S M L

आखिर सीलिंग को लेकर दिल्ली में क्यों चल रहा हाई-वॉल्टेज राजनीतिक ड्रामा?

पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी ने साफ कर दिया है कि दुकानदारों को नोटिस नहीं अब सीधे सीलिंग की जाएगी

Updated On: Jan 30, 2018 12:14 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

0
आखिर सीलिंग को लेकर दिल्ली में क्यों चल रहा हाई-वॉल्टेज राजनीतिक ड्रामा?

दिल्ली में चल रही सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में बीजेपी और आम आदमी पार्टी में सवाल-जवाब का दौर शुरू हो गया है. सीलिंग की कार्रवाई को राजनीतिक दलों ने अब भुनाना भी शुरू कर दिया है. मंगलवार सुबह से ही दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के घर पर हाई-वॉल्टेज राजनीतिक ड्रामा चल रहा है. इस हाई-वाल्टेज ड्रामा में दिल्ली के सभी बीजेपी सांसद और तीनों मेयर भी शामिल हैं.

पिछले दिनों ही सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में कारोबारियों का दिल्ली बंद काफी असरदार रहा था. कारोबारियों ने हाथ में कटोरा लेकर दिल्ली की सड़कों पर उतर कर सीलिंग की कार्रवाई का जमकर विरोध किया था.

सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देश पर पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में सीलिंग की कार्रवाई चल रही है. इस कार्रवाई को लेकर दिल्ली के कारोबारियों में काफी आक्रोश है. दिल्ली के पॉश इलाकों से शुरू हुई सीलिंग की यह कार्रवाई अब दिल्ली के दूसरे इलाकों में भी शुरू कर दी गई है.

मंगलवार सुबह अरविंद केजरीवाल के घर पर ही केजरीवाल और दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी के बीच मीडिया के सामने खूब बहस हुई. सीलिंग के मुद्दे पर बीजेपी सांसदों और अरविंद केजरीवाल के साथ यह बैठक चल रही थी. यह बैठक हल निकालने से बुलाई गई थी लेकिन, हंगामे और राजनीतिक नफा-नुकसान की भेंट चढ़ गई.

सीलिंग मामले में भी सियासत शुरू

sealing 3

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी के नेतृत्व में सासदों का एक प्रतिनिधिमंडल अरविंद केजरीवाल के घर पहुंचा था. अरविंद केजरीवाल ने बैठक में कहा कि दिल्ली में सीलिंग को लेकर सभी लोग परेशान हैं. हम सब मिल कर कुछ न कुछ उपाए निकाल लेंगे. लेकिन, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी दिल्ली की 351 सड़कों का मुद्दा उछाल कर अरविंद केजरीवाल से सवाल-जवाब करना शुरू कर दिया. इसके बाद दोनो पक्षों में जमकर बहस शुरू हुई.

गौरतलब है कि बीजेपी इस मीटिंग को कवर करने के लिए मीडिया को पहले से ही आमंत्रित कर रखा था. अरविंद केजरीवाल को जब इस बात की भनक लगी तो उन्होंने भी एक चाल चल दी.

मंगलवार सुबह मीडिया के सामने अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘हमने दिल्ली के एलजी अनिल बैजल को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें कहा गया है कि बीजपी के रविन्द्र गुप्ता ने हमको एक पत्र लिखा है. इस पत्र में कहा गया है कि सीलिंग के मुद्दे पर मनोज तिवारी जी के नेतृत्व में दिल्ली बीजपी के सभी सांसद, सभी विधायक, सभी मेयर मेरे आवास पर आने वाले हैं. चूंकि यह मामला सीधे-सीधे आपके अधिकार क्षेत्र से जुड़ा हुआ है इसलिए हम सुबह 9.30 बजे इन लोगों को और आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों और पार्षदों को लेकर आपस में मिलेंगे.

कुलममिलाकर दिल्ली में हो रही सीलिंग की कार्रवाई को राजनीतिक दलों द्वारा साधने की भी कवायद एक बार फिर से शुरू हो गई है. दिल्ली की तीन बड़ी राजनीतिक पार्टियां आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी व्यापारियों को लामबंदी करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती.

सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देश पर पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में सीलिंग की कार्रवाई चल रही है. इस कार्रवाई को लेकर दिल्ली के कारोबारियों में काफी आक्रोश है. राजनीतिक दलों के द्वारा भी अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे को भुनाने का प्रयास भी तेज हो गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट की आड़ में प्रवधानों का उल्लंघन

sealing 1

दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी, एमसीडी की सत्ता पर काबिज बीजेपी और कांग्रेस पार्टी भी दिल्ली में चल रहे सीलिंग की कार्रवाई का विरोध करते हुए नजर आ रहे हैं.

कारोबारियों के संगठन (कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) कैट का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की आड़ में दिल्ली नगर निगम 1957 के मूलभूत प्रावधानों का उल्लंघन कर रहा है. सीलिंग के नाम पर एमसीडी द्वारा दिल्ली के कारोबारियों को बेवजह परेशान किया जा रहा है.

कनॉट प्लेस, मेहरचंद मार्केट, ग्रीन पार्क, हौजखास, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश, डिफेंस कॉलोनी, खान मार्केट, करोलबाग, पहाड़गंज केशवपुरम सहित दिल्ली के कई इलाकों में सीलिंग की कार्रवाई को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. ये वैसे इलाके हैं, जहां पर व्यापारियों के द्वारा राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में सबसे ज्यादा और मोटी रकम मिलती है.

दिल्ली में सीलिंग की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी के आदेश पर की जा रही है. पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी ने साफ कर दिया है कि दुकानदारों को नोटिस नहीं अब सीधे सीलिंग की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मॉनिटरिंग कमेटी ने इससे पहले दिल्ली के तीनों नगर निगमों के आयुक्त, डीडीए और अन्य एजेंसियों के साथ बैठक की थी.

2019 के चुनावों के लिए मुद्दे को भुनाने की कोशिश

Traders call for Delhi bandh

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी जहां डिफेंसिव लग रही है, वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को भुनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली में एक बड़ा तबका व्यापारी वर्ग से ताल्लुक रखता है.

दूसरी तरफ एमसीडी लगातार कहता रहा है कि केंद्र सरकार से मिल कर समाधान निकालने की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सीलिंग को लेकर मॉनिटरिंग कमेटी किसी भी तरह की ढील नहीं दे रही है. हर दिन दिल्ली के किसी न किसी एक इलाके में सीलिंग की कार्रवाई हो रही है.

दिल्ली एमसीडी को पुराने समय से कवर कर रहे कुछ पत्रकारों का मानना है कि बिगड़े हालात कहीं न कहीं एमसीडी की देन हैं. 2007 में एमसीडी ने दिल्ली के दुकानदारों से कनवर्जन चार्ज वसूलना शुरू किया था. 2007 में एमसीडी ने कनवर्जन चार्ज के रूप में 550 करोड़ रुपए वसूले थे.

बाद में एमसीडी ने दुकानदारों के साथ मनमानी रूप से अभियान चला कर पेनाल्टी लगाकर पैसा वसूलने का काम शुरू कर दिया. कनवर्जन चार्ज वसूले जाने के बावजूद बाजार के रखरखाव के लिए एमसीडी की तरफ से किसी भी तरह का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया.

दिल्ली में सीलिंग की कार्रवाई बेशक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही है. लेकिन, इसमें सबसे ज्यादा भद्द एमसीडी की पिट रही है. एमसीडी लगातार दलील दे रही है कि हम बिना नोटिस के सीलिंग की कार्रवाई नहीं करेंगे, इसके बावजूद सीलिंग की कार्रवाई रुक नहीं रही है. दिल्ली की सभी राजनीतिक पार्टियां इस वक्त कारोबारियों के साथ सुर में सुर मिला कर राजनीतिक रोटियां सेक रही हैं. लेकिन, इलाज कोई भी बताने से बच रही हैं. कहीं न कहीं दिल्ली में सीलिंग की कार्रवाई के पीछे इन राजनीतिक दलों का ही हाथ रहा है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi