S M L

शहीदों के परिवार की फीस सीमित करने पर घिरी सरकार

सैन्य अधिकारियों की आपत्ति के बाद रक्षा मंत्री ने कहा है कि वो इस पर दुबारा विचार करेंगे

FP Staff Updated On: Dec 06, 2017 05:01 PM IST

0
शहीदों के परिवार की फीस सीमित करने पर घिरी सरकार

देश की हिफाज़त करते हुए शहीद, विकलांग और लापता हुए सैनिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए ट्यूशन और हॉस्टल फीस के भुगतान की सीमा सरकार ने 10 हजार रुपए कर दी है. इस फैसले पर सैन्य सेवाओं की आपत्ति के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है. रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को इस मुद्दे पर बैठक करेंगी.

अहमदाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि यह फैसला 7वें वेतन आयोग की सिफारिश पर कैबिनेट ने लिया है. हालांकि, वह इसे एक बार और देखेंगी. उन्होंने कहा, 'यह एक भावुक मुद्दा है. मैं शहीदों और उनके परिवारों का सम्मान करती हूं और मुझे पता है कि इससे उन्हें बुरा लगा होगा.'

सैन्य बलों और शहीदों के 3200 परिवारों को अब रक्षामंत्री के निर्णय का इंतजार हैं. सेना के सूत्रों के अनुसार, अगर रक्षा मंत्रालय 10 हजार की सीमा को हटाने से इनकार करता है या इसमें देरी करता है तो सेना अपने अफसरों और सैनिकों के आश्रितों की जिम्मेदारी खुद पर ले लगी.

एक वरिष्ठ आर्मी अफसर ने कहा, हम बहुत स्पष्ट हैं. हम शहीदों के बच्चों को संघर्ष करने नहीं देंगे. वह हमारी जिम्मेदारी हैं. उन्होंने कहा कि सैन्य बलों ने इस बाबत कई बार रक्षा मंत्री को चिट्ठी भी लिखी है कि वे इस निर्णय को बदल दें.

24 नवंबर को नेवी चीफ सुनील लाम्बा ने रक्षा मंत्री को चिट्ठी लिखी थी और आग्रह किया था कि वह इस मामले को व्यक्तिगत तौर पर संज्ञान में लें. उन्होंने लिखा था, ये जवान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देते हैं. इनके आश्रितों के शैक्षिक रियायत का प्रावधान उनकी प्रतिबद्धता के लिए सम्मान देना का एक छोटा प्रयास है. सर्विस हेडक्वार्टर ने इस मुद्दे को रक्षा मंत्रालय के सामने 10 अक्टूबर 2017 को ही उठाया था. लान्बा ने एअरफोर्स, नेवी और आर्मी के हवाले से भी निर्मला सीतारमण से इस मामले को संज्ञान लेने के लिए अनुरोध किया है.

साल 1972 में सरकार शहीदों और कार्रवाई के दौरान दिव्यांग हुए सैनिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए संस्थानों की ट्यूशन फीस पूरी तरह माफ करने का प्रावधान लाई थी. इसके बाद जुलाई 2017 में एक आदेश जारी करके 10 हजार रुपये इसकी अधिकतम सीमा तय कर दी गई थी. इसे लेकर मौजूदा और पूर्व सैनिकों में काफी गुस्सा है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
International Yoga Day 2018 पर सुनिए Natasha Noel की कविता, I Breathe

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi