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कश्मीर: आतंकी हमलों में आम नागरिक मौतों में 164 फीसदी का इजाफा

आतंकवाद से ग्रस्त जम्मू कश्मीर से लगातार आतंकवादी हमलों की खबरें आती रहती हैं

FP Staff Updated On: Jul 14, 2017 04:22 PM IST

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कश्मीर: आतंकी हमलों में आम नागरिक मौतों में 164 फीसदी का इजाफा

हाल ही में अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले में सात लोगों की जान चली गई. इसके साथ ही 30 जून, 2017 को खत्म हुए पिछले एक वर्ष में आतंकवाद से जुड़ी मौतों में 45 फीसदी वृद्धि का आंकड़ा सामने आया है.

यह जानकारी नई दिल्ली स्थित की एक संस्था ‘इंस्टीट्यूट फॉर कॉनफ्लिक्ट मैनेजमेंट’ द्वारा चलाए जाने वाले दक्षिण एशियाई आतंकवाद पोर्टल के आंकड़ों पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आई है. हम बता दें कि इसी अवधि के दौरान नागरिक मौतों में 164 फीसदी की वृद्धि हुई है. अमरनाथ हमले के बाद आई ये रिपोर्ट कश्मीर की चिंताजनक हालात के बारे में बताने को काफी है.

18 सालों में आतंकी हमलों में मारे गए 52 अमरनाथ तीर्थयात्री

पिछले 18 सालों में, पांच आतंकवादी हमलों में कम से कम 52 अमरनाथ तीर्थयात्री मारे गए हैं. 1 अगस्त, 2000 को लश्कर ए तैय्यबा के आतंकवादियों द्वारा सबसे घातक हमला किया गया था. उस हमले में पहलगाम में 21 तीर्थयात्री मारे गए थे.

हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी की मौत के एक साल होने के मौके पर संभावित हमले की आशंका में कश्मीर के कुछ हिस्सों में प्रतिबंध लगाए गए थे. इस प्रतिबंध के हटने के कुछ ही समय बाद आंतकियों ने हाल की इस घटना को अंजाम दिया.

एक साल पहले 8 जुलाई, 2016 को सुरक्षा बलों ने बुरहान वानी को मार गिराया था. इसके बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए, कई महीने कर्फ्यू लगा रहा और सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी रही.

एसएटीपी द्वारा संकलित आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, वानी की मौत के बाद एक वर्ष में आतंकवादी हिंसा में मारे जाने वाले सुरक्षा कर्मियों की संख्या करीब दोगुनी हुई है. आंकड़े 51 से बढ़ कर 98 हुए हैं. एसएटीपी मीडिया रिपोर्टों से आतंकवाद के कारण हुई मौतों का डेटा संकलित करता है. यह आंकड़े थोड़े वक्त के लिए हैं और 10 जुलाई, 2017 को संकलित किया गया है.

कुल मौतों में 45 फीसदी का इजाफा

वर्ष 2015-16 की तुलना में वर्ष 2016-17 में नागरिकों, सुरक्षाकर्मियों और आतंकवादियों की मौत में 45 फीसदी वृद्धि हुई है. एक वर्ष में यह आंकड़े 216 से बढ़कर 313 हुए हैं. पिछले पांच वर्षों में यह साल-दर-साल की उच्चतम वृद्धि है.

जैसा कि हमने बताया नागरिकों की मौत में 164 फीसदी वृद्धि हुई है. आंकड़े वर्ष 2015-16 में 14 थे, जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 37 हुए हैं. जबकि इसी अवधि के दौरान आतंकवादियों की मौत में 18 फीसदी की वृद्धि हुई है. वर्ष 2016-17 में आतंकवादी मौत के आंकड़े 178 हैं.

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए -2 के कार्यकाल के आखिरी तीन साल की तुलना में मई 2014 में बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से संबंधित मौतों में 42 फीसदी वृद्धि हुई है. इस संबंध में इंडियास्पेंड ने 27 मई, 2017 को विस्तार से बताया है.

(साभार: इंडियास्पेंड)

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