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शाकाहारी उत्पादों की मांग मुख्यधारा में शामिल, आपूर्ति के लिए करने होंगे ठोस इंतजाम

एक भरोसेमंद वेगन शॉप चलाने के लिए बड़ी समझदारी की जरूरत होती है, खूब गहरी नजर से हर प्रॉडक्ट को देखना होता है

Updated On: Jan 08, 2019 08:19 AM IST

Maneka Gandhi Maneka Gandhi

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शाकाहारी उत्पादों की मांग मुख्यधारा में शामिल, आपूर्ति के लिए करने होंगे ठोस इंतजाम

शुद्ध शाकाहार का पालन करने वाले लोग कोई भी जंतु-उत्पाद नहीं खाते- मीट, मछली, डेयरी उत्पाद, अंडा, शहद या फिर जंतुओं से हासिल अन्य कोई भोज्य-पदार्थ उनके आहार में शामिल नहीं होता. वे पशुओं के रोम, चर्म या फिर ऊन से बनी चीजों का इस्तेमाल नहीं करते. शुद्ध शाकाहार का पालन करने वाले लोग ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल से भी परहेज बरतते हैं जिनकी प्रायोगिक जांच पशुओं पर की जाती है, जैसे बॉडी केयर प्रॉडक्टस, कास्मेटिक्स, साफ-सफाई के घरेलू सामान या फिर ऐसे उत्पाद जिनमें जंतुओं से हासिल चीजों का इस्तेमाल किया गया हो.

स्वीडेन के राजदूत ने मुझे बताया कि स्टॉकहोम के अपने घर में जब कभी वे भोज पर लोगों को बुलाते हैं तो आमंत्रित मेहमानों में अगर सभी साठ साल से ऊपर की उम्र के हों तो ज्यादा संभावना यही रहती है कि ये सभी मेहमान मांसाहार करने वाले होंगे. लेकिन भोज चालीस साल से कम उम्र के लोगों को दिया जा रहा हो तो फिर आमंत्रित हर छह मेहमान में कम से कम दो व्यक्ति निश्चित ही शाकाहारी होंगे.

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मेरे मंत्रालय ने हाल ही में चौथा राष्ट्रीय आर्गेनिक मेला आयोजित किया था. मेले में हर रोज हजारों की तादाद में लोग पहुंचे. इस बार मेले में एक वेगन (शुद्ध शाकाहार) सेक्शन था और वेगन फूडकोर्ट भी लगाया गया था. वेगन सेक्शन बड़ा कामयाब रहा- लोगों ने सबसे ज्यादा वेगन पिज्जा को पसंद किया. इस पिज्जा का चीज काजू से बना हुआ था. मैं अपने दफ्तर के कर्मचारियों को मेले में लंच के लिए ले गई थी. वहां हमने खूब चाव से खाना खाया.

मेरे एक परिचित ने ऑनलाइन वेगन शॉपिंग मॉल शुरू किया है. इसमें 800 आइटम की पेशकश की गई है. मेरे इस परिचित ने बताया कि उसे खूब सारे निवेश के प्रस्ताव मिल रहे हैं, ये लोग इस स्टार्ट-अप में निवेश करना चाहते हैं. परेशानी बस यही है कि इस स्टार्ट-अप का प्रचार-प्रसार करने वाले लोगों को ढूंढ़ने में उसे दिक्कत पेश आ रही है. चूंकि लोग ज्यादा से ज्यादा तादाद में अब स्वास्थ्य के कारणों से शुद्ध शाकाहार या फिर सामान्य शाकाहारी भोजन और जीवनशैली की तरफ आकर्षित हो रहे हैं तो अब वेगन बिजनेस (शाकाहारी जीवन शैली पर आधारित व्यवसाय) शुरू करने का एक तुक बनता है. हाल में मेरी नागपुर में दो उद्यमियों से भेंट हुई. इन दो नौजवान उद्यमियों ने बादाम से निकला बहुत स्वादिष्ट दूध तैयार किया है और अब किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में हैं जो इस उत्पाद को बाजार में लाने में इनकी मदद करे.

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पूरी दुनिया में वेगन बिजनेस की शुरुआत हो रही है. इसमें वेगन कपड़े तैयार करने वाली विश्वप्रसिद्ध डिजायनर लिंडा मैकार्टनी से लेकर बिना दूध वाली आइसक्रीम का फलता-फूलता व्यापार चलाने वाली गुड़गांव की सोनल तक शामिल हैं. मैं कुछ सालों से अंग्रेजी की मासिक पत्रिका द वेगन के बोर्ड में शामिल हूं. यह बड़े मुखर तेवर की पत्रिका है. इसमें वेगन बन चुके स्टार्स के साक्षात्कार छपते हैं, ब्रिटेन में होने वाले दैनिक वेगन इवेन्टस और वेगन रेसिपी की तफ्सील और वेगन कंपनियों के ढेर सारे विज्ञापनों को भी मैगजीन में जगह मिलती है. पत्रिका 25 सालों से चल रही है और अब भी मुनाफा कमा रही है.

माइकेल ओफी ने द मिनिमलिस्ट वेगन नाम की साइट पर 38 बिजनेस आयडियाज दर्ज किए हैं. उनका विश्वास है कि ये आयडियाज आजमाए जाएं तो एकदम से चल निकलेंगे और इससे खरीदारों में नैतिक जीवन जीने की ललक बढ़ेगी. मेरा भी मानना है कि अगर विकल्प मौजूद हों तो लोग उन चीजों को तरजीह देंगे, जिससे ज्यादा नैतिक जीवन जीने में मदद मिलती हो. मिसाल के लिए, लोग उन वस्त्रों को अपनी पसंद में शामिल करेंगे जिनके निर्माण में जंतु-स्रोत का इस्तेमाल नहीं हुआ, वे वनस्पति स्रोतों पर आधारित मिठाइयां या आइसक्रीम खाना पसंद करेंगे. मैंने पिछले हफ्ते ताजा बने वेगन मार्शमेलो खरीदे और दस मिनट में ही उन्हें तमाम कर दिया!

वेगन उत्पादों की मांग अब मुख्यधारा में शामिल हो चुकी है और उसमें इजाफा हो रहा है लेकिन मुश्किल आपूर्ति को लेकर है. हमें आपूर्ति बढ़ाने की जरूरत है. माइकेल ओफी ने जो आयडियाज दर्ज किए हैं उनमें से कुछ को यहां लिखा जा रहा है:

- फूड एंड बिवरेज: इसे वेगन रेस्टोरेंट/कैफे से लिया जा सकता है.

- वेगन पिज्जा का निर्माण हो और उसके साथ होम-डिलीवरी का ऑपशन रहे.

- डेयरी उत्पाद मुक्त आइसक्रीम बेचने वाले गेलातो बार खुलें.

- नट चीज डेली.

- वेगन बर्गर बनाने में महारत रखने वाले फूड ट्रक.

- वेगन एल्कोहलिक(मद्य) बिवरेज रिटेलर.

- वेगन बेकरी ( बहुत कम लोग जानते हैं कि ब्रेड में अंडे और दूध का इस्तेमाल होता है, और कभी-कभी उसमें मांस भी डाला जाता है).

सेवाएं:

- छोटे वेगन व्यवसाय को मददगार सेवा मुहैया कराने के लिए फ्रीलांस इलस्ट्रेटर.

- ऑनलाइन वेगन आंत्रेप्रेन्योर्स के लिए कंपनी अकाउंटेंट या बुक-कीपर (लेखापाल).

- जैविक और वेगन शॉप फिट-आउटस को मैनेज करने वाले स्पेशलिस्टस.

- वेगन बिजनेस के लिए सोशल मीडिया मैनेजर.

- वेगन एंटरप्रेन्योर (उद्यमी) के प्रोफाइल निर्माण के लिए मददगार कॉपीराइटिंग सेवा.

- कम्युनिटी वेग्गी गार्डेन के साथ एक ऑल वेगन चाइल्ड केयर सेंटर(बालवाड़ी) का निर्माण.

- वेगन वेडिंग ब्लॉग जिसमें बेहतर कंटेंट हों और वनस्पति-जगत के उपयोग पर आधारित वेडिंग ब्रांडस और सर्विसेज (सेवाओं) का विज्ञापन किया जाता हो.

- सिलसिलेवार ऑनलाइन पाठ्यक्रम चलाए जाएं. इसमें लोगों को बताया जाए कि वेगन रेसिपी घर पर कैसे बनाएं. आप वेगन पार्टी शेफ भी बन सकते हैं. वेगन कुकिंग वर्कशॉप (कार्यशाला) का भी आयोजन करें.

- ऐसे डेटिंग एप्पस बनाएं जो वेगन सोलमेटस को आपस में जोड़ता हो.

- मोबाइल एप्प के रूप में ऐसी कंसीयज (मेलापक) सेवाएं फराहम की जाएं जिसमें स्थानीय स्तर के वानस्पतिक स्रोत पर आधारित उत्पाद बेचने वाले तमाम व्यावसायियों को वेगन उपभोक्ताओं से जोड़ा जाए.

फैशन:

- ऑनलाइन वेगन शू रिटेलर.

- आर्गेनिक क्लाथिंग लाइन जिसमें रोजमर्रा के इस्तेमाल के कपड़े जैसे अंडरवियर, स्वेटर, मोजे आदि बिकते हों.

- पुरुषों के लिए सिले-सिलाये वेगन सूटस.

- आर्गेनिक (जैविक), इको-फ्रेंडली (पर्यावरण हितैषी) और फेयर ट्रेड पर आधारित वेगन मेकअप लाइन का चलन शुरू हो.

- वेगन फ्रेंडली और रासायनिक तत्वों से मुक्त नेल-पॉलिश बनाने वाली कंपनी का गठन

निवेश :

- वानस्पतिक स्रोतों पर आधारित उत्पाद बनाने वाले व्यावसायों के लिए एक खास फंड की स्थापना हो.

- वेगन बिजनेस के लिए एंजेल इन्वेस्टर (परोपकारी निवेशक) बनें.

नीचे कुछ और आयडियाज भी दिए जा रहे हैं जिनपर अमल किया जा सकता है:

वेगन पेट फूड, वेगन वाइन, बॉडी केयर, कॉस्मेटिक्स या फिर क्यों ना और बड़ा सोचें, मिसाल के लिए एक वेगन ग्रोसरी के बारे में जहां तमाम वेगन चीजें एक साथ मिल जाती हों. वेगन बिजनेस चलाना बड़े एक्टिविज्म (सामाजिक बदलाव) का काम है. इससे लोगों का वेगन बन पाना आसान हो जाता है. मैं ऐसे बहुत से सर्वाहारियों (सबकुछ खाने वाले) को जानती हूं जो कहते हैं कि वेगन प्रॉडक्ट आसानी से और बगैर ज्यादा कोशिश किए मिलें तो वे अपनी जीवनशैली को कुछ ना कुछ बदल देंगे. वेगन प्रॉडक्ट का बाजार विकसित होना चाहिए. हमें इस सिलसिले में जार्ज बर्नाड शॉ का कहा याद रखना चाहिए कि 'पशु मेरे दोस्त हैं और मैं अपने दोस्तों को नहीं खाता.'

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ऑनलाइन वेगन बिजनेस चलाना बहुत मुश्किल काम नहीं. पूरी दुनिया में ऐसी हजारों शॉप्स हैं जहां नॉन-लेदर शूज, बूटस्, बैग्स, बेल्टस, वैलेट एसेसरिज की पेशकश की जा रही है. खान-पान की वेगन चीजें भी मिलती हैं, जिसमें मॉक मीट और डेयरी उत्पाद शामिल हैं. इसके अलावा घरेलू उपयोग की चीजें जैसे होम क्लीनर्स, टॉयलेट्रिज, कॉस्मेटिक्स, स्किन केयर और चॉकलेट, जैम, चटनी, पेट केयर, रोजमर्रा की ग्रोसरी की चीजें और इस्तेमाल की अन्य घरेलू चीजें भी उपलब्ध है. मैं जब ‘वेगन स्टोर’ शब्द का इस्तेमाल करती हूं तो इसका मतलब होता है ऐसी दुकान जिनमें बिकने वाली चीजें धरती की संरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं. यानि उनको बनाने में जंतुओं पर प्रयोग नहीं किया गया.

उनमें कोई घातक रसायनिक तत्व नहीं मिलाया गया, उनमें पॉम ऑयल का इस्तेमाल नहीं हुआ (भारत पॉम ऑयल का सबसे बड़ा आयातक है, यह स्वास्थ्य के लिए तो घातक है ही, इसे बनाने के लिए लाखो एकड़ वन-भूमि बर्बाद की जाती है और उसमें इस तेल के उत्पादन में प्रयुक्त होने वाले पौधे रोपे जाते हैं. इस प्रक्रिया को अपनाने के कारण ही आज ओरांगउटान सरीखे जंतु विलुप्त होने के कगार पर हैं). साथ ही, वेगन स्टोर से मेरा मतलब ऐसी दुकानों से होता है जहां स्थानीय स्तर पर तैयार की गई चीजें ही बिकती हैं ताकि उन्हें कहीं दूर-दराज लाने में ईंधन ना बर्बाद ना हो. ऐसी चीजों की पैकिंग भी धरती की संरक्षा को ध्यान में रखकर होनी चाहिए यानि उन पर प्लास्टिक की पैकिंग नहीं चढ़ी होनी चाहिए.

वेगन शॉप में नहीं होनी चाहिए

वे कौन सी वस्तुएं हैं जो वेगन शॉप में नहीं होनी चाहिए? ऐसी चीजों में शामिल है: बीटी कॉटन से बने टी-शर्टस (इसे 'ऑर्गेनिक कॉटन' कहना चाहिए), जिलेटिन के उपयोग से बनने वाले विटामिन और मिठाइयां, पाम ऑयल जैसा कि लेख में पहले जिक्र आ चुका है, हड्डी से साफ करके उजली बनाई जाने वाली चीनी, बोन चाइना, ह्वाइट पेपर या फिर उजले रंग का कोई उत्पाद (दरअसल ब्लीच समुद्र की तमाम चीजों को मार डालता है), किसी भी किस्म का रासायनिक रंजक, राजस्थान में इन्हीं रजकों या कह लें डाई के कारण ज्यादातर नदियां मर रही हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

सोजत गांव में भारत भर के लिए मेंहदी बनायी जाती है, मैं सोजत गांव जाते हुए रास्ते में उदयपुर की एक नदी देखने गई. यह नदी एकदम खून जैसी लाल थी. इस नदी का पानी पीने वाले पक्षी और पशुओं के कंकाल नदी के किनारे चारे तरफ बिखरे पड़े थे. मैं निश्चित ही उन वेगन शॉप्स के पक्ष में नहीं हूं जो चांदी, सोने या अन्य बेशकीमती पत्थरों के आभूषण बेचते हैं, भले ही वे चाहे इन बेशकीमती पत्थरों से छोटे-छोटे और सुंदर पशुओं के मूर्तिशिल्प ही क्यों ना बनाएं. दरअसल, इन चीजों को पाने के लिए वन-भूमि का खनन करना होता है और इस प्रक्रिया में लाखों जंतु मारे जाते हैं. आखिर कांच के बने सुंदर गहनों का इस्तेमाल क्यों ना किया जाए? रेशम, ऊन, चमड़ा, फर, साबर, पंख, मूंगा, मधुमक्खी, मोती या फिर हड्डी से बनी कोई भी चीज वेगन शॉप्स में नहीं बिकनी चाहिए.

एक भरोसेमंद वेगन शॉप चलाने के लिए बड़ी समझदारी की जरूरत होती है, खूब गहरी नजर से हर प्रॉडक्ट को देखना होता है कि वह किन-किन चीजों के इस्तेमाल से बना है. मिसाल के लिए ऐसा बिस्किट मिलना मुश्किल है जिसमें पॉम ऑयल ना हो. लेकिन ऐसे बिस्किट बनते ही हैं. मैं अक्सर कहा करती हूं कि दिल एक दरवाजे की तरह है. जब यह खुलता है, तो सभी के लिए खुलता है. अधिकांश वेगन शॉप्स को खूब बारीकी से यह देखना होता है कि वहां बिकनी वाली चीजें धरती की संरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं या नहीं और यह भी सुनिश्चित करना होता है कि इन चीजों का निर्माण पानी की बचत को ध्यान में रखकर किया गया हो, सोचना होता है कि कहीं वेगन शॉप्स के प्रॉडक्ट गरीबों से लंबे समय तक काम करवा और कम मजदूरी देकर तो नहीं बनवाए गए. कुछ वेगन शॉप्स इससे भी आगे बढ़कर यह देखते हैं कि उनके पास जो सामान बिकने के लिए आ रहे हैं वे लोकतांत्रिक देशों से मंगवाए गए हैं या नहीं (लेकिन अभी के समय में लोकतांत्रिक देश कहां मिलते हैं भला?)

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