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जाट आंदोलन रद्द होने के बाद भी रेंग रहा है 'दिल्ली-एनसीआर' का ट्रैफिक

पिछले साल हुए जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में हरियाणा के कई स्थानों पर 30 लोग मारे गए थे

FP Staff Updated On: Mar 20, 2017 08:53 AM IST

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जाट आंदोलन रद्द होने के बाद भी रेंग रहा है 'दिल्ली-एनसीआर' का ट्रैफिक

रविवार को जाट समुदाय के नेताओं और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच आरक्षण के मुद्दे पर बैठक हुई थी. बैठक में जाटों के आरक्षण की मांग उठाते हुए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रस्तावित आंदोलन फिलहाल कुछ समय के लिए टाल दिया गया है.

लेकिन, इसके बाद भी सोमवार की सुबह दिल्ली-एनसीआर के लोगों को यातायात में भारी दिक्कत और लंबे ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा जाट आंदोलन को ध्यान में रखते हुए उठाए जा रहे एहतियात के कारण हो हो रहा है.

दिल्ली-नोएडा-गुड़गांव और फरीदाबाद में कई जगहों पर, जिनमें खासकर बॉर्डर वाले इलाकों शामिल हैं वहां पुलिस की तैनाती की गई है. जगह-जगह पर चेकपोस्ट पर जांच की जा रही है.

भारी संख्या में पुलिस बल सड़क पर चेकिंग करते हुए देखे जा रहे हैं. जिसके कारण ट्रैफिक की रफ्तार रोज की तुलना में धीमी चल रही है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने रविवार रात ही ट्रिट के जरिए इस बारे में जानकारी दे दी थी.

इससे पहले सोमवार को शुरू होने वाले जाट आंदोलन को ध्यान में रखते हुए और जाटों का दिल्ली में प्रवेश रोकने के लिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश और राजस्थान में निषेधाज्ञा लागू की गयी थी.

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए करीब 24,700 अर्धसैनिक बल भी तैनात किए गए थे. दिल्ली में मेट्रो और सड़क परिवहन पर भी इसका असर पड़ने वाला था और कई स्कूलों के बंद होने की भी खबर आई थी.

लेकिन, सोमवार सुबह दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने नए ट्वीट के साथ दिल्ली वासियों को बताया कि सुरक्षा कारणों के कारण दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में ट्रैफिक आज दिक्कत पैदा कर सकती है.

उन्होंने लोगों से इन इलाकों में आने से बचने की सलाह दी.

रविवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति (एआईजेएएसएस) के अध्यक्ष यशपाल मलिक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि, 'अब जाट दिल्ली ना आ रहे. हमने दिल्ली कूच के अपने कार्यक्रम और आंदोलन को रद्द कर दिया है. राज्य सरकार ने हमारी मांगें मान ली हैं.'

मलिक ने कहा कि, जाट समुदाय राज्य में अधिकतर स्थानों से अपना धरना वापस लेगा और केवल कुछ स्थानों पर सांकेतिक रूप से यह प्रदर्शन जारी रहेगा.

पिछले साल हुए जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में हरियाणा के कई स्थानों पर 30 लोग मारे गए थे और करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था.

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