पर निकलने वाली मैगजीन के डायरेक्टर राकेश भार्गव कहते हैं, ‘अगर करदाता रिटर्न फाइल करने के प्रावधान का गलत इस्तेमाल करते हैं, तब जांच अधिकारी उनके खिलाफ सेक्शन 271(1)(C) के तहत चुराए गए टैक्स की रकम का 100-300% तक का जुर्माना लगा सकते हैं.’

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ऐसे लोगों को बेनामी एक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स लॉज के तहत भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

डिलॉयट हैस्किंस एंड सेल्स एलएलपी के सीनियर डायरेक्टर आलोक अग्रवाल कहते हैं, ‘सीबीडीटी ने ये साफ कर दिया है कि उनका पूरा ध्यान टैक्सपेयर्स की तरफ से बदले हुए टैक्स रिटर्न पर है.

अग्रवाल के अनुसार,‘ऐसा करके वे सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जिन करदाताओं के पास अघोषित संपत्ति है, वे उसे पिछले साल के लिए संशोधित टैक्स रिटर्न में शामिल कर ऊंची दर वाली टैक्स नीति और जुर्माने के प्रावधानों का गलत इस्तेमाल न करें.’

आप अपना टैक्स रिटर्न कब संशोधित कर सकते हैं?

आईटी एक्ट के सेक्शन 139(5) के अनुसार, एक संशोधित आईटीआर तभी फाइल किया जा सकता है जब किसी व्यक्ति को ऐसा लगे कि पहले से फाइल किए रिटर्न में किसी तरह की गलती हो गई हो.

टैक्समैन के भार्गव के अनुसार, ‘इनकम टैक्स में संशोधन तभी ही मुमकिन है जब पहले से फाइल किए गए मूल रिटर्न में कुछ गलत कहा या लिखा गया हो.’

भार्गव ने अंत में कहा, नोटबंदी के बाद कुछ टैक्सपेयर अपनी अघोषित संपत्ति को मौजूदा साल की आय के रुप में दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें मेरी सलाह है कि वे ऐसा न करें और ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ का फायदा उठाएं.

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