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भीमा कोरेगांव केस: मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा की नजरबंदी खत्म

दिल्ली हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा की घर में ही नजरबंदी खत्म कर दी है. हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव मामले में सोशल एक्टिविस्ट नवलखा को ट्रांजिट रिमांड पर रिहा किया है.

Updated On: Oct 01, 2018 05:33 PM IST

FP Staff

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भीमा कोरेगांव केस: मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा की नजरबंदी खत्म

दिल्ली हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा की नजरबंदी खत्म कर दी है. पुलिस, नवलखा की ट्रांजिट डिमांड की मांग कर रही थी. लेकिन हाईकोर्ट ने ट्रांजिट डिमांड की याचिका को खारिज कर दिया.

दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने ये आदेश सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद दिया है जिसमें नवलखा के साथ चार अन्य को अदालत ने चार सप्ताह के लिए और नजरबंद रखने का आदेश दिया था. वहीं अब हाईकोर्ट ने नवलखा की नजरबंदी खत्म कर दी. कोर्ट ने कहा कि उनकी हिरासत 24 घंटे को पार कर गई और इसकी अनुमति नहीं है.

पिछले महीने दिल्ली में नवलखा को कई शहरों में खोज के बाद पुणे पुलिस के जरिए गिरफ्तार किया गया था. वहीं शीर्ष अदालत ने 29 सितंबर को पांचों कार्यकर्ताओं को फौरन रिहा करने की एक याचिका खारिज करते हुए कहा था कि महज असमति वाले विचारों या राजनीतिक विचारधारा में अंतर को लेकर गिरफ्तार किए जाने का यह मामला नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि आरोपी और चार हफ्ते तक नजरबंद रहेंगे, जिस दौरान उन्हें उपयुक्त अदालत में कानूनी उपाय का सहारा लेने की आजादी है. उपयुक्त अदालत मामले के गुण दोष पर विचार कर सकती है.

महाराष्ट्र पुलिस ने पिछले साल 31 दिसंबर को हुए एलगार परिषद सम्मेलन के बाद दर्ज की गई एक प्राथमिकी के सिलसिले में 28 अगस्त को इन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था. इस सम्मेलन के बाद राज्य के कोरेगांव - भीमा में हिंसा भड़की थी. इन पांच लोगों में तेलुगू कवि वरवर राव, मानवाधिकार कार्यकर्ता अरूण फरेरा और वेरनन गोंजाल्विस, मजदूर संघ कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता नवलखा शामिल थे.

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