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'कारसेवकों को स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर माना जाए'

इस सम्मेलन में पारित एक अन्य प्रस्ताव में गाय को राष्ट्रीय पशु और भगवत गीता को राष्ट्रीय साहित्य घोषित करने की मांग की गई है

Updated On: Jan 03, 2018 11:45 AM IST

Bhasha

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'कारसेवकों को स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर माना जाए'

अयोध्या में जल्द ही राममंदिर निर्माण की मांग करते हुए कई हिंदू संतों ने कहा है कि सरकार को उन सभी को स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर मानना चाहिए जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अपने जीवन का ‘बलिदान’ किया या उस समय जेल में रहे.

हिंदू धार्मिक संतों की एक सभा में पारित एक प्रस्ताव में कहा गया कि यह नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे उन लोगों को रामसेवकों का दर्जा दें. उनसे स्वतंत्रता सेनानी जैसा व्यवहार करें जिन्होंने रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान अपने जीवन का बलिदान किया या जेल में रहे. यह प्रस्ताव पूरे देश के 50 महामंडलेश्वरों के चार दिवसीय सम्मेलन ‘वैचारिक महाकुंभ’ में पारित किया गया जिसका आयोजन मुंबई के पास भायंदर में गत 29 दिसंबर से एक जनवरी तक हुआ.

यहां पारित एक अन्य प्रस्ताव में कहा गया कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में एक राममंदिर का निर्माण जल्द होना चाहिए क्योंकि यह 125 करोड़ हिंदुओं की ‘आस्था का मामला’ है.

इस सम्मेलन का आयोजन अनंतश्री विभूषित महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती महाराज ने किया था और इसमें पारित एक अन्य प्रस्ताव में गाय को राष्ट्रीय पशु और भगवत गीता को राष्ट्रीय साहित्य घोषित करने की मांग की गई है.

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