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शादी के विवादों को सुलझाने के लिए सुलह की प्रक्रिया जरूरी: हाई कोर्ट

अदालत ने कहा कि सुलह सहमति प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. ताकि विवाह और पारिवारिक विवाद जैसे मामलों का निपटारा त्वरित गति से हो सके

Bhasha Updated On: Nov 19, 2017 03:55 PM IST

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शादी के विवादों को सुलझाने के लिए सुलह की प्रक्रिया जरूरी: हाई कोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि दंपतियों के बीच मामले सुलझाने के लिए सुलह सहमति प्रक्रिया की जरूरत है. कोर्ट वैवाहिक मामले सुलझाने के लिए मध्यस्थता की भूमिका को रेखांकित कर रहा था.

अदालत ने कहा है कि संवैधानिक नियम वैवाहिक विवादों को तेजी से निपटाने और वादियों को तुरंत न्याय दिलाने के लिए हैं. यहां की अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं. जिसके कारण अदालतें पहले ही बोझ से दबी हैं. यही वजह है कि इन मामलों को तेजी से निपटाने में मुश्किलें आती हैं.

जस्टिस पी. एस. तेजी ने कहा, ‘चूंकि वैवाहिक विवाद मुख्य रूप से पति-पत्नी के बीच होते हैं. चूंकि मामलों में निजी मसले शामिल होते हैं इसलिए दोनों के बीच समझौता कराने में सुलह सहमति प्रक्रिया की जरूरत है.

इन दिनों, विवाद सुलझाने में खास तौर पर वैवाहिक विवादों में मध्यस्थता काफी अहम भूमिका निभाती है. इसके अच्छे परिणाम भी सामने आए हैं.'

सहमति से विवाद सुलझे यह बेहतर तरीका है  

अदालत ने साल 2003 में एक महिला की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की. प्राथमिकी में महिला ने कहा था कि शादी के दौरान मिले दहेज को लेकर उसके सास-ससुर नाखुश थे और उसका पति उस पर अत्याचार करता था.

अदालत ने इस मामले में पुरुष की ओर से प्राथमिकी खत्म करने की याचिका को ये कहते हुए स्वीकार कर लिया कि उन्होंने आपसी सुलह से मामले को सुलझा लिया है. सभी विवाद हल हो गए हैं. महिला ने भी अदालत से कहा कि अगर प्राथमिकी रद्द होती है तो उसमें उसे कोई आपत्ति नहीं है.

समझौते के अनुसार पुरुष और महिला दोनों आपसी सहमति से तलाक के लिए सहमत हो गए हैं और पुरुष महिला को 4.88 लाख रुपए देगा.

अदालत ने कहा कि भारत की अदालतें सामान्य तौर पर यह चाहती हैं कि सुलह सहमति प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. ताकि विवाह और पारिवारिक विवाद जैसे मामलों का निपटारा त्वरित गति से हो सके.

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