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2019 से DU में सिर्फ 12वीं के मार्क्स पर नहीं होगा एडमिशन! देना पड़ सकता है एंट्रेंस टेस्ट

अब केवल क्लास 12 के मार्क्स ही DU में एडमिशन पाने के लिए काफी नहीं होंगे, हालांकि इसके लिए एक फिक्स्ड वेटेज छात्रों को मिलेगा. डीयू अगले साल से सभी अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षा (एंट्रेंस एग्जाम) लेने की योजना बना रही है

Updated On: Dec 20, 2018 10:22 AM IST

FP Staff

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2019 से DU में सिर्फ 12वीं के मार्क्स पर नहीं होगा एडमिशन! देना पड़ सकता है एंट्रेंस टेस्ट

अगले साल यानी 2019-20 के शैक्षिक सत्र से दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के एडमिशन सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. अब केवल क्लास 12 के मार्क्स ही DU में एडमिशन पाने के लिए काफी नहीं होंगे, हालांकि इसके लिए एक फिक्स्ड वेटेज छात्रों को मिलेगा. डीयू अगले साल से सभी अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षा (एंट्रेंस एग्जाम) लेने की योजना बना रही है. अभी तक इस एंट्रेंस बेस सिस्टम की डिटेल्स नहीं आई है लेकिन डीयू 2019 के एडमिशन सीजन से इसे लागू करने पर विचार कर रही है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, डीयू के कुलपति योगेश त्यागी ने कहा कि डीयू की एडमिशन कमिटी 2019-20 की दाखिला प्रक्रिया में एंट्रेंस एग्जाम के सिस्टम को लागू करने के मामले पर विचार करेगी. यह कमिटी एक स्वतंत्र कमिटी है जिसके सदस्य के तौर पर शिक्षा विशेषज्ञ, कॉलेजों के प्रिंसिपल और फैकल्टी मेंबर शामिल हैं.'

डीयू की एडमिशन कमिटी ने इस बारे में पिछले साल भी चर्चा की थी लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई थी. एंट्रेंस एग्जाम आयोजित कराने की समस्याओं के कारण भी इस योजना को टाल दिया गया था. इसके साथ ही एडमिशन कमिटी के सदस्यों ने भी इसका विरोध किया था.

DU ने 2017 में ही बनाई थी एंट्रेंस टेस्ट की योजना

एडमिशन कमिटी इस साल की एंट्रेंस एग्जाम कराने की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को आउटसोर्स करने पर भी विचार कर रही है. एनटीए ने हाल ही में सीबीएसई से नेट और जेईई एग्जाम कराने की जिम्मेदारी ली है. त्यागी से जब पूछा गया कि क्या यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम में एनटीए की भूमिका पर गौर करेगी, तो उन्होंने कहा कि एडमिशन कमिटी इस संभावना पर फैसला करेगी.

दिल्ली यूनिवर्सीटी ने 2017 में एंट्रेंस टेस्ट आधारित एडमिशन सिस्टम में स्विच करने का पहला प्रयास किया था, लेकिन छात्रों ने बताया था कि दूरदराज के इलाकों से आने वाले उम्मीदवारों को शॉर्ट नोटिस के कारण कंप्यूटर आधारित परीक्षा में नुकसान होगा. एडमिशन कमिटी ने अन्य लोगों और विशेषज्ञों से भी राय मांगी थी. यह योजना 2018 में भी सिर्फ इसलिए पूरा नहीं हो पाया क्योंकि एडमिशन कमिटी और यूनिवर्सिटी एडवाइजरी काउंसिल में सहमति नहीं बन पाई.

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