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घंटों ठप रही दिल्ली की लाइफ लाइन मेट्रो ट्रेन, अपनी गलतियों से कब सबक लेगा DMRC?

दिल्ली मेट्रो में रोजाना 27 से 28 लाख यात्री यात्रा करते हैं. ऐसे में मेट्रो का आवागमन चंद मिनटों के लिए ही रुक जाए तो यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है

Updated On: Dec 06, 2018 10:19 AM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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घंटों ठप रही दिल्ली की लाइफ लाइन मेट्रो ट्रेन, अपनी गलतियों से कब सबक लेगा DMRC?

बुधवार को दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन में तकनीकी खराबी के कारण घंटों सेवाएं बाधित रहीं. हजारों यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा. पहले रुक- रुक कर फिर पूरी तरह से मेट्रो सेवा बाधित हो गई, जिसके कारण पूरी ब्लू लाइन पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हो गया. प्लैटफॉर्म पर या मेट्रो में घंटों से इंतजार कर रहे यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि बुधवार को वह अगर किसी तरह घर पहुंच भी जाते हैं, लेकिन गुरुवार को सुबह का क्या होगा? दिल्ली मेट्रो का अगर यही हाल रहा तो सुबह किसी और साधन से ऑफिस पहुंचना पड़ेगा.

दिल्ली मेट्रो में रोजाना यात्रा करने वाले इन यात्रियों की चिंता जायज भी थी, क्योंकि बुधवार को ऑफिस से लौटते वक्त मिनटों का सफर घंटों में तय हो रहा था. अगर गुरुवार को भी यही हाल होता  तो ऑफिस से गैरहाजिर कर दिए जाएंगे.

दिल्ली मेट्रो में रोजाना 27 से 28 लाख यात्री यात्रा करते हैं. ऐसे में मेट्रो का आवागमन चंद मिनटों के लिए ही रुक जाए तो यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. बुधवार को तो हद ही हो गई जब यात्रियों को एक, दो घंटे नहीं बल्कि 3 से चार घंटों तक प्लैटफॉर्म से लेकर ट्रेन की बॉगियों में इंतजार करना पड़ा. इस दौरान कई लोगों का तो मोबाइल भी जवाब दे गया. बुधवार को मेट्रो में फंसे हजारों लोग जैसे तैसे अपने घर पहुंच गए लेकिन गुरुवार को भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए. गुरुवाह सुबह मेट्रो 10-15 मिनट इंतजार करने के बाद आ रही थी.  इतना ही नहीं इस दौरान ट्रेन की स्पीड भी काफी धीमी थी.

क्यों हुई मेट्रो सेवाएं बाधित?

मेट्रो में सफर कर रहे एक मेट्रो कर्मचारी का कहना था कि बुधावार को सर्वर डाउन होने की वजह से यह परेशानी आई. गुरुवार सुबह भी कोई गारंटी नहीं है कि यह परेशानी ठीक हो जाए? जबकि, मेट्रो की तरफ से लगातार कहा जा रहा था कि यह परेशानी थोड़ी देर में ठीक कर ली जाएगी.

DMRC

गाजियाबाद और नोएडा को वेस्ट दिल्ली के द्वारका से जोड़ने वाली लाइन में पहले तो करोल बाग-द्वारका सेक्शन के बीच फिर दोपहर तीन बजे पूरी लाइन पर सिग्नल फेल हो गया. ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) में ब्लू लाइन (द्वारका सेक्शन -21 से नोएडा सिटी सेंटर / वैशाली) पर सिग्नलिंग और ऑटोमेटिक ट्रेन कंट्रोल सिस्टम का व्यू और कंट्रोल करोल बाग और द्वारका सेक्शन के बीच संपर्क बुधवार को टूट गया था. नतीजतन, ट्रेनों को स्थानीय रूप से नियंत्रित किया जा रहा था. कुछ देर किसी तरह मेट्रो के कर्मचारियों ने काम चलाया लेकिन कुछ देर बाद यह व्यवस्था भी पूरी तरह से विफल हो गई.

दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन पर 50 मेट्रो स्टेशन हैं. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) का 50 किलोमीटर का सबसे बड़ा ट्रेन रूट ब्लू लाइन रूट है, जो नोएडा सिटी सेंटर और पूर्वी दिल्ली होते हुए गाजियाबाद के वैशाली को द्वारका उपनगर से जोड़ता है.

पिछले कुछ महीनों से कभी बारिश तो कभी तकनीकी खराबी से दिल्ली मेट्रो को लगातार दो-चार होना पड़ रहा है. बीते 29 नवंबर को भी तकनीकी खराबी के कारण दिलशाद गार्डन-रिठाला लाइन पर मेट्रो का परिचालन प्रभावित हुआ था.

आखिर कब लेगी सबक?

सुबह और शाम का समय मेट्रो के लिए सबसे व्यस्त समय माना जाता है. ऐसे में मेट्रो में आई गड़बड़ी के कारण यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कुछ दिन पहले भी गाजियाबाद और नोएडा से द्वारका जाने वाली ब्लू लाइन में खराबी आ जाने से हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था.

delhi metro

कभी बारिश के मौसम में मेट्रो सेवा बाधित होती है तो कभी तकनीकी खराबी का बहाना बनाया जाता है तो कभी कर्मचारियों और सीआईएसएफ के बीच लड़ाई के कारण मेट्रो सेवा प्रभावित हो जाती है. खासकर साल 2018 में मेट्रो की सबसे लंबी और सबसे व्यस्त रहने वाली ब्लू लाइन पूरे दिन लेट लतीफी और तकनीकी कारण से जूझती रही.

बुधवार को भी दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों पर लोगों को दो से चार घंटों तक खड़ा रहना पड़ा है. हर बार मेट्रो की तरफ से अलग-अलग तरह का बहाना बनया जाता है. कभी बारिश की वजह से पीरियॉडिक मेंटेनेंस पूरा नहीं होने का तो कभी सिग्नल खराब होने का बहाना बनाया जाता है.

बुधवार को मेट्रो का इंतजार कर रहे यात्रियों ने बताया कि ट्रेनें कभी 2 घंटे तो कभी कहीं तीन घंटे के अंतराल पर आ रही थीं और डिब्बों में खचाखच यात्री भरे हुए थे. लखनऊ से दिल्ली धूमने आए एक व्यक्ति जो पेशे से डॉक्टर हैं, फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'मेरा दिल्ली मेट्रो में सफर करने का अनुभव वाकई में बहुत खराब रहा. मैं आनंद विहार से बस पकड़ कर लखनऊ जाने के लिए निकला था. मैं 5 बजे मंडी हाउस मेट्रो में इन किया और रात को 9 बजे वैशाली मेट्रो से बाहर निकल रहा हूं. मेरी बस 7 बजे की थी वह छूट गई है. पैसा तो गया ही अब सुबह अस्पताल कैसे जाएंगे इसको लेकर रातभर नींद नहीं आएगी.’

दिल्ली में मेट्रो में 5 लाख सवारियों की कमी

राजधानी की लाइफ लाइन कही जाने वाली मेट्रो में इस साल पिछले साल के मुकाबले 5 लाख सवारियों की कमी देखी गई है और अब मेट्रो की लेटलतीफी और तकनीकी खराबियों ने भी यात्रियों को रुलाना शुरू कर दिया है. DMRC फिलहाल लगभग 300 किलोमीटर पर मेट्रो ट्रेनों का संचालन करता है.

कुल मिलाकर डीएमआरसी पिछले लगभग एक साल से चर्चा में है. 10-11 महीने पहले भी मेट्रो के यात्री किराए में बढ़ोतरी के समय डीएमआरसी चर्चा में रही थी. इसका परिणाम यह हुआ कि किराया वृद्धि के इतने महीने बाद दिल्ली मेट्रो में यात्रा करने वालों की संख्या काफी कमी हो गई है. ऐसे में जानकारों का मानना है कि दिल्ली मेट्रो की जो बची-खुची इमेज है उसको बुधवार जैसी घटना और खराब कर सकती है?

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