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सलमान की हत्या की साजिश: क्या हम फूलन देवी हत्याकांड से कुछ भी सीख पाए हैं?

जानकारों का कहना है कि सलमान और लॉरेंस की चाहे प्रत्यक्ष दुश्मनी न हो लेकिन इसके पीछे वैसी ही वजह है जो शेर सिंह राणा और फूलन देवी के बीच थी.

Mahendra Saini Updated On: Jun 11, 2018 03:41 PM IST

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सलमान की हत्या की साजिश: क्या हम फूलन देवी हत्याकांड से कुछ भी सीख पाए हैं?

सलमान खान की हत्या करने की साजिश का खुलासा होने से बॉलीवुड और सलमान के फैन्स के बीच दहशत फैल गई है. लोगों को मुम्बई अंडरवर्ल्ड के वे पुराने दिन याद आ गए हैं जब बॉलीवुड के लिए धमकियां, वसूली और मर्डर आम बातें हो गई थी. लोगों को गुलशन कुमार और मुकेश दुग्गल मर्डर केस अब भी याद हैं. फिल्म निर्माता राजीव राय तो भारत छोड़कर लंदन में ही शिफ्ट हो गए थे.

हालांकि भाई के नाम से मशहूर सलमान की हत्या की साजिश अंडरवर्ल्ड ने नहीं रची. ये जोधपुर के एक छोटे गैंग लॉरेंस बिश्नोई गैंग की योजना थी. लेकिन सिर्फ इसी वजह से इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. हरियाणा पुलिस की गिरफ्त में आए शार्प शूटर संपत नेहरा ने चौंकाने वाले कई खुलासे किए हैं. खुद सलमान के पिता सलीम खान इसकी पुष्टि कर चुके हैं.

बदमाश सम्पत नेहरा को हैदराबाद से पकड़ा गया है. उसने बताया है कि वो मुम्बई में सलमान के घर की रेकी भी कर चुका था. उसकी योजना के मुताबिक हत्या के तुरंत बाद वो विदेश भागने वाले था और लगभग सारी तैयारी पूरी कर भी ली गई थी. नेहरा पर करीब 11 हत्याओं समेत 2 दर्जन मामले चल रहे हैं. पुलिस सरगर्मी से उसकी तलाश कर रही थी. बिश्नोई गैंग ने जोधपुर में पेशी के दौरान सलमान की हत्या कर देने की धमकी दी थी. इसके बाद राजस्थान पुलिस ने सलमान की सुरक्षा भी बढ़ा दी थी.

सलमान से क्या दुश्मनी?

Salman Khan

ये तय है कि लॉरेंस बिश्नोई अपनी जिंदगी में शायद ही कभी सलमान खान से मिला होगा. फिर ऐसी क्या वजह है कि उसने सलमान की हत्या करने की साजिश रच डाली. जानकारों का कहना है कि सलमान और लॉरेंस की चाहे प्रत्यक्ष दुश्मनी न हो लेकिन इसके पीछे वैसी ही वजह है जो शेर सिंह राणा और फूलन देवी के बीच थी.

फूलन देवी ने खुद के साथ हुए अत्याचार का बदला लेने के लिए बेहमई में 22 राजपूतों की हत्या कर दी थी. उत्तरप्रदेश के इस मामले से सीधे न जुड़े होने के बावजूद उत्तराखंड के शेर सिंह राणा ने सिर्फ अपने सजातीय भाइयों की हत्या का बदला लेने के लिए फूलन देवी की हत्या कर दी.

सलमान खान से ठीक ऐसा ही बदला लॉरेंस बिश्नोई भी लेना चाहता था. दरअसल सलमान पर जोधपुर में काले हिरण के शिकार का मामला चल रहा है. बिश्नोई समाज काले हिरण को देवता मानता है. यही वजह है कि बिश्नोई समाज के बहुत से युवा 20 साल बाद भी सलमान से गहरी नाराजगी रखते हैं. नाराजगी इतनी ज्यादा कि आज भी पश्चिमी राजस्थान में ज्यादातर बिश्नोई लोग सलमान की कोई फिल्म नहीं देखते. ये भी कहा जाता है कि शिकार की उस रात अगर सलमान और बाकी कलाकार पीछा कर रहे बिश्नोई लोगों की पकड़ में आ जाते तो शायद वे जिंदा न रह पाते.

बिश्नोई समाज जीव जंतुओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाता है. ये वही समाज है जिसके 363 लोगों ने अपने सिर कटा लिए लेकिन पेड़ों को नहीं कटने दिया. पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली दुनिया मे इससे बड़ी कोई मिसाल नहीं है. अमृता बिश्नोई के नेतृत्व में ये बलिदान 18वीं सदी में दिया गया. 500 साल पहले बिश्नोई सम्प्रदाय के प्रवर्तक जाम्भोजी ने कहा था- 'सिर सांठे रूख रहे तो भी सस्तो जाण' यानी सिर कटा कर भी अगर एक पेड़ बचा लिया जाए तो भी ये सौदा महंगा नहीं है.

कौन है लॉरेंस बिश्नोई?

lawrence bishnoi

अजमेर जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई हाल तक एक छोटा मोटा अपराधी ही हुआ करता था. लेकिन पिछले कुछ साल में जरायमपेशा दुनिया मे इसने तेजी से नाम कमाया है. पिछले साल जोधपुर में इस गैंग ने भयंकर आतंक मचाया था. इस गैंग की वारदातें इतनी खौफनाक थी कि खुद हाइकोर्ट की खंडपीठ ने लॉ एंड आर्डर पर सरकार की खिंचाई की थी.

जोधपुर शहर के सरदारपुरा इलाके में बिश्नोई गैंग के गुंडे हरेंद्र जाट और पंजाब के कुख्यात शार्प शूटर काली ने मिलकर वासुदेव इसरानी नाम के व्यापारी की हत्या कर दी थी. इसरानी को पहले से ही रंगदारी और हत्या की धमकी दी जा रही थी. पुलिस ने उन्हें 2 सुरक्षाकर्मी भी मुहैया कराए थे. लेकिन वे उनकी जान बचाने में नाकाम रहे.

बताया जा रहा है कि लॉरेंस बिश्नोई ने उन युवाओं को अपने साथ जोड़ा है, जो छोटे मोटे अपराधों के चलते विचाराधीन कैदियों के रूप में जेल में आते थे. बिश्नोई को नजदीक से जानने वाले पुलिस अधिकारी भी उसे मनोविज्ञानी सरीखा बताते हैं. विचाराधीन युवा कैदियों का ब्रेनवाश कर बिश्नोई उन्हें गुंडागर्दी के टास्क सौंपता है. गिरफ्तार सम्पत नेहरा से भी उसकी जेल में ही मुलाकात हुई थी.

पश्चिमी राजस्थान में गुंडों को सरकारी शह!

anand pal singh

कुछ लोग तो इस गैंग को सरकारी संरक्षण होने का दावा भी करते हैं. बताया जाता है कि पश्चिमी राजस्थान में आनंदपाल और राजू ठेठ गिरोहों की गैंगवार के बीच ही लॉरेंस बिश्नोई को भी उभरने की शह दी गई. अगर ये सच है तो सवाल उठता है कि क्या पुलिस इस इलाके में गुंडों के जरिये जातीय संघर्ष को बढ़ावा देने का काम नहीं कर रही?

पिछले साल एनकाउंटर कर दिए गए आनंदपाल सिंह को उभारने के पीछे भी बीजेपी सरकार के कुछ मंत्रियों और कई स्थानीय नेताओं का हाथ बताया जाता था. हालांकि ये कभी प्रमाणित नहीं हो पाया. लेकिन एनकाउंटर के बाद खुद आनंदपाल के परिवार वालों ने आरोप लगाया कि नागौर, जोधपुर और चुरू से जुड़े नेताओं ने अपना भेद खुलने के डर से उसकी हत्या करवा दी.

असामाजिक तत्वों को सरकारी संरक्षण के ऐसे दावों पर इसलिए यकीन हो जाता है क्योंकि ऐसे नापाक गठबंधन हम अक्सर देखते सुनते आए हैं. मुम्बई में अंडरवर्ल्ड के राजनीतिक रिश्ते बॉलीवुड फिल्मों में भी दिखाए जाते हैं. राजनीतिक फायदों के लिए पंजाब में भिंडरावाले को पनपते हुए भी हमने देखा है. लेकिन ये तय है कि इनसे तात्कालिक फायदे जरूर हो जाते हैं पर समाज और कानून व्यवस्था के लिए बाद में ये नासूर ही साबित होते हैं.

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