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दुरुपयोग न हो इसलिए पानी, टॉयलेट के लिए लेते हैं मामूली शुल्क: मेट्रो

डीएमआरसी ने दिल्ली हाईकोर्ट को दिए हलफनामे में कहा, अगर कोई ऐसा शख्स है जो पीने के पानी या शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए भुगतान करने में असमर्थ है और वह स्टेशन स्टाफ से संपर्क करता है तो उसे यह सुविधाएं मुफ्त मुहैया कराई जाएंगी

FP Staff Updated On: May 13, 2018 12:52 PM IST

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दुरुपयोग न हो इसलिए पानी, टॉयलेट के लिए लेते हैं मामूली शुल्क: मेट्रो

दिल्ली मेट्रो ने हाईकोर्ट को बताया है कि स्टेशनों पर पीने के पानी और शौचालय का दुरुपोग रोकने के लिए इन सुविधाओं के लिए मामूली शुल्क लिया जाता है.

दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने यह भी कहा कि अगर कोई ऐसा शख्स है जो पीने के पानी या शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए भुगतान करने में असमर्थ है और वह स्टेशन स्टाफ से संपर्क करता है तो उसे यह सुविधाएं निशुल्क (मुफ्त) मुहैया कराई जाएंगी.

डीएमआरसी ने जस्टिस रविंद्र भट्ट और ए के चावला की बेंच के सामने दिए हलफनामे में यह बातें कही हैं. यह बेंच एकल जज के आदेश के खिलाफ एक वकील की अपील पर सुनवाई कर रही है. एकल जज ने कहा था कि मेट्रो में यात्री को निशुल्क पेयजल का अधिकार नहीं है.

उन्होंने कहा था कि व्यक्ति को पेयजल का अधिकार तो है लेकिन निशुल्क नहीं.

यह आदेश वकील कुश कालरा की याचिका पर आया था जिसमें उन्होंने डीएमआरसी को अपने स्टेशनों पर निशुल्क पेयजल और शौचालय मुहैया कराने के बारे में निर्देश मांगे थे.

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट

वकील कुश शर्मा के जरिए दायर याचिका में कालरा ने आरोप लगाया है कि मेट्रो के कई स्टेशनों पर कूड़ेदानों की भी कमी है.

याचिकाकर्ता के दावों को खारिज करते हुए मेट्रो ने अपने हफलनामे में कहा कि इसने अपने स्टेशनों पर जल एटीएम लगाए हैं जो 2 रुपए प्रति गिलास की दर से यात्रियों को पानी मुहैया कराते हैं.

पीठ ने पिछली सुनवाई पर मेट्रो की खिंचाई करते हुए कहा था कि क्या आपमें से इंसानी समस्याओं की समझ चली गई है.

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