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अगर अरावली के जंगलों को नहीं बचाया तो रेगिस्तान बन जाएगा पूरा दिल्ली-एनसीआर

Updated On: Jun 15, 2018 04:24 PM IST

FP Staff

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अगर अरावली के जंगलों को नहीं बचाया तो रेगिस्तान बन जाएगा पूरा दिल्ली-एनसीआर

अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं तो आपको सावधान हो जाना चाहिए. पर्यावरण विशेषज्ञों ने बीते तीन दिनों से चल रही धूल भरी आंधी के बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. विशेषज्ञों ने बताया कि अगर धूल भरी आंधी इसी तरह चलती रही तो पूरा दिल्ली-एनसीआर बंजर हो जाएगा.

विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा कि इस साल बार-बार धूल भरी आंधी आ रही है, इसके समय और प्रभाव में भी बढोतरी हुई है. बीते एक दशक में इस तरह की घटनाएं ज्यादा हुई हैं. 2002 में हफ्ते में चार दिनों के लिए आंधी आती थी लेकिन अब इसकी आवृत्ति बढ़ी है. सारे रेगिस्तान अपना विस्तार कर रहे हैं.

दक्षिण हरियाणा में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की स्टडी के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर जल्द बंजर होने की कगार पर है. पिछले तीन दशकों में जंगलों में कमी आई है. जबकि बंजर इलाके लगातार बढ़ रहे हैं.

स्टडी में यह भी कहा गया कि अरावली में जो जंगल हैं, उनका अब इतना प्रभाव नहीं रहा है. यह जंगल भी बंजर हो रहे हैं. अगर यह सब लगातार चलता रहा तो धूल भरी आंधी की आवृत्ति में लगातार इजाफा होता जाएगा. अरावली इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिल्ली, दक्षिण हरियाणा और बाकी के क्षेत्रों की सुरक्षा करता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दिल्ली-एनसीआर को बंजर होने से बचाना है तो अरावली के जंगलों को सुरक्षित करना होगा. दिल्ली-एनसीआर के बंजर होने का मतलब है पूरी हवा का ड्राई हो जाना और उसमें धूल के कणों की मात्रा का बढ़ जाना. केवल घनी वनस्पतियों द्वारा ही इस स्थिति से बचा जा सकता है.

सरकार के फैसले पहुंचा रहे अरावली को नुकसान

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सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद अवैध खनन जारी है. अरावली समेत तमाम जंगलों को काटा जा रहा है, पहाड़ तोड़े जा रहे हैं, जिसकी वजह से दिल्ली में मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ रहा है. जितना नुकसान अरावली को होगा, उतना ही दिल्ली पर खतरा बढ़ेगा. हालात ये हैं कि अलवर के पास हर साल करीब आधा किलोमीटर तक रेगिस्तान दिल्ली की तरफ बढ़ रहा है.

बता दें कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में हरियाणा सरकार ने फरीदाबाद की 17,000 एकड़ भूमि को 'वन भूमि' के दायरे से बाहर करने का प्रस्ताव दे दिया था. हालांकि बोर्ड ने दिसंबर 2017 में इसे रद्द कर दिया. बोर्ड ने कहा कि अरावली का दायरा पूरे एनसीआर में होगा. इसे हरियाणा के गुरुग्राम और राजस्थान के अलवर तक ही सीमित नहीं माना जाएगा.

गौरतलब है कि दिल्‍ली-जयपुर हाइवे, फरीदाबाद-गुड़गांव मेट्रो, फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड, दिल्‍ली-आगरा सिक्‍स लेन के लिए बड़े स्तर पर पेड़ काटे गए. अरावली के रेवेन्यू लैंड को हरियाणा सरकार ने वन मानने से ही इनकार कर दिया. सरकार पूरे अरावली में बिल्डिंगे खड़ी करना चाहती थी.

हालांकि पर्यावरणविदों के विरोध से ऐसा नहीं हो सका. 2014 से पहले हरियाणा सरकार अरावली में बने फार्महाउसों को वैध करने का भी प्रस्ताव लेकर आई थी लेकिन कर्नल सर्वदमन सिंह ने इस मुद्दे पर सरकार से लड़ाई लड़ी.

अरावली को बचाने की जरूरत

अरावली के जंगलों पर बड़े बिजनेसमैनों की नजर है, कोई वहां बिल्डिंग बनाना चाहता है तो कोई आश्रम. अरावली को बंजर बनाने के लिए नेता, ब्यूरोक्रेट्स और बिल्डर्स मिलकर काम कर रहे हैं.

हालांकि ऐसी दशा में राहत की बात ये है कि दिल्ली-एनसीआर में हर रविवार अरावली को बचाने के 'सेव अरावली' नाम से यात्रा निकलती है. इसमें 30 सदस्य हैं, सोशल मीडिया पर इस मुहिम से करीब 23 हजार लोग जुड़ गए हैं.

बता दें कि नवंबर 2017 में दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर 486 था जोकि दिसंबर में 469 और जनवरी 2018 में 408 रह गया. वहीं मार्च 2018 में प्रदूषण का स्तर 290 था जोकि अप्रैल में 356 और मई में 303 तक पहुंच गया.

यही हाल गुरुग्राम का भी है. यहां नवंबरऔर दिसंबर 2017 में वायु प्रदूषण का स्तर 494 और 373 था जबकि जनवरी, मार्च, अप्रैल और मई 2018 में यह स्तर क्रमश: 378, 366, 382 और 341 पहुंच गया.

अगर नोएडा की बात करें तो यहां भी प्रदूषण का स्तर ऐसा ही रहा है. नवंबर और दिसंबर 2017 में वायु प्रदूषण का स्तर 492 और 500 था जबकि जनवरी, मार्च, अप्रैल और मई 2018 में यह स्तर क्रमश: 483, 340, 434 और 346 पहुंच गया.

(न्यूज18 के इनपुट के साथ)

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