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दिल्ली में पुलिस और सरकार की लड़ाई के बीच फंसी जनता

दिल्ली पुलिस के लिए साल 2016 नाकामयाबियों का साल साबित हुआ

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Feb 14, 2017 05:39 PM IST

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दिल्ली में पुलिस और सरकार की लड़ाई के बीच फंसी जनता

दिल्ली में क्राइम के बढ़ते ग्राफ में तेजी बरकरार है. दिल्ली पुलिस और आप सरकार की तथाकथित लड़ाई का असर अब दिल्ली पुलिस के कामकाज पर भी दिखने लगा है.

दिल्ली पुलिस के लिए साल 2016 नाकामयाबियों का साल साबित हुआ. दिल्ली पुलिस के पूर्व पुलिस कमिश्नर और वर्तमान में सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा इस अवधि में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर थे.

दिल्ली पुलिस की सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते 15 सालों की अपेक्षा साल 2016 में सबसे ज्यादा एफआईआर दर्ज किए गए. दिल्ली में पिछले साल एक भी आतंकी हमले नहीं हुए.

दिल्ली पुलिस इसको अपनी सबसे बड़ी कामयाबी मान रही है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पिछले साल 12 आतंकियों को गिरफ्तार कर उनके आतंकी हमले के मंसूबे को खत्म किया.

दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस का रिकॉर्ड कहता है कि साल 2016 में दिल्ली पुलिस लगभग 74 प्रतिशत मामलों को सुलझा नहीं पाई. दहेज हत्या, डकैती, लूटपाट, अपहरण और रेप जैसे मामलों में भी कोई खास कमी नहीं आई है.

साल 2016 में कुल दो लाख 9 हजार 519 मामले दर्ज किए गए. जो साल 2015 के मुकाबले 9.48 प्रतिशत ज्यादा है. साल 2015 में एक लाख 91 हजार 377 मामले दर्ज किए गए थे.

एफआईआर तो दर्ज हुई पर केस नहीं सुलझा पाई

पुलिस ने हर मामले में केस तो जरूर दर्ज करने की कोशिश की, पर महज 26 प्रतिशत केसों को ही दिल्ली पुलिस सुलझाने में कामयाबी हासिल की. पिछले साल दर्ज हुए कुल 2 लाख 9 हजार 519 मामलों में 1 लाख 53 हजार 562 मामलों को दिल्ली पुलिस सुलझा नहीं पाई.

केस सुलझाने के मामले में साल 2016 घटिया साल रहा 

आंकड़ों के हिसाब से केस को सुलझाने के मामले में साल 2016 दिल्ली पुलिस के लिए सबसे घटिया साल रहा. साल 2016 में प्रमुख तौर पर हत्या के मामले में 119, हत्या के प्रयास के 84, लूटपाट के 1821 मामले, दुष्कर्म के 291 मामले और फिरौती के 99 मामलों को पुलिस नहीं सुलझा पाई.

कुछ मामले में दिल्ली पुलिस की तेजी दिखी

दिल्ली पुलिस के लिए एक बात अच्छी रही है वह है डकैती, हत्या जैसे अपराधों के मामले में गिरफ्तारी दर में तेजी आई है. महिलाओं के खिलाफ अपराध में भी 10.97 प्रतिशत की गिरावट आई है. वहीं बलात्कार के मामले में दो प्रतिशत की गिरावट आई है.

महिलाओं पर हुए अपराध में तेजी आई

दिल्ली पुलिस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार साल 2015 में बलात्कार के 2 हजार 199 मामले दर्ज हुए थे, जबकि साल 2016 में 2 हजार 155 मामले दर्ज किए गए.

ओवर-ऑल महिलाओं पर हुए अपराधों में लगातार तीसरे साल भी तेजी आई है. साल 2016 में महिलाओं पर हुए हर चार केस में तीन केस दिल्ली पुलिस नहीं सुलझा पाई. दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट से साबित होता है कि दिल्ली में हर घंटे महिलाएं अपराध की शिकार होती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं से बलात्कार की 97 फीसदी घटनाएं परिचित के द्वारा की जाती है.

दिल्ली पुलिस पर भी दाग लगे

दिल्ली पुलिस की वार्षिक रिपोर्ट में आपराधिक वारदातों में तो कमी का दावा किया गया है, पर दिल्ली पुलिस पर भी दाग लगे हैं.

साल 2016 में दिल्ली पुलिस के कुल 1200 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच बैठाई गई. इन अधिकारियों और कर्मचारियों पर जमीन और संपत्ति विवाद में मिलीभगत, जबरन वसूली, अवैध धंधों में संलिप्तता सहित जांच में कोताही बरतने के आरोप लगे हैं.

शराब पीकर गाड़ी चलाने की संख्या में इजाफा

पिछले साल शराब के नशे में गाड़ी चलाने पर ट्रैफिक पुलिस ने 28 हजार 6 लोगों पर मामला दर्ज किया. वहीं वाहन चोरी की रिपोर्ट में लगातार इजाफा हो रहा है.

देश के और मेट्रो शहरों की तुलना में दिल्ली में वाहन चोरी की वारदात में लगातार इजाफा हो रहा है. दिल्ली से चोरी हुई गाड़ियां बहुत कम ही मिल पाती हैं. पीड़ित दिल्ली पुलिस पर गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाते रहे हैं.

साल 2016 में 38 हजार 644 गाड़ियों के चोरी का केस दर्ज हुआ है. जबकि साल 2015 में 32 हजार 729 का आंकड़ा था.

दिल्ली पुलिस ने साल 2016 में विभिन्न नियमों के उल्लंघन करने वालों की एक लिस्ट जारी की है. जिसमें प्रमुख हैं. 92 हजार 37 लोगों ने रेडलाइट जंप करने पर चलान किए गए. 31 हजार 24 लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस जब्त किए गए. 86 हजार 771 लोगों को ओवर स्पीड को लेकर चलान काटे गए. एक लाख दो हजार 352 लोगों को ट्रिपल राइडिंग के लिए चलान किए गए. बिना हेलमेट गाड़ी चलाने पर 8 लाख 88 हजार 913 लोगों का चलान किया गया.

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के सभी जिलों में साइबर सेल का गठन किया है. साइबर सेल सोशल मीडिया पर नजर रख रही है. इकॉनोमिक और साइबर अपराध की ऑनलाइन शिकायत के लिए वेबसाइट और ऐप शुरू किए गए हैं. गूगल, ट्विटर और फेसबुक कंपनियों के साथ संवाद बनाने के लिए स्मार्ट पुलिसिंग की शुरुआत की गई है.

दिल्ली पुलिस की एनुअल रिपोर्ट जारी करने के मौके पर दिल्ली पुलिस के नए कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने मीडिया से बात नहीं की. 1978 के बाद दिल्ली पुलिस के इतिहास में ये पहला मौका है जब दिल्ली पुलिस ने सालाना पत्रकार वार्ता नहीं की. जाहिर है दिल्ली पुलिस कमिश्नर पत्रकारों के द्वारा पूछे जाने वाले सवाल से बचना चाह रहे हो.

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