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फांसी की सजा पर 'सुप्रीम' फैसला, भारत में बरकरार रहेगा मृत्युदंड

बुधवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि भारत में मृत्युदंड की सजा जारी रहेगी. सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच ने 2-1 के बहुमत से अपना फैसला दिया है

Updated On: Nov 28, 2018 12:54 PM IST

FP Staff

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फांसी की सजा पर 'सुप्रीम' फैसला, भारत में बरकरार रहेगा मृत्युदंड

बुधवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि भारत में मृत्युदंड की सजा जारी रहेगी. सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच ने 2-1 के बहुमत से अपना फैसला दिया है. इस बेंच में जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस हेमंत गुप्ता शामिल थे. न्यूज-18 की खबर के मुताबिक, छत्‍तीसगढ़ में ट्रिपल हत्‍या के आरोप में सजा पा चुके आरोपी के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है.

बेंच में शामिल सीनियर मोस्ट जज कुरियन जोसेफ ने लॉ कमीशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मृत्युदंड, समाज में अपराधों को खत्म करने में विफल रहा है. उन्होंने कहा कि ट्रायल आमतौर पर जनता की राय और सामूहिक मांग के बीच होता है और जांच एजेंसियां जुनूनी तौर पर जनता की भावनाओं के कारण इसके लिए अदालतों पर दबाव डालती हैं. लेकिन पीठ के अन्य दो जस्टिस अपने वरिष्ठ सहयोगी से सहमत नहीं थे.

बहुमत का फैसला पढ़ते हुए जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि मृत्युदंड एक वैध सजा है. उन्होंने इसके लिए 1980 में बचन सिंह और मछी सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया और कहा कि मृत्युदंड में सुधार किए जाने के मामले पर बहस की कोई जरूरत नहीं है.

हालांकि, संबंधित मामले में तीनों जजों ने सर्वसम्मति से दोषी छन्नू लाल वर्मा की मौत की सजा को उम्र कैद में बदल दिया. 2011 में वर्मा को ट्रिपल मर्डर का दोषी पाया गया था. शीर्ष अदालत ने बुधवार को कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिसमें यह दिखा हो कि उनमें सुधार नहीं हो सकता. ऐसे में उम्रकैद की सजा उनके अपराध के लिए पर्याप्त है.

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि ब्रिटेन, कई लैटिन अमेरिकी देशों और ऑस्ट्रेलियाई राज्यों से मृत्युदंड खत्म किया जाना भारत के कानून से इसे खत्म किए जाने का कोई आधार नहीं है.

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