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दिल्ली सरकार ने सिख दंगा पीड़ितों का बिजली बिल किया माफ

इस फैसले से करीब 2,500 परिवारों को लाभ मिलेगा

Updated On: May 25, 2017 11:01 PM IST

Bhasha

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दिल्ली सरकार ने सिख दंगा पीड़ितों का बिजली बिल किया माफ

आम आदमी पार्टी ने चुनाव में सिख दंगों को इंसाफ दिलाने का वादा किया था. हालांकि चुनाव जीतने के बाद विपक्षी, दिल्ली सरकार पर अपने वादे से मुकरने के भी आरोप लगाते रहे हैं. दिल्ली सरकार ने सिख दंगों के पीड़ितों का बकाया बिजली बिल माफ करने की घोषणा की है.

उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को यह घोषणा की. सिसोदिया ने कहा, 'मंत्रिमंडल ने बुधवार को फैसला किया कि 1984 के सिख दंगों के दिल्ली में रहने वाले पीड़ितों का बकाया बिजली बिल माफ किया जाए. भविष्य में भी उन्हें 400 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर बिल में 50 फीसदी की छूट दी जाएगी.'

सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में पुनर्वास योजना के तहत बसाए गए अनेक पीड़ित परिवारों का बिजली बिल वर्षों से बकाया है और लंबे समय से वे सरकार से बिजली बिल माफ करने की मांग करते रहे हैं.

सिसोदिया ने कहा कि इनमें से अधिकतर पीड़ित या तो बेहद वृद्ध नागरिक हैं या विधवाएं हैं और ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां बिजली बिल पर रियायत लागू नहीं होती.

उन्होंने कहा, 'इस फैसले से करीब 2,500 परिवारों को लाभ मिलेगा.' सिसोदिया ने यह भी बताया कि अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए चलाई जा रही योजनाओं के तहत काम के दायरे को बढ़ाया गया है, क्योंकि अब तक इस मदद के लिए आवंटित पूरी राशि खर्च ही नहीं हो पाती थी.

इस मद में 23 तरह के कार्य जोड़ दिए गए हैं

अब तक इस मद में सिर्फ पांच तरह के कार्य निर्धारित थे, जिसमें सड़क निर्माण, शौचालय निर्माण और नालियों का निर्माण शामिल था. यहां तक कि यदि लोग इस मद से दूसरा कार्य करवाना भी चाहें तो वह संभव नहीं था.

सिसोदिया ने कहा, 'अब हमने इस मद में 23 तरह के कार्य जोड़ दिए हैं, जिन्हें इसी राशि के उपयोग से करवाया जा सकता है. इन नए कार्यो में कूड़ा उठाना, पार्कों का निर्माण, पुस्तकालय, पानी की टंकी और महिला छात्रावासों का निर्माण शामिल है.'

उप-मुख्यमंत्री ने कहा, 'अब इस मद में आवंटित राशि से अनेक छोटे-छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कार्य करवाए जा सकेंगे और राष्ट्रीय राजधानी के 5,500 ब्लॉकों के विकास में मददगार होगा, जहां अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं.'

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