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दिल्ला पुलिस ने अदालत से कहा, नियमों के तहत दी जाती है लाउडस्पीकरों को अनुमति

पुलिस ने पीठ के सामने हलफनामा दाखिल कर कहा कि अगर याचिकाकर्ता लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध चाहते हैं तो उन्हें इस नियम को चुनौती देना चाहिए

Bhasha Updated On: Jul 22, 2018 05:33 PM IST

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दिल्ला पुलिस ने अदालत से कहा, नियमों के तहत दी जाती है लाउडस्पीकरों को अनुमति

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल की इजाजत ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत दी जाती है. जिसमें इसके इस्तेमाल के नियमों में समय और ध्वनि स्तर जैसी पाबंदियां हैं.

दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहक चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरि शंकर की पीठ के सामने दिल्ली पुलिस ने हलफनामा दाखिल कर यह बात कही. पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है. जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में धार्मिक कार्यक्रमों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है.

दिल्ली सरकार के अलावा स्थायी अधिवक्ता गौतम नारायण ने अदालत को बताया कि ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के तहत लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल की अनुमति है. नियम के मुताबिक यह केवल इसके इस्तेमाल को नियमित या सीमित करने की शर्तें तय करता है .

पुलिस ने पीठ के सामने हलफनामा दाखिल कर कहा कि अगर याचिकाकर्ता संजीव कुमार लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध चाहते हैं. तो उन्हें इस नियम को चुनौती देना चाहिए. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की है. अदालत ने याचिकाकर्ता से दिल्ली पुलिस के हलफनामे पर इस तारीख तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है.

सामाजिक कार्यकर्ता संजीव कुमार की याचिका में कहा गया है कि लाउडस्पीकर कभी किसी धार्मिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था. क्योंकि यह 1924 में अस्तित्व में आया है. जबकि धार्मिक कार्यकर्म इसस कहीं पहले से मनाए जाते रहे हैं.

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