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दिल्ली मेट्रो के कर्मचारी नाराज हैं...उन्हें मना पाएगी केंद्र सरकार?

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) और नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारियों के बीच सुलह के कुछ आसार नजर आने लगे हैं.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jun 28, 2018 05:54 PM IST

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दिल्ली मेट्रो के कर्मचारी नाराज हैं...उन्हें मना पाएगी केंद्र सरकार?

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) और नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारियों के बीच सुलह के कुछ आसार नजर आने लगे हैं. कर्मचारियों के द्वारा अपनी मांगें सौंपने के बाद डीएमआरसी और शहरी विकास मंत्रालय के रवैये में भी कुछ बदलाव नजर आ रहा है. ऐसी खबर मिल रही है कि शहरी विकास मंत्रालय ने कर्मचारियों की ज्यादातर मांगें मानने पर विचार करने के लिए कुछ और वक्त मांगा है. खासकर वेतन विसंगतियों को लेकर मंत्रालय की तरफ से अश्वासन दिया गया है कि इसको जल्द ही दूर कर लिया जाएगा.

लेकिन, इसके बावजूद नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारी संघ लिखित अश्वासन पर अड़ा है. अभी तक न ही डीएमआरसी और न ही कर्मचारी संघ की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है. बता दें कि नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारियों की दी मुख्य मांगों में पहली मांग है, डीएमआरसी कर्मचारी परिषद को कर्मचारी संघ में तब्दील करा कर पंजीकरण कराना. कर्मचारी संघ में तब्दील होने के बाद यह एक संवैधानिक समूह बन जाएगा. जबकि इंडस्ट्रियल डियरनेस अलाउंस (आईडीए) लागू करना इनकी दूसरी प्रमुख मांग है.

बता दें कि नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारियों में ट्रेन ऑपरेटर्स, टेकनिशियन, मेंटेनेंस स्टाफ, ऑपरेशन स्टाफ, स्टेशन कंट्रोलर सहित कई अन्य कर्मचारी शामिल होते हैं. मेट्रो के परिचालन में इन कर्मचारियों की भूमिका काफी अहम होती है. दिल्ली की लाइफ लाइन कही जाने वाली मेट्रो सेवा को चलाने में इनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण है.

दिल्ली मेट्रो के 9 हजार नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारियों ने 30 जून से हड़ताल पर जाने की धमकी देकर डीएमआरसी की मुश्किलें बढ़ा रखी है. बीते 20 दिनों से डीएमआरसी के नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारी दिल्ली के अलग-अलग मेट्रो स्टेशनों पर बाजू में काली पट्टी बांध कर सांकेतिक चेतावनी दे रहे हैं.

पिछले साल जुलाई महीने में भी डीएमआरसी के नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल पर जाने का ऐलान किया था, लेकिन डीएमआरसी और नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारियों के बीच समझौते के चलते यह हड़ताल कुछ दिनों के लिए टल गई थी.

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अपनी 10 सूत्री मांगों के ज्ञापन में मेट्रो कर्मचारियों ने मेट्रो मैनेजमेंट पर पिछले साल हुए समझौते को लेकर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है. साथ ही मैनेजमेंट की तरफ से गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के साथ वेतन में भेदभाव और शोषण की बात कही है.

दिल्ली मेट्रो के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर बीते 19 जून से ही हाथ पर काली पट्टी बांध सांकेतिक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. मेट्रो प्रबंधन की ओर से कोई जवाब न मिलने से कर्मचारियों ने सभी सुविधाओं को छोड़ने और अपनी ड्यूटी के दौरान भूखा रहने का फैसला लिया है. इस दौरान कर्मचारियों ने अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन भी किया. मांगों के लेकर कर्मचारियों ने 29 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और 30 जून से अनिश्चितकालीन सेवा हड़ताल पर जाने का फैसला कर रखा है.

नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारी यूनियन के जनरल सेक्रटरी महावीर प्रसाद के मुताबिक कर्मचारी पिछले लगभग 10 सालों से एक ही सैलरी स्ट्रक्चर पर काम कर रहे हैं. पहले सर्विस रिकॉर्ड को देखते हुए हर पांच साल में प्रमोशन दिया जाता था, जो अब बंद कर दिए गए हैं. कर्मचारियों को ग्रेड 13 हजार 500 से 25 हजार 520 को ग्रेड 14 हजार से 26 हजार 950 रुपए के साथ देने का वादा किया गया था. साथ ही नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारियों के लिए 20 हजार 600 से 46 हजार 500 के स्तर की सैलरी की मांग भी अभी तक पूरी नहीं की गई है.

डीएमआरसी स्टाफ कांउसिल के सचिव रवि भारद्वाज ने मीडिया से बात करते हुए कहते हैं, ‘हम पिछले कई दिनों से बाजू पर काली पट्टी बांधकर विरोध कर रहे हैं. हमने विरोध के दौरान खाना-पीना भी बंद कर दिया है. हमारे साथी यमुना बैंक, बदरपुर, कुतुब मीनार, विश्वविद्यालय, ओखला, मुंडका, द्वारका और पंजाबी बाग वेस्ट मेट्रो स्टेशनों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. हमलोग मांग पूरी नहीं होने पर हड़ताल पर भी जाने के नारे लगा रहे हैं. हमलोग इस बात का भी ध्यान रख रहे हैं कि प्रदर्शन के दौरान यात्रियों को कोई दिक्कत न हो, लेकिन अगर 29 जून तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो हमलोग 30 जून से पूरी तरह से हड़ताल पर चले जाएंगे.’

वहीं दूसरी तरफ डीएमआरसी के प्रवक्ता का कहना है कि नॉन एग्जिक्यूटिव कर्मचारी हड़ताल पर न जाएं इसके लिए डीएमआरसी प्रबंघन लगातार कोशिशें कर रहा है. कर्मचारियों को एचआर संबंधी कुछ समस्याएं हैं. हमलोग प्रयास कर रहे हैं कि इसे जल्दी से सुलझा लें.

मेट्रो कर्मचारियों की 10 सूत्री मांगें

1. दिल्ली मेट्रो रेल निगम कर्मचारी यूनियन को रिकॉग्निशन दिया जाए और कर्मचारी परिषद का विलय किया जाए क्योंकि एग्रीमेंट के 11 महीने बाद भी बाहरी हस्तक्षेप को छोड़कर जो यूनियन को सभी अधिकार दिए जाने थे पर नहीं दिए गए.

2. 23 जुलाई 2017 के समझौते में वेतनमान सुधार संबंधी समझौते को प्वाइंट टू प्वाइंट वैसे ही लागू किया जाए जैसा कि 15 मई 2018 को MoM में परिषद के द्वारा प्रस्तावित किया गया है और 1 जुलाई से 2015 से एरियर दिया जाए.

3. गैर कार्यपालक कर्मचारियों का तीसरे IDA वेतन संसोधन को परिषद द्वारा जमा किए गए Annexure-A के अनुसार किया जाए.

4. सभी वर्तमान भत्तों का रिवीजन और नए भत्तों का समावेश Annexure-B के अनुसार किया जाए.

5. 23 जुलाई 2017 के समझौते के अनुसार गैर कार्यपालक कर्मचारियों के लिए परिषद द्वारा जमा ट्रांसफर पॉलिसी लागू किया जाए.

6. स्टेशन कर्मियों के काम की सीमा, आराम का समय निर्धारण, संरक्षा के साथ रेवेन्यू का काम करने के लिए भत्ते से संबंधित SOP निर्देश परिषद सचिव द्वारा 23 सितंबर 2017 के अनुसार बनाए जाएं.

7. सभी मेट्रो कर्मचारियों के लिए बेनेवोलेंट फंड की पॉलिसी जल्द से जल्द परिषद के साथ हुई बातचीत के अनुसार बनाई जाए.

8. 31 मई 2018 और बीते सालों में मेट्रो कर्मचारियों के ऊपर हुए कई हमलों को सज्ञान में लेते हुए कार्यस्थल पर कर्मचारियों की संरक्षा, सुरक्षा और सम्मान के लिए जल्द से जल्द उचित गाइडलाइन बनाई जाए और CISF कर्मियों का मेट्रो परिसर में कार्य करने की गाइडलाइंस बनाए जाए.

9. PDR नियम और उसके सभी प्रभावों को सस्पेंड कर इसे पूरी तरह से खत्म किया जाए और D&AR में टर्मिनेशन के लिए Extreme Condition की सूची बनाई जाए ताकि छोटी गलतियों पर भी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने, तानाशाही और भय का वातावरण खत्म हो.

10. छोटी-छोटी गलतियों पर नौकरी से निकाले गए कर्मियों की सजा को रिव्यू किया जाए और उनकी सजा कम करके उन्हें नौकरी में वापस लिया जाए.

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कुलमिलाकर डीएमआरसी पिछले लगभग एक साल से चर्चा में है. करीब आठ महीने पहले ही मेट्रो के यात्री किराए में बढ़ोतरी गई थी. इसका परिणाम यह हुआ कि किराया वृद्धि के आठ महीने बाद दिल्ली मेट्रो में यात्रा करने वालों की संख्या काफी कमी देखी गई. राजधानी की लाइफ लाइन कही जाने वाली मेट्रो में इस साल पिछले साल के मुकाबले 5 लाख सवारियों की कमी देखी गई है.

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, भीषण गर्मी में भी मेट्रो यात्रियों को अपनी तरफ खींचने में नाकाम रही है. मार्च, अप्रैल और मई में 2017 के मुकाबले यात्रियों की संख्या में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इसे एक चिंता का विषय बताते हुए दिल्ली के ट्रांसपोर्ट मंत्री कैलाश गहलोत ने यात्रियों की संख्या में कमी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया था.

इस साल मार्च और अप्रैल के महीने में 22 और 22.67 लाख लोगों ने रोजाना दिल्ली मेट्रो के पांच कॉरिडोर (येलो, ब्लू, ग्रीन, वॉयलेट और रेड लाइन) पर यात्रा की. मई में यह संख्या 22.5 लाख रही. पिछले साल इसी दौरान दिल्ली मेट्रो में 27.6 लाख (मार्च), 27.5 लाख (अप्रैल) और 26.5 लाख (मई) लोगों ने यात्रा की थी.

पिछले दिनों ही संस्थागत नैतिकता के विषय पर एक गैर लाभकारी संगठन के स्वतंत्र अध्ययन में दिल्ली मेट्रो की तारीफ की गई थी और कहा गया था डीएमआरसी नेतृत्व, समयबद्धता और सुरक्षा मानकों के क्षेत्र में अच्छा काम किया है.

रिसर्च में पाया गया था कि डीएमआरसी की इस सफलता के प्राथमिक कारणों में एक नीति संहिता और मूल्यों का क्रियान्वयन रहा है. डीएमआरसी ने एक बयान में भी कहा था, 'दिल्ली मेट्रो में करीब 12 हजार कर्मचारी हैं और उसने अपने कर्मचारियों के लिए मूल्य और नीति संहिता को लागू किया है.'

डीएमआरसी फिलहाल 24.82 किलोमीटर लंबे जनकपुरी-कालकाजी मंदिर मार्ग समेत 277 किलोमीटर पर मेट्रो ट्रेनों का संचालन करता है.

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