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दलित का आरोप- जाति बताने पर पुलिसकर्मियों ने चटवाए जूते

38 साल के पीड़ित हर्षद जादव ने एफआईआर में कहा है कि पुलिस ने उसे उस वक्त हिरासत में ले लिया क्योंकि उसने अपने इलाके में हुई एक घटना के बारे में कांस्टेबल से पूछा था

Bhasha Updated On: Jan 04, 2018 01:26 PM IST

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दलित का आरोप- जाति बताने पर पुलिसकर्मियों ने चटवाए जूते

अहमदाबाद में एक दलित शख्स ने पुलिसकर्मियों पर जूते चटवाने का आरोप लगाया है. पीड़ित के मुताबिक, जब थाने में उसने अपनी जाति बताई तो उससे 15 पुलिसकर्मियों के जूते चटवाए गए.

38 साल के पीड़ित का नाम हर्षद जादव है. उसकी ओर से दाखिल एफआईआर के मुताबिक, पुलिस ने 28 दिसंबर की रात उसे तब हिरासत में ले लिया, जब उसने अपने इलाके में हुई एक घटना के बारे में मौके पर मौजूद पुलिस कांस्टेबल से पूछा.

जादव की ओर से दाखिल प्राथमिकी का हवाला देते हुए अधिकारी ने कहा कि उसे उसी रात पुलिस थाने ले जाया गया और लॉकअप में बंद कर दिया गया.

कांस्टेबल की पिटाई में टूटी उंगली

अमरायवाडी पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने एफआईआर के हवाले से बताया कि विनोदभाई बाबूभाई नाम के कांस्टेबल ने बगैर किसी उकसावे के जादव को एक डंडे से पीटा, जिससे उसकी उंगली टूट गई. विनोदभाई ने जादव के परिजन को गालियां भी दी.

जाति पूछकर चटवाए जूते

अधिकारी ने बताया कि इसके बाद कुछ पुलिसकर्मियों ने जादव से उसकी जाति पूछी. जब उसने उन्हें बताया कि वह एक दलित है तो उन्होंने उसे बाबूभाई के पैर छूकर माफी मांगने को कहा.

इसके बाद कुछ वरिष्ठ कर्मियों ने जादव को पुलिस थाने के करीब 15 पुलिसकर्मियों के जूते चाटने को मजबूर किया. स्थानीय अदालत ने 29 दिसंबर को जादव को जमानत दे दी.

आरोपी कांस्टेबल की गिरफ्तारी अब तक नहीं

अमरायवाडी पुलिस थाने के इंस्पेक्टर ओ एम देसाई ने कहा कि प्राथमिकी के बाद कांस्टेबल के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न निरोधक) कानून के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई और अपराध शाखा इस मामले की जांच कर रही है. यहां बता दें की आरोपी कांस्टेबल की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है.

पुलिसकर्मियों के जूते चाटने के लिए मजबूर करने के बारे में जादव की ओर से लगाए गए आरोप पर पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गिरीश पंड्या ने घटना के बारे में बताने में जादव की ओर से की गई देरी पर सवाल उठाए.

पंड्या ने कहा कि शिकायतकर्ता को एक कांस्टेबल पर हमले के आरोप में गिरफ्तार किया गया और (29 दिसंबर को) अदालत ले जाया गया, लेकिन उसने अदालत में इस घटना के बारे में कुछ नहीं बताया. जादव ने 30 या 31 दिसंबर को भी पुलिस का रुख नहीं किया.

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