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'मेट्रो किराया बढ़ोत्तरी रोकने के लिए दिल्ली सरकार दे 3,000 करोड़'

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मेट्रो के किराए में बढ़ोत्तरी को सही ठहराया है

Updated On: Oct 07, 2017 04:23 PM IST

Bhasha

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'मेट्रो किराया बढ़ोत्तरी रोकने के लिए दिल्ली सरकार दे 3,000 करोड़'

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मेट्रो के किराए में प्रस्तावित इजाफे को कानूनसम्मत बताते हुए कहा है कि अगर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल किराया बढ़ोतरी को रोकना चाहते हैं तो दिल्ली सरकार को मेट्रो परिचालन में हर साल होने वाले 3,000 करोड़ रुपये की भरपायी करनी होगी.

पुरी ने केजरीवाल को लिखे पत्र में कहा है कि दिल्ली मेट्रो अधिनियम प्रस्तावित किराया बढ़ोतरी को रोकने की इजाजत नहीं देता है. उन्होंने कहा कि फिर भी यदि केजरीवाल किराया वृद्धि को रोकना चाहते हैं तो नई किराया निर्धारण समिति का गठन किया जा सकता है, बशर्ते दिल्ली सरकार DMRC को मेट्रो परिचालन में हर साल होने वाले 3,000 करोड़ रुपए की क्षति की भरपाई कर दे.

मौजूदा किराया निर्धारण समिति द्वारा किराए में प्रस्तावित बढ़ोतरी को आगामी दस अक्टूबर से लागू करने के DMRC के फैसले का दिल्ली सरकार लगातार विरोध कर रही है. इस बाबत केजरीवाल ने पुरी को हाल ही में पत्र लिख कर छह महीने में दो बार किराया बढ़ोतरी को जनता के साथ अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी बताते हुए इसे रोकने की मांग की थी.

हरदीप सिंह पुरी (फोटो: फेसबुक)

हरदीप सिंह पुरी (फोटो: फेसबुक)

DMRC ने किराया बढ़ाने का ब्योरा दिया 

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पुरी ने केजरीवाल के सुझावों पर विस्तार से विचार विमर्श कर उन्हें मौजूदा परिस्थतियों में किराए बढ़ोतरी को रोकना नामुमकिन बताते हुए उनकी मांग को स्वीकार करने के एवज में किए जा सकने वाले उपाय भी सुझाए हैं.

पुरी ने कहा कि मेट्रो रेल अधिनियम 2002 के तहत गठित समिति की सिफारिशें मेट्रो प्रबंधन पर बाध्यकारी होती हैं. इतना ही नहीं इस कानून के तहत केंद्र अथवा राज्य सरकार और DMRC के निदेशक मंडल के पास भी समिति की सिफारिशों में बदलाव करने का कानूनी अधिकार नहीं है.

पुरी ने दो बार किराया बढ़ोतरी में कम से कम एक साल का अंतर होने और सालाना सात प्रतिशत किराया बढ़ोतरी की अधिकतम सीमा की केजरीवाल की दलील को भी गलत बताया है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस साल मार्च में की गई किराए में बढ़ोतरी साढ़े सात साल के अंतराल के बाद की गई थी. यह बढ़ोतरी दो हिस्सों में लागू की गई, पहला हिस्सा मार्च में लागू किया गया और दूसरा हिस्सा 10 अक्टूबर से लागू किया जाना प्रस्तावित है. इसलिए इसे एक ही साल में दो बार की गई बढ़ोतरी नहीं कहा जा सकता है.

उन्होंने कहा कि सालाना किराया बढ़ोतरी की सात प्रतिशत की सीमा तय करने का नियम भी साल 2019 से लागू किया जाएगा. इस आधार पर किराया बढ़ोतरी की सीमा के उल्लंघन का केजरीवाल का आरोप भी गलत है. पत्र में पुरी ने साल 2002 से अब तक की गई किराये में बढ़ोतरी और मेट्रो परिचालन के खर्च का भी ब्योरा दिया है.

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