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सियासत नहीं, सीलिंग का हल चाहते हैं दिल्ली के व्यापारी

ट्रेडर्स इस मसले पर राजनीतिक पार्टियों के एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने की बजाय मौजूदा सीलिंग के मुद्दे का तेजी से हल चाहते हैं

Debobrat Ghose Debobrat Ghose Updated On: Feb 03, 2018 05:16 PM IST

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सियासत नहीं, सीलिंग का हल चाहते हैं दिल्ली के व्यापारी

नई दिल्ली में 48 घंटे के व्यापार बंद पर जाने से पहले दिल्ली के कारोबारियों ने सभी राजनीतिक पार्टियों को संदेश दिया – ‘कृप्या राजनीति न करें और हमारे मसले का राजनीतिकरण न करें.’

2 और 3 फरवरी को 48 घंटे लंबे दिल्ली ट्रेड बंद का आह्वान करने वाले दिल्ली के ट्रेडर्स ने यह साफ कर कर दिया है कि राजधानी में चल रही सीलिंग के मसले पर वे राजनीतिक पार्टियों के किसी भी दखल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

ट्रेडर्स इस मसले पर राजनीतिक पार्टियों के एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने की बजाय मौजूदा सीलिंग के मुद्दे का तेजी से हल चाहते हैं.

शुक्रवार को बड़ी तादाद में होलसेल और रिटेल मार्केट्स बंद रहे. कारोबारी संगठनों ने सीलिंग के खिलाफ सुरक्षात्मक उपाय के तौर पर एमनेस्टी स्कीम की मांग की है.

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि हमारे इस संवेदनशील मसले का राजनीतिकरण हो. पार्टियों की आपसी लड़ाई में यह मुद्दा गायब हो गया है. दिल्ली की आप सरकार को इस मसले में दखल क्यों देना चाहिए जबकि वे इसमें हमें कोई राहत नहीं दे सकते?’

सीएआईटी ने शुक्रवार को सरकार के सामने दो मांगें रखीं.

1- कन्फेडरेशन ने केंद्र से एक एमनेस्टी स्कीम का ऐलान करने का अनुरोध किया है. इससे 31 दिसंबर 2017 को संपत्तियों की जैसी स्थिति थी वैसी कायम रखना सुनिश्चित होगा और कोई सीलिंग नहीं की जाएगी.

2- दिल्ली के उपराज्यपाल की अगुवाई में केंद्र और दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, दिल्ली पुलिस और कारोबारी प्रतिनिधियों वाला एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित किया जाए. यह बेहतर दिल्ली के लिए मास्टर प्लान को लागू करने पर विचार करेगा.

खंडेलवाल ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, ‘हमें पता चला है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने ट्रेडर्स के लिए कुछ राहत देने वाले उपाय किए हैं. अभी इनका ब्यौरा नहीं मिला है. अब इसकी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की है कि वह दिल्ली में 351 सड़कों को कमर्शियल एंड मिक्स लैंड यूज के तौर पर नोटिफाई करे. हम दिल्ली के मास्टर प्लान को प्रभावी तरीके से लागू करना चाहते हैं ताकि सदियों से अपने कारोबार के लिए मशहूर दिल्ली अपनी चमक न खो दे.’

New Delhi: AAP party workers protest against the ongoing MCD's sealing drive in the city, outside Delhi LG residence, in New Delhi on Friday. PTI Photo (PTI2_2_2018_000086B)

उन्होंने कहा, ‘सीलिंग ड्राइव के इस पूरे प्रकरण के मुख्य दोषी एमसीडी के अधिकारी हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के भ्रम में म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली (एमसीडी) एक्ट 1957 के मूल प्रावधानों को दरकिनार कर दिया. केंद्र सरकार ने सीलिंग मसले को हल करने के लिए आगे बढ़कर काम किया है, लेकिन दिल्ली सरकार ने 351 सड़कों को नोटिफाई करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया, बल्कि इसने इस राजनीतिक मसला बना दिया.’

दिल्ली में सीलिंग ड्राइव ने बीजेपी, आप और कांग्रेस को जंग के मैदान में ला खड़ा किया है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी की अगुवाई में बीजेपी लीडर्स के साथ 30 जनवरी को बैठक बुलाई. हालांकि, मीटिंग एक त्रासदी में बदल गई. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि आप नेताओं ने उनके साथ बदतमीजी की.

दूसरी ओर, कांग्रेस ने कारोबारियों के विरोध को अपना समर्थन दिया है.

खंडेलवाल ने कहा, ‘जहां तक कांग्रेस के समर्थन की बात है, हम इसका स्वागत करते हैं. लेकिन, हम नहीं चाहते कि हमारे मसले से कांग्रेस कोई राजनीतिक फायदा ले.’

कारोबारियों के एक बड़े तबके के मुताबिक, आप का दखल अपनी पोजिशन को मजबूत करने की एक कोशिश है क्योंकि पार्टी का वोटर बेस धीरे-धीरे घट रहा है.

आप की चिंता 20 सीटों पर होने वाले उपचुनावों से जुड़ी हुई है क्योंकि पार्टी के 20 विधायक ‘लाभ के पद’ के चलते अयोग्य घोषित कर दिए गए हैं.

नाम न छापने की शर्त पर करोल बाग के एक ट्रेडर ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, ‘आप दिल्ली में कारोबारी समुदाय के बीच खुद को मजबूत करना चाहती है क्योंकि पार्टी का वोटर बेस तेजी से घट रहा है. मध्यम वर्ग का एक बड़ा हिस्सा केजरीवाल सरकार से निराश है. यहां तक कि आप को दो बार जबरदस्त समर्थन दे चुके ऑटोवाले भी अब पार्टी के खिलाफ हैं. एमसीडी इलेक्शंस इसका सबसे बड़ा प्रमाण हैं. असेंबली में 67 विधायक होने के बावजूद बीजेपी ने एमसीडी में जबरदस्त जीत हासिल की. अब उपचुनावों पर नजर डालते हुए आप ट्रेडर्स के साथ सहानुभूति दिखा रही है, जबकि उसकी नजर इसके जरिए चुनावी फायदा बटोरने पर है.’

New Delhi: A woman walks past closed shops at Khan Market in New Delhi on Friday. Confederation of All India Traders (CAIT) has announced a 48-hours bandh in Delhi on February 2nd and 3rd against MCD's sealing drive. PTI Photo by Vijay Verma (PTI2_2_2018_000026B)

सीएआईटी के मुताबिक, 48 घंटे के दिल्ली ट्रेड बंद में दिल्ली के 2 फरवरी को सात लाख कमर्शियल संस्थानों और 2,500 मार्केट्स ने शटडाउन में भागीदारी की.

खंडेलवाल ने कहा, ‘हमारे पास कोई विकल्प नहीं है. हमने दिल्ली में लगातार जारी सीलिंग के खिलाफ विरोध करने के लिए शटडाउन का आह्वान किया है. सीलिंग एमसीडी एक्ट, 1957 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है. करीब 25,000 मार्केट्स दो दिन तक बंद रहेंगे. ट्रेडर्स सीलिंग के खिलाफ हमारे प्रोटेस्ट मार्च में हिस्सा लेंगे. मौजूदा सीलिंग से राष्ट्रीय राजधानी में कारोबार खत्म हो जाएगा.’ दो दिन के बंद से करीब 1,800 करोड़ रुपए का नुकसान होने की आशंका है, इससे सरकार को करीब 150 करोड़ रुपए की राजस्व हानि हो सकती है.

ट्रेडर्स के बंद का दिल्ली में स्टूडेंट्स पर बुरा असर पड़ा है. बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थानों ने दो दिन के लिए अपने शटर बंद कर दिए हैं.

साउथ दिल्ली के एक कोचिंग संस्थान विद्यांजलि ने कहा, ‘दिल्ली ट्रेड बंद के चलते मार्केट के हालात को देखते हुए हमने कक्षाएं टाल दी हैं. हमारा संस्थान दो दिन के लिए बंद है.’

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