S M L

‘थप्पड़कांड’ के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग : कितने दूर-कितने पास, केजरीवाल-अंशु प्रकाश

दिल्ली में पिछले सप्ताह हुए थप्पड़कांड के बाद दोनों की यह पहली मुलाकात थी.

Updated On: Feb 27, 2018 10:14 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

0
‘थप्पड़कांड’ के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग : कितने दूर-कितने पास, केजरीवाल-अंशु प्रकाश

मंगलवार को दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विधानसभा के बजट सत्र की तारीखों को अंतिम रूप देने के लिए हुई बैठक में भाग लिया. दिल्ली में पिछले सप्ताह हुए थप्पड़कांड के बाद दोनों की यह पहली मुलाकात थी. कैबिनेट की इस बैठक में दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र 16 मार्च से 28 मार्च तक किए जाने का फैसला लिया गया.

मंगलवार को हुई कैबिनेट की इस बैठक में अरविंद केजरीवाल और अंशु प्रकाश पास-पास रहते हुए भी दूर-दूर नजर आए. दोनों के बीच सिर्फ कैबिनेट मीटिंग से संबंधित मसले पर ही चर्चा हुई. बैठक से ठीक पहले मुख्य सचिव ने अपनी सुरक्षा को लेकर अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा था, जिसके बाद बैठक स्थल के पास दिल्ली पुलिस की तैनाती की गई.

अरविंद केजरीवाल और अंशु प्रकाश के बीच बहुप्रतीक्षित मुलाकात को लेकर मीडिया में काफी अटकलें लगाई जा रही थीं. मंगलवार दोपहर बाद तीन बजे दिल्‍ली सचिवालय में दोनों की मुलाकात हुई. इस बैठक में दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ कई और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही.

गौरतलब है कि पिछले दिनों ही दिल्ली के प्रमुख सचिव अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने उनके साथ बदसुलूकी की. अंशु प्रकाश के इस आरोप के बाद ही दिल्ली की राजनीति में गर्माहट आ गई थी.

राजनीतिक दलों के साथ-साथ देशभर के आईएएस एसोसिएशनों ने भी अंशु प्रकाश के साथ हुई बदसुलूकी को लेकर विरोध करना शुरू दिया. आईएएस अफसरों के एसोसिएशनों का साफ कहना है कि उन्हें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के लिखित माफीनामे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है.

anshu prakash

गौरतलब है कि प्रमुख सचिव के साथ कथित मारपीट के बाद आईएएस एसोसिएशन लगातार दबाव बना रही है. आईएएस एसोसिएशन का साफ कहना है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल घटना पर माफी मांगने के बजाए घटना से ही इंकार कर रहे हैं. घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी सीएम अरविंद केजरीवाल का इस मामले में माफी नहीं मांगना बताता है कि वह भी इस षड्यंत्र में शामिल हैं.

दास (दिल्ली एडमिनिस्ट्रेशन सबॉर्डिनेट सर्विस) के अध्यक्ष डीएन सिंह ने भी आईएएस एसोसिएशन की मांग का समर्थन किया है. डीएन सिंह ने फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए साफ कहा है, ‘इस मामले में जब तक दिल्ली के सीएम लिखित तौर पर और सार्वजनिक मंचों से माफी नहीं मांगते तब तक हमलोग कोई बातचीत नहीं करेंगे.’गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्य सचिव ने आरोप लगाया था कि 19 फरवरी की रात को आप के दो विधायक प्रकाश जारवाल और अमानतुल्ला खान ने उनके साथ मारपीट की.

आपको बता दें कि इस घटना के बाद कर्मचारियों के संयुक्त फोरम ने भी दिल्ली के एलजी अनिल बैजल और दिल्ली पुलिस से अपील की थी कि इस कथित हाथापाई मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर भी कार्रवाई की जाए.

दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने सोमवार को दिल्ली पुलिस के कमिश्नर से मुलाकात की. आप के इन नेताओं ने पुलिस आयुक्त को एक पत्र सौंपा है, जिसमें दिल्ली सचिवालय में दिल्ली सरकार के मंत्री इमरान हुसैन, डीडीसी के वायस चेयरमैन आशीष खेतान और उनके कुछ सहयोगियों पर हुए हमले के मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'मुख्य सचिव द्वारा आम आदमी पार्टी के विधायकों के खिलाफ की गई एक ऐसी शिकायत पर पुलिस जरूरत से ज्यादा सक्रिय होकर कार्रवाई कर रही है, जिस घटना का कोई सबूत भी मौजूद नहीं है. हमारे विधायकों को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया है और मुख्यमंत्री के घर पर पुलिस ने छापेमारी तक कर दी गई है. वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सचिवालय में दिल्ली सरकार के मंत्री और दूसरे लोगों पर हुए हमले में सारे सबूत होने के बावजूद भी दिल्ली पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, ऐसा करना पुलिस की दो तरह की न्याय प्रणाली की तरफ इशारा करता है.'

sanjay singh

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक को दिल्ली सचिवालय में हुई मारपीट की घटना के वीडियो सबूत और घायल लोगों की एमएलसी रिपोर्ट सौंपी और दिल्ली पुलिस आयुक्त से तुरंत कार्रवाई की मांग की है.'

इस कश्मकश में चारों चरफ से घिर चुकी केजरीवाल सरकार ने अब हर बैठक का लाइव प्रसारण कराने की बात कही है. ऐसा कहा जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल का यह फैसला आने वाले दिनों में किसी और विवाद से बचने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है.

ऐसी खबर मिल रही है कि मंगलवार को होने वाली बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा होगी. दिल्ली सरकार के इस फैसले पर अफसरशाही कोई अड़चन न लगा दे इसलिए मार्च में पेश होने वाले बजट में इसका प्रावधान भी करने की बात कही जा रही है. दिल्ली सरकार इसको लेकर बजट में भी अतिरिक्त खर्चे का फंड मुहैया करा सकती है.

दिल्ली सरकार अपने इस फैसले के जरिए एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश कर रही है. दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ मीटिंग का लाइव प्रसारण करने पर दिल्ली की जनता को दिल्ली सरकार और उनके अधिकारियों की मंशा का पता चल पाएगा. हर सरकारी बैठक को कैमरे के सामने कराकर अरविंद केजरीवाल जनता को यह बताना चाह रहे हैं कि किस तरह सरकारी अधिकारी उनके काम में बाधा डाल रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल अपने इस फैसले के जरिए सिस्टम में पारदर्शिता लाने की बात कर रहे हैं. सरकार के नीतिगत फैसलों से जुड़ी सभी फाइलों की स्थिति जनता को पता चलने की बात कर रहे हैं वहीं आईएएस एसोसिएशन का मानना है कि अरविंद केजरीवाल इस फैसले के जरिए मुख्य सचिव के साथ हुई मारपीट की घटना से ध्यान भटकाने का काम कर रहे हैं.

arvind-kejriwal1-1002x563

एक तरफ अरविंद केजरीवाल यह दिखाना चाह रहे हैं कि किस मंत्री ने किस फाइल को कितना जल्दी अधिकारियों के पास भेजा और उस अधिकारी ने उस फाइल को निपटाने में कितना वक्त लगाया. वहीं अधिकारियों के साथ लाइव प्रसारण के मुद्दे पर बीजेपी ने सवाल खड़े कर दिए हैं. दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता मीडिया से बात करते हुए कहते हैं कि जिस मुख्यमंत्री ने पिछले तीन सालों में पारदर्शिता और खुलेपन के विरुद्ध काम किया है वह प्रसारण की बात कर रहा है. विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि जो मुख्यमंत्री सरकार या अपनी पार्टी से जुड़ी जानकारी देने से बचता रहा है वह पारदर्शिता और नेक इरादे की बात कर रहा है!

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi