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राफेल डील: वेबसाइट के खुलासे के बाद दसॉ की सफाई- स्वतंत्र रूप से किया रिलायंस ग्रुप का चुनाव

बुधवार को फ्रांस की मीडिया में एक रिपोर्ट छपी थी जिसके मुताबिक, दसॉल्ट एविएशन के पास राफेल सौदे के लिए अनिल अंबानी की कंपनी का चुनाव करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था

Updated On: Oct 25, 2018 04:21 PM IST

FP Staff

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राफेल डील: वेबसाइट के खुलासे के बाद दसॉ की सफाई- स्वतंत्र रूप से किया रिलायंस ग्रुप का चुनाव

भारत-फ्रांस के बीच हुए राफेल सौदे को लेकर फ्रांसिसी मीडिया में बुधवार को एक रिपोर्ट छपी थी. रिपोर्ट के मुताबिक, दसॉ एविएशन के पास राफेल सौदे के लिए अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. अब इस पूरे मामले पर दसॉल्ट एविएशन ने सफाई पेश की है और कहा है कि उसने ज्वॉइंट वेंचर के पार्टनर के रूप में स्वतंत्र रूप से ही रिलायंस कंपनी का चुनाव किया है.

बुधवार को दसॉ एविएशन ने अपना स्पष्टीकरण जारी किया. कंपनी ने कहा कि भारतीय नियमों (रक्षा खरीद प्रक्रिया) के अनुपालन के लिए उसे 50 फीसदी का ऑफसेट अनुबंध करना था. इसके लिए कंपनी ने एक ज्वॉइंट वेंचर बनाने का फैसला किया और स्वंतत्र रूप से रिलायंस ग्रुप का चुनाव किया गया. दसॉ एविएशन ने बताया है कि 10 फरवरी 2017 को इस ज्वॉइंट वेंचर का निर्माण किया गया और इसे दसॉ रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (डीआरएएल) का नाम दिया गया.

दसॉ एविएशन ने अपने बयान में कहा है कि इस सौदे में फ्रांस के नियमों का भी पालन किया गया है. इसी के तहत चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर लोइक सेगलन ने रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड के गठन की जानकारी सेंट्रल वर्क काउंसिल को भी 11 मई 2017 को दे दी थी. स्पष्टीकरण में कहा गया है कि दसॉल्ट एविएशन ने बीटीएसएल, डीईएफएसवाईएस, काइनेटिक, महिंद्रा, मैनी और एसएएमटीईएल जैसी अन्य कंपनियों से भी साझेदारी पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके अलावा 100 अन्य संभावित साझीदारों के साथ बातचीत जारी है.

राफेल को सौदे के लिए 2012 में यूपीए सरकार ने चुना था

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि नागपुर में 27 अक्टूबर 2017 को बने डीआरएएल प्लांट में फाल्कॉन 2000 विमानों के पार्ट्स का निर्माण होगा और दूसरे चरण में राफेल विमान के लिए पार्ट्स भी यहां बनेंगे. कंपनी ने पुष्टि की है कि पहले फाल्कॉन 2000 के पार्ट्स का इस साल के अंत तक निर्माण हो जाएगा. कंपनी ने कहा है कि इसके लिए फ्रांस ने भारतीय प्रबंधकों और कुशल श्रमिकों की एक टीम को ट्रेनिंग दी थी.

राफेल विमान को सौदे के लिए 2012 में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान चुना गया था. शुरुआत में, भारत ने फ्रांस से 18 ऑफ द शेल्फ जेट खरीदने की योजना बनाई थी. इसके अलावा 108 विमानों का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया जाना था.

59 हजार करोड़ के राफेल सौदे में फ्रांस की एविएशन कंपनी दसॉल्ट की रिलायंस मुख्य ऑफसेट पार्टनर है. फ्रांस की एक वेबसाइट ने इस डील से लेकर एक नई रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में दसॉल्ट एविएशन के कथित डॉक्यूमेंट इसकी पुष्टि करते हैं कि उसके पास अनिल अंबानी की कंपनी को पार्टनर चुनने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं था.

सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है मामला

राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. इस डील को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार बताए कि उसने राफेल डील कैसे की. कोर्ट ने कहा कि 29 अक्टूबर तक डील होने की पूरी प्रक्रिया को सरकार उपलब्ध कराए. इस मामले की अगली सुनवाई अब 31 अक्टूबर को होगी.

कोर्ट का कहना है कि सरकार राफेल विमान की कीमतों का खुलासा या तकनीकी जानकारी उपलब्ध न कराए लेकिन राफेल डील की प्रक्रिया की पूरी जानकारी दे. सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल को सीलबंद लिफाफे में जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है.

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