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कैदियों पर खर्च के मामले में दिल्ली, गोवा, महाराष्ट्र सबसे पीछे

नागालैंड की सरकार कैदियों पर सबसे ज्यादा प्रतिदिन 139.22 खर्च करती है

FP Staff Updated On: Jun 21, 2017 06:12 PM IST

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कैदियों पर खर्च के मामले में दिल्ली, गोवा, महाराष्ट्र सबसे पीछे

कैदियों के खाने पर दिल्ली, गोवा और महाराष्ट्र की सरकार प्रतिदिन का खर्च राष्ट्रीय औसत से भी कम करती है. सरकारी खातों में दर्ज प्रतिदिन तीन टाइम के खाने के लिए राष्ट्रीय औसत 52.42 रुपए तय की है. लेकिन तीनों राज्यों की सरकार ने औसत से भी कम खर्च में कैदियों को तीन टाइम का खाना दिया है. यह आंकड़ा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट का है.

हाल में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को कैदियों को रहन-सहन के स्तर में सुधार करने के लिए कहा था. महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को प्रत्येक जिले के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाने का निर्णय किया था. जिसका काम कैदियों को मिलने वाले खाने की कंडीशन की देखरेख का है.

जिले स्तर की कमेटी में एक आहार विज्ञ और दो समाजिक कार्यकर्ता होंगे. एक महिला और एक पुरुष का होना भी अनिवार्य है. कमेटी के सदस्य एक महीने में कम से कम एक बार जेल का दौरा करेंगे और खाने की क्वालिटी और क्वांटिटी की जांच करेंगे. इस आधार पर कमेटी अपना फीडबैक सरकार को देगी, जिसके आधार पर नियमों में सरकारी बदलाव किए जाएंगे.

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महाराष्ट्र सरकार के 2015 में कैदियों पर 84.76 करोड़ रुपए खर्च किए

दिल्ली और गोवा की सरकार महाराष्ट्र और गुजरात से भी कम खर्च करती है. कैदियों पर खर्च के मामले में नागालैंड का नंबर पहले स्थान पर है. नागालैंड कैदियों पर प्रतिदिन 139.22 खर्च करती है. जो कि जम्मू और कश्मीर के व्यय के आसपास है. जो कि 110.33 प्रतिदिन खर्च करती है.

मॉडल प्रीजन मैन्युअल नामक ड्राफ्ट के मुताबिक एक पुरुष कैदी में कैलोरी 2,320 और 2,730 के बीच है. वहीं महिला कैदियों की बात करें तो कैलोरी की संख्या 1900 से 2830 के बीच है. यह ड्राफ्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है.

एनसीआरबी के मुताबिक, साल 2015 में कैदियों के तीन टाईम के खाने पर प्रतिदिन 52.42 रुपए खर्च किए गए थे. जबकि महाराष्ट्र सरकार ने 2015 में कैदियों पर 84.76 करोड़ रुपए खर्च किए. जिसका 44 फीसदी खर्च कैदियों के खाने पर खर्च किया गया है. प्रत्येक कैदी को परिवार से प्रति महिने 1,500 और 2,200 रुपए अपने परिवार वालों से लेने की अनुमति है. जो कि वह जेल की कैंटीन में खर्च करते हैं.

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