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फेल बच्चों को पास कराने के लिए स्पेशल क्लास चलाएगी दिल्ली सरकार

67668 बच्चों को विश्वास ग्रुप के तहत पत्राचार की पढ़ाई कराई गई, जिनमें 64570 बच्चों ने परीक्षा दी लेकिन 62916 बच्चे फेल हो गए

Updated On: Aug 15, 2017 04:48 PM IST

FP Staff

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फेल बच्चों को पास कराने के लिए स्पेशल क्लास चलाएगी दिल्ली सरकार

दिल्ली में फेल हुए बच्चों के लिए केजरीवाल सरकार स्पेशल क्लास चलाएगी. इसकी घोषणा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने की.

छत्रसाल स्टेडियम में दिल्ली सरकार की ओर से आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गलत शिक्षा व्यवस्था की वजह से दिल्ली में हजारों बच्चों का भविष्य अधर में है.

फेल बच्चों की संख्या 60 हजार से ज्यादा है. केजरीवाल ने अपनी स्पीच में कहा कि दिल्ली सचिवालय के सामने सैकड़ों की तादाद में बच्चे धरना दे रहे थे जब उन बच्चों को अपने घर पर मिलने के लिए बुलाया तो पता चला कि ये बच्चे फेल हो गए हैं और उनका दाखिला किसी भी स्कूल में नहीं हो पा रहा है.

पत्राचार के माध्यम से पढ़ने वाले बच्चे हुए फेल

जब अधिकारियों से इसकी जानकारी ली तो पता चला कि नौवीं क्लास में जो बच्चे फेल हुए थे उन्हें पत्राचार के माध्यम से दसवीं का एक्जाम ये कहकर दिलाया गया कि उन्हें दसवीं पास करा दी जाएगी लेकिन असल में वो बच्चे न तो नौवीं पास हो पाए और न ही दसवीं.

केजरीवाल की इस घोषणा से पहले न्यूज 18 इंडिया ये मामला उठा चुका है. अपनी रिपोर्ट में न्यूज18 इंडिया ने खुलासा किया था कि दिल्ली में कैसे 60 हजार से ज्यादा बच्चों का भविष्य अंधकार में है. ये वो बच्चे हैं जिनका किसी भी स्कूल में एडमीशन नहीं हो पा रहा है और दाखिले के लिए दर-दर भटक रहे हैं.

दरअसल, पिछले साल दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नौवीं क्लास में लगभग एक लाख स्टूडेंट फेल हुए थे इनमें से लगभग 35 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स को स्कूल छोड़ना पड़ा.

67668 बच्चों को विश्वास ग्रुप के तहत पत्राचार की पढ़ाई कराई गई, जिनमें 64570 बच्चों ने परीक्षा दी लेकिन 62916 बच्चे फेल हो गए और सिर्फ 1654 स्टूडेंट ही पास हो पाए यानी रिजल्ट महज 2.56 फीसदी ही आया.

जानकारों का ये मानना है कि दिल्ली सरकार ने अपने स्कूलों के आंकड़ों को संवारने के लिए इन बच्चों को पत्राचार की पढ़ाई करवाई थी. लेकिन, पहले से ही पढ़ने में कमजोर बच्चों को अच्छे टीचर और अच्छी एजुकेशन की जरुरत थी लेकिन वो नहीं मिल पाने की वजह से वो बच्चे न तो नौंवी पास कर पाये और न ही दसवीं.

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