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पेड़ अगर मतदाता होते तो नहीं काटे जाते : हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने कहा- दिल्ली में काटे गए पेड़ों की संख्या और उससे मिली लकड़ी के इस्तेमाल के बारे में सीएजी ऑडिट करे

Bhasha Updated On: Mar 06, 2017 11:12 PM IST

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पेड़ अगर मतदाता होते तो नहीं काटे जाते : हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में अतिक्रमण करने वालों या विभिन्न परियोजनाओं के अधिकार देने से वृक्षों के काटे जाने का कैग से ऑडिट कराया जाए.

जस्टिस बदर दुरेज अहमद और जस्टिस आशुतोष कुमार की बेंच ने कहा, ‘अगर वृक्षों को मतदाता सूची में वोटर के तौर पर शामिल कर लिया जाए तो उन्हें नहीं काटा जाएगा.’ उन्हें बताया गया कि दिल्ली मेट्रो जैसी परियोजनाओं के लिए स्थानीय अधिकारी बड़ी संख्या में पेड़ों को काट रहे हैं या असोला अभ्यारण्य जैसे स्थानों पर अतिक्रमणकारी पेड़ काट रहे हैं.

वायु प्रदूषण और इसके कारणों पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने के दौरान हाई कोर्ट ने ये सुझाव दिए. पीआईएल में कहा गया कि ये भी एक कारण है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में वन और हरित क्षेत्र में आई कमी है.

बेंच का यह भी मानना था कि दिल्ली में काटे गए पेड़ों की संख्या और उससे मिली लकड़ी के इस्तेमाल के बारे में सीएजी ऑडिट करे.

बेंच ने कहा, ‘यह तो आमदनी है जिसका लेखा-जोखा रखना होगा इसलिए कैग से ऑडिट कराने की आवश्यकता है.’ हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार असोला.. भाटी अभयारण्य में अतिक्रमण का पता करने और उन्हें हटाने के लिए पहले से तय समय सीमा का पालन नहीं कर सकी है.

Delhi Greenery

इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ वकील कैलाश वासुदेव ने कहा कि सरकार की तरफ से कार्रवाई नहीं होने से वन क्षेत्र में कमी आई है.

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने उनके तर्कों का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में वन क्षेत्र कम नहीं हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि महानगर में हरित क्षेत्र में वृद्धि हुई है.

हाई कोर्ट की बेंच ने अब इस मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 9 मार्च को तय की है.

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