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दिल्ली में प्रदूषण की भयावह स्थिति, बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा

लोधी रोड इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 दोनों का स्तर 280 पर है, इसे खराब स्तर माना जाता है

Updated On: Oct 30, 2018 09:32 AM IST

FP Staff

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दिल्ली में प्रदूषण की भयावह स्थिति, बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा
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राजधानी दिल्ली में वायु की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है. दिल्ली-एनसीआर देश का सबसे प्रदूषित जगह बनता जा रहा है. दिल्ली में मंगलवार को भी वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है. लोधी रोड इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 दोनों का स्तर 280 पर है. इसे खराब स्तर माना जाता है. अगले कुछ दिनों में भी हालात सुधरने वाले नहीं हैं.

सोमवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 367 के स्तर पर था. इसे अति खराब स्तर माना जाता है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पेट्रोल के 15 साल पुराने और डीजल के 10 साल पुराने वाहनों के परिचालन पर प्रतिबंध लगा दिया. वहीं, बढ़ते प्रदूषण को लेकर बीजेपी नीत केंद्र सरकार और दिल्ली की आप सरकार एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही है.

इसी बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएयओ) की एक रिपोर्ट आई है, जिसके मुताबिक 2016 में भारत में पांच साल से कम उम्र के करीब एक लाख बच्चों की जहरीली हवा के प्रभाव में आने से मौत हो गई. साथ ही, इसमें बताया गया कि निम्न एवं मध्यम आय-वर्ग के देशों में पांच साल से कम उम्र के 98 फीसद बच्चे 2016 में हवा में मौजूद महीन कण (पीएम) से होने वाले वायु प्रदूषण के शिकार हुए.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति को ‘बहुत ही चिंताजनक’ बताते हुए निर्देश दिया कि पेट्रोल से चलने वाले 15 साल पुराने और डीजल से चलने वाले 10 साल वाहनों की सूची सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और परिवहन विभाग की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाए.

इस बीच, ग्रीनपीस द्वारा जारी एक रिपोर्ट में भारत के प्रदूषण स्तर की बहुत ही भयावह तस्वीर पेश की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन के विश्व के तीन सबसे बड़े ‘हॉटस्पॉट’ भारत में हैं और इनमें से एक दिल्ली-एनसीआर में है. पीएम 2.5 और ओजोन के निर्माण के लिए नाइट्रोजन ऑक्साइड जिम्मेदार होता है.

प्रदूषण के लिए केजरीवाल का बीजेपी-कांग्रेस पर आरोप

राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के लिए बीजेपी नीत केंद्र सरकार और दिल्ली की आप सरकार एक-दूसरे पर दोष मढ़ रही है और प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने का एक दूसरे पर आरोप लगा रही है.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण के लिए केंद्र, हरियाणा और पंजाब की सरकारों को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि आप सरकार के सभी प्रयासों के बावजूद वे कुछ भी करने को तैयार नहीं हैं.

केजरीवाल ने ट्वीट किया, दिल्ली में प्रदूषण पूरे वर्ष नियंत्रण में रहा लेकिन प्रतिवर्ष इस समय (सर्दियों में) दिल्ली को केंद्र, बीजेपी की हरियाणा और कांग्रेस की पंजाब सरकारों के चलते गंभीर प्रदूषण का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा, हमारे सभी प्रयासों के बावजूद वे कुछ भी करने को तैयार नहीं हैं. इन दोनों राज्यों के किसान भी अपनी सरकारों से तंग आ चुके हैं.

आप सरकार वायु प्रदूषण को कम करने में असफल रही

केजरीवाल के आरोपों का जवाब देते हुए पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने आरोप लगाया कि आप सरकार प्रदूषण को रोकने के लिए बुनियादी कदम उठाने में असफल रही. हर्षवर्धन ने कहा कि केजरीवाल केंद्र और राज्य सरकारों पर हमला बोल कर अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते.

बीजेपी की दिल्ली इकाई के प्रमुख मनोज तिवारी ने शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आप सरकार पर प्रभावी कदम नहीं उठाने का आरोप लगाते हुए पार्टी शासित नगर निगमों को इस संबंध में काम करने को कहा.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने नवंबर के शुरुआती 10 दिनों के लिए सीपीसीबी की अनुशंसाओं को स्वीकार कर लिया है. इन अनुशंसाओं में एक से 10 नवंबर के बीच सभी तरह की निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने को कहा गया है, जिनसे निकलने वाली धूल से प्रदूषण होता है. अधिकारियों ने पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को नहीं अपनाने पर 113 उद्योगों को बंद करने का निर्देश दिया है.

उपराज्यपाल अनिल बैजल के नेतृत्व में हुई एक बैठक में अधिकारियों ने एलजी को बताया कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ 1368 कारण बताओ नोटिस और 417 को बंद करने के निर्देश जारी किए हैं.

(इनपुट भाषा से)

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